पन्नू की हत्या की साजिश का मामला सामने आने के बाद क्या खटाई में पड़ गया है गणतंत्र दिवस पर बाइडेन का भारत दौरा!

मोदी सरकार पहले निज्जर हत्याकांड से और अब पन्नू मामले से घिर गई है, और संभवत: उस मामले से भी जिसमें बर्रिमंघम में रहने वाले एक खालिस्तानी चरमपंथी अवतार सिंह खंडा की मौत से भी घिरी है, जिसके बारे में उसके परिवार वालों को शक है कि उसे जहर देकर मारा गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
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आशीस रे

क्या अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन अगले साल के गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनने का भारत सरकार का निमंत्रण स्वीकार करेंगे? भारत में अमेरिकी दूतावास ने निमंत्रण को अधिकारिक तौर पर प्राप्त होने की बात को  माना है, ऐसे में परंपरागत कूटनीतिक समझ से माना जा सकता है कि बाइडेन ने भारत का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है।

लेकिन, व्हाईट हाऊस के एक सूत्र का कहना है कि, ‘ फिलहाल अभी किसी यात्रा की घोषणा नहीं की गई है।’ एक पूर्व भारतीय राजदूत की भी टिप्पणी है कि, ‘यह तथ्य अपने आप में बड़ी बात है कि उन्होंने अभी इसकी (बाइडेन द्वारा निमंत्रण स्वीकार करने की) पुष्टि नहीं की है।’

(ऐतिहासिक तौर पर देखें तो, इस तरह के निमंत्रण को विनम्रता से अस्वीकार कर दिया गया होगा, क्योंकि भारत के गणतंत्र दिवस के लगभग नौ सप्ताह बाद लोकसभा चुनाव होने हैं और सरकारों के प्रमुख आमतौर पर ऐसे समय में किसी देश के दौरे से बचते हैं।)

लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि एक अमेरिकी नागरिक की हत्या की साजिश रचने के दो मामलों में न्यूयॉर्क की एक अदालत में एक भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिससे इस मोर्चे पर कुछ रुकावट आ सकती है। गुप्ता को अमेरिकी अपसरों के अनुरोध पर चेक गणराज्य में गिरफ्तार किया गया और अमेरिका वापस लाया गया है।

आरोप पत्र में कहा गया है, ‘इस साल कुछ समय पूर्व भारत सरकार के एक कर्मचारी (‘CC-1’) जो भारत और अन्य जगहों पर मौजूद अन्य लोगों, जिनमें आरोपी निखिल गुप्ता (‘गुप्ता’) उर्फ ‘निक’ भी शामिल है, के साथ मिलकर अमेरिका में एक वकील और राजनीतिक कार्यकर्ता, जोकि भारतीय मूल का एक अमेरिकी नागरिक (पीड़ित) है और न्यूयॉर्क सिटी में रहता है, की हत्या की योजना तैयार की।’

जिसे निशाना बनाया गया, माना जा रहा है कि वह अमृतसर में जन्मा गुरपतवंत सिंह पन्नू है, जिसने सार्वजनिक तौर पर पंजाब को भारत से अलग करने और खालिस्तान स्थापित करने का आह्वान किया है। पिछले महीने ही, पन्नू ने एक वीडियो चेतावनी देकर कहा था कि सिख लोग एयर इंडिया के विमानों से यात्रा न करें, क्योंकि इससे उनकी ‘जान को खतरा’ हो सकता है।

आरोपपत्र में आगे कहा गया है, ‘CC-1 का ब्योरा भारत सरकार द्वारा 'सुरक्षा प्रबंधन' और 'इंटेलिजेंस' में जिम्मेदारियों के साथ 'वरिष्ठ फील्ड अधिकारी' के रूप में नियुक्त किए जाने के तौर पर सामने आया है। CC-1 के बारे में यह जानकारी भी है कि वह भारत के केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में काम कर चुका है और उसे 'युद्ध कौशल' और 'हथियारो' चलाने का 'अधिकारी प्रशिक्षण' मिला हुआ है। CC-1 इस अभियोग की अवधि के दौरान से संबंधित हर समय भारत सरकार के लिए काम करता है, भारत में रहता है, और भारत से ही हत्या की साजिश के दिशा-निर्देश देता था।'


इसमें आगे बताया गया है, ‘मई 2023 या उसके आसपास, CC-1 ने पीड़ित की अमेरिका में ही हत्या के लिए गुप्ता को सुपारी दी। गुप्ता, जोकि भारतीय नागरिक है और भारत में ही रहता है, CC-1 का सहयोगी है और उसने CC-1 और अन्य लोगों के साथ अपनी बातचीत में खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी में शामिल होने की बात कही है।’

आरोपपत्र में और आगे कहा गया है, ‘CC-1 के निर्देश पर, गुप्ता ने न्यूयॉर्क में पीड़ित की हत्या करने के लिए किराए के हत्यारे का इंतजाम करने के लिए एक ऐसे व्यक्ति से संपर्क किया जिसे गुप्ता ने आपराधिक सहयोगी मान लिया था, लेकिन दरअसल वह अमेरिकी सरकार की एजेंसियों (‘CS’) के साथ काम करता था।’ CS ने गुप्ता को एक व्यक्ति से किराए का हत्यारा कहकर मिलवाया, लेकिन दरअसल वह व्यक्ति अमेरिकी एजेंसियों का अंडरकवर अफसर (‘UC’) था। CC-1 गुप्ता द्वारा कराए गए इस समझौते के लिए अंतत: तैयार हो गया और पीड़ित की हत्या के लिए एक लाख डॉलर UC को देने पर सहमति बन गई। 9 जून, 2023 या उसके आसपास, CC-1 और गुप्ता ने एक सहयोगी के हाथ UC को मैनहटन, न्यूयॉर्क में 15,000 डॉलर नकद भिजवाए, जोकि हत्या के लिए पेशगी  थी।‘

आगे बताया गया कि, ‘CC-1 और गुप्ता के बीच हुई कई बार की टेलोफोन बातचीत और संकेतों में अन्य इलेक्ट्रॉनिक संवादों में CC-1 ने गुप्ता से पीड़ित की हत्या कराने का सौदा किया और बदले में भारत में गुप्ता के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों को खत्म कराने का वादा किया।’

CC-1 और गुप्ता के बीच कथित सांठगांठ के बारे में विस्तार से बताते हुए, आरोप पत्र में कहा गया है कि '12 मई, 2023 को या उसके आसपास, CC-1 ने गुप्ता को आश्वासन दिया था कि उसके खिलाफ आपराधिक मामले का 'पहले ही निपटारा कर लिया गया है'। मामले को गुजरात में होने का हवाला दिया गया था, और CC-1 ने गुप्ता को बताया कि उन्होंने 'आपके गुजरात [मामले] के बारे में बॉस से बात की' है और यह 'सब कुछ खत्म हो गया' है था और 'कोई भी आपको फिर कभी परेशान नहीं करेगा।'

न्यूयॉर्क के अटॉर्नी के कार्याय ने दक्षिणी जिले की अदालत में यह भी दाखिल किया है कि, ‘CC-1 ने जिस टेलीफोन नंबर का इस्तेमाल किया उसमें कंट्री कोड में भारत का कोड है और यह उस ई-मेल के साथ रजिस्टर्ड है जो इंटरनेट प्रोटोकॉल के आधार पर बताता है कि हत्या की साजिश के दौरान नई दिल्ली के आसपास इस्तेमाल किया गया, जहां इस अवधि में CC-1 एक भारतीय एजेंसी के लिए काम करता है...।’

आरोपों में कहा गया है कि गुप्ता ने CS के भेजे टेक्स्ट मैसेज के स्क्रीनशॉट CC-1 को भेजे, जिसने जवाब में कहा, ‘हम 15,000 डॉलर देने को तैयार हैं....काम की क्वालिटी के आधार पर पैसा बढ़ा दिया जाएगा...और अगर यह जल्द से जल्द हो गया तो...।’ असको जवाब में गुप्ता ने ओके लिखा था, और जोड़ा था कि एडवांस अभी संभव नहीं है, लेकिन काम होने के  बाद पूरा पैसा 24 घंटे में दे दिया जाएगा। एक व्यक्ति जिसकी पहचान ‘इंडीविजुअल-1’ के तौर पर की गई है, उसने UC को न्यूयॉर्क के मैनहटन में 9 जून, 2023 या उसके आसपास 15,000 डॉलर दिए। पैसे के इस लेनदेन की फोटोग्राफी पैसा देने वाले की जानकारी के बिना की गई थी।


ऐसा लगता है कि अमेरिकी वकीलों और अफसरों के पास कुछ और अहम सबूत भी हैं जिनमें भारत में किसी कॉन्फ्रेंस रूम में तीन लोग हैं जिनकी तरफ गुप्ता ने CS से वीडियो कॉल के दौरान कैमरा घुमा दिया था।

इसके साथ ही ऐसा लगता है कि चार्जशीट एक तरह से कनाडा के वैंकूवर के पास एक मुखर खालिस्तानी एक्टिविस्ट हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में नरेंद्र मोदी सरकार के हाथ की पुष्टि करती है। यह आरोप कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो भारत पर लगा चुके हैं। इसमें कहा गया है कि 18 जून को इस घटना के दिन, ‘CC-1 ने गुप्ता को एक वीडियो क्लिप भेजा जिसमें निज्जर का खून से लथपथ शरीर उनके वाहन में पड़ा हुआ दिखाया गया था।' गुप्ता ने वीडियो को 'CC-1 से हासिल होने के कुछ मिनट बाद' CS और UC को भेजा था।

आरोप आगे बताते हैं कि, ’30 जून, 2023 या उसके आसपास, गुप्ता ने भारत से चेक गणराज्य की यात्रा की। चेक गणराज्य पहुंचने पर गुप्ता को चेक अधिकारियों ने पीड़ित की हत्या की साजिश रचने के आरोप में अमेरिका के आग्रह पर गिरफ्तार कर लिया।

इस नए घटनाक्रम में, बाइडेन की भारत यात्रा अब मोदी सरकार के उस कदम पर निर्भर हो सकती है कि वह पन्नू की हत्या की साजिश के आरोप से खुद को मुक्त कर सके, जोकि प्रथम दृष्टया मुश्किल लगता है। अमेरिका ने CC-1 को नहीं सौंपने पर पूछताछ करने और गुप्ता के साथ वीडियो कॉल में मौजूद तीन लोगों से पूछताछ की मांग की है।

वाशिंगटन में इस ऐलान से पहले, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने जल्दबाजी में स्वीकार किया था कि "18 नवंबर 2023 को, भारत सरकार ने इस मामले के सभी प्रासंगिक पहलुओं को देखने के लिए एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है।" इस बयान का संदर्भ अमेरिका द्वारा "संगठित अपराधियों, बंदूकों के कारोबारियों, आतंकवादियों और अन्य लोगों के बीच सांठगांठ से संबंधित कुछ इनपुट" साझा करने से जुड़ा था।

यह स्पष्ट है कि यह जांच दोनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्रियों के बीच 10 नवंबर को हुई वार्षिक 2+2 बैठक से शुरू हुई थी, जिसमें अमेरिका ने पन्नू मामले की गंभीरता पर जोर दिया था।

टाइम मैगजीन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ‘यह मामला (पन्नू की हत्या की साजिश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दिल्ली में सितंबर में हुई जी-20 की बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी उठाया था।’

अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में जॉर्ज बुश शासन के दौरान एशिया पॉलिसी के प्रमुख रहे माइकल ग्रीन का बयान भी सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि, ‘अगर मोदी रॉ (भारतीय खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) को काबू में नहीं रखते या ऐसा करना नहीं चाहते, तो इससे बाइडेन के साथ उनके रिश्ते खराब हो सकते हैं।’

इसी तरह वाशिंगटन स्थित कारनेजी इंडाउमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के एक सीनियर फेलो ने भी चेताया है कि, ‘नई दिल्ली का यह मानना गलती होगा कि चीन के खिलाफ संतुलन बनाने की अमेरिकी रणनीति में भारत को मिल रहे महत्व से भारत को अमेरिकी नागरिकों को एकतरफा निशाना बनाने की छूट देता है।‘


इस बीच एक स्वतंत्र जर्मन पेपर ‘डाय तागेज़ितुंग’ ने मोदी पर एक लेख प्रकाशित किया है जिसका शीर्षक है, ‘अगला पुतिन’। इसमें कहा गया है, ‘भारतीय राजनीतिक पद्धति को सही तरह से लोकतांत्रिक अधिनायकवाद या 'चुनावी निरंकुशता' के रूप में वर्णित किया जा सकता है, जिसमें आलोचनात्मक आवाज़ों को व्यवस्थित रूप से अपराधी बना दिया जाता है और बीजेपी और अडानी समूह के नेतृत्व वाले भारतीय कार्पोरेट के कार्टेल जैसे समूह के बीच गहरा गठबंधन है।' इसमें जोर देकर कहा गया है कि, 'कदम उठाने की जरूरत है... अगर मोदी अगला आम चुनाव जीतते हैं, तो वह अगले पुतिन हो सकते हैं।'

फिलहाल मोदी सरकार पहले निज्जर हत्याकांड से और अब पन्नू मामले से घिर गई है, और संभवत: उस मामले से भी जिसमें बर्रिमंघम में रहने वाले एक खालिस्तानी चरमपंथी अवतार सिंह खंडा की मौत से भी घिरी है, जिसके बारे में उसके परिवार वालों को शक है कि उसे जहर देकर मारा गया है। हालांकि ब्रिटिश पुलिस ने इस दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि खंडा की मौत ल्यूकेमिया से हुई थी।

नव-मोसादवाद, डोवलवाद या भारत की बाहरी जासूसी में हुए बदलाव खतरे को जन्म दे रहे हैं और भारत की लोकतांत्रिक साख को ख़राब कर रहे हैं। तय नहीं है कि कुलभूषण जाधव दोषी हैं या निर्दोष, लेकिन भारतीय नौसेना में काम कर चुके कुलभूषण जाधव जासूसी के आरोप में 2016 से पाकिस्तानी जेल में बंद हैं। उधर अब कतर में आठ भारतीयों को मौत की सजा सुनाई गई है।

भले आर्थिक स्थितियां भारत को कूटनीतिक लाभ देती हैं, लेकिन विदेशों में अप्रासंगिक खालिस्तानियों को निपटाने के तरीके के रूप में सरकारी गैंगस्टरवाद का विकल्प चुनना, अगर हकीकत में ऐसा है, और जबकि पंजाब में अलगाववाद व्यावहारिक रूप से एक गैर-मुद्दा है, तो यह एक संवेदनहीन और खतरनाक कदम है।

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