मोदी सरकार में हुआ एलआईसी का बेड़ा गर्क, दबाव डाल वहां निवेश कराया जहां से पैसा नहीं लौटा

मोदी सरकार में पिछले कुछ सालों में एलआईसी का एनपीए लगातार बढ़ा है। एनपीए का अर्थ है कि कर्ज या निवेश के तौर पर दी गई रकम के वापस नहीं मिलने पर उसे एनपीए करार दिया जाता है। ऐसे में सवाल है कि एलआईसी ऐसी जगह निवेश क्यों करती रही, जहां से लौटना मुश्किल है।

फोटोः सोशल मीडिया
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एस राहुल

मोदी सरकार एलआईसी में विनिवेश करने जा रही है। कारण, सरकार के पास पैसा नहीं। अगर सरकार के पास पैसा नहीं है तो उसके लिए दोषी कौन है, यह सरकार नहीं बताती है। सरकार की गलत नीतियों की वजह से राजस्व नहीं मिल रहा है तो खजाना खाली होना ही है।

वैसे, एलआईसी की हालत सही नहीं है। एलआईसी की 2018-19 की वार्षिक रिपोर्ट बताती है कि बैंकों की तरह एलआईसी का एनपीए भी बढ़ रहा है। इस रिपोर्ट में पिछले कुछ सालों का ब्यौरा दिया गया है। 2014-15 में एलआईसी का एनपीए अनुपात 3.30 प्रतिशत था, जो 2015-16 में बढ़कर 3.76 हो गया और इसके बाद लगातार बढ़ता गया। साल 2016- 17 में 4.73 प्रतिशत, 2017-18 में 6.23 प्रतिशत और 2018-19 में बढ़कर 6.15 प्रतिशत हो गया।

यानी कि पांच साल के दौरान एलआईसी एनपीए बढ़कर लगभग दोगुना हो गया। हालांकि 2019-20 को पूरा होने में लगभग पौने दो माह बचे हैं, उसके बाद ही पता चलेगा कि इस बार एलआईसी का एनपीए कितना रहा, लेकिन एलआईसी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पिछले नौ माह का हाल देखते हुए कहा जा सकता है कि एलआईसी का एनपीए पिछले सब सालों के मुकाबलेअधिक होगा।

एनपीए का सीधा मतलब है कि आप जो पैसा एलआईसी में जमा कराते हैं, उस पैसे को एलआईसी लोन के रूप में देती है या निवेश करती है, लेकिन पिछले कुछ सालों से एलआईसी का पैसा लौटाया नहीं जा रहा है। ऐसे में उसकी हालत का खराब होना जायज ही है। लेकिन सवाल उठता है कि एलआईसी ऐसी जगह पैसा निवेश क्यों कर रही है या लोन दे रही है, जहां से लौटना मुश्किल है।

दरअसल नरेंद्र मोदी सरकार के दबाव में एलआईसी ऐसी जगह निवेश कर रही है, जहां से पैसा लौट नहीं रहा है। जैसे कि नवंबर 2017 में एलआईसी ने सरकार द्वारा घोषित आईपीओ न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी का 50 फीसदी शेयर खरीदा और 5,713 करोड़ का कुल निवेश किया था, जिसमें एक शेयर की कीमत उस समय 800 रुपये थी, लेकिन 3 फरवरी 2020 को इसकी शेयर वैल्यू 137.45 रुपये पर पहुंच गई।


ऐसा ही कुछ दूसरी बीमा कंपनी जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन के साथ हुआ। इस कंपनी से भी नरेंद्र मोदी सरकार ने अपनी हिस्सेदारी कम करने के लिए आईपीओ लॉन्च की और सरकार के दखल पर एलआईसी ने अक्टूबर, 2017 में 5,641 करोड़ रुपये का निवेश किया। तब इसकी शेयर वैल्यू 850 रुपये थी, जो 3 फरवरी, 2020 को गिरकर 233.90 रुपये हो गई है। इसके अलावा एलआईसी ने मार्च, 2018 में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटिड में 2843 करोड़ रुपये का निवेश किया, लेकिन, अब उसकी कीमतों में लगभग 40 फीसदी की गिरावट है। इसी तरह एलआईसी ने एमएसटीसी और भारत डाएनेमिक्स में भी निवेश किया था, उनकी भी हालात काफी खराब है।

एलआईसी को सबसे बड़ा नुकसान आईडीबीआई के अधिग्रहण से हुआ है। आईडीबीआई को बचाने के लिए मोदी सरकार ने एलआईसी को आगे झोंक दिया और सितंबर से दिसंबर 2018 के बीच एलआईसी ने आईडीबीआई में लगभग 21,624 करोड़ रुपये निवेश किया। मात्र एक साल के भीतर इक्विटी में 47 फीसदी की गिरावट आई और इक्विटी होल्डिंग 10,967 करोड़ पहुंच गई।

दिलचस्प यह है कि नए बजट में सरकार ने आइडीबीआई को बेचने की बात की है। इसी तरह एलआईसी ने अगस्त, 2017 में 4,275 करोड़ रुपये का निवेश किया, लेकिन यहां भी एलआईसी के निवेश की कीमतें घट रही हैं। आरबीआई की एक रिपोर्ट बताती है कि एलआईसी द्वारा पिछले पांच साल के दौरान पब्लिक सेक्टर में निवेश बहुत अधिक बढ़ गया है। 2014 में एलआईसी ने 11,94,261 करोड़ रुपये का निवेश पब्लिक सेक्टर में किया था, जो 2019 में लगभग दोगुना बढ़कर 22,64,129 करोड़ पहुंच गया। इसी तरह 2014 के बाद से स्टॉक मार्केट में एलआईसी ने निवेश बहुत बढ़ा दिया।

एलआईसी के अलावा मोदी सरकार लोगों की छोटी बचत को भी दांव पर लगा रही है। लघु बचत योजनाओं का सारा पैसा नेशनल स्माल सेविंग्स फंड (एनएसएसएफ) में जमा होता है। एनएसएसएफ द्वारा ऐसी जगह पर निवेश किया जाता है, जहां से समय पर पैसा लौट आए, लेकिन पिछले दो-तीन साल से उस पर भी सरकार का दबाव है। एनएसएसएफ को कहा गया कि वह एफसीआई को लोन दे। एफसीआई किसानों से फसल खरीदता है और उसमें एक बड़ा हिस्सा गरीबों को सब्सिडी कीमत पर देता है, लेकिन खाद्य निगम लाभ कमाने वाली संस्था नहीं है, इसलिए अगर उसे सरकार सपोर्ट नहीं करती तो उसके पास आमदनी का अलग से कोई जरिया नहीं है, इसलिए वह एनएसएसएफ का पैसा कैसे लौटाएगा।

नए बजट में सरकार ने लक्ष्य रखा है कि एनएसएसएफ द्वारा खाद्य निगम को 1.36 लाख करोड़ का उधार देगा। इससे पहले 2019-20 में एनएसएसएफ से 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपये लिए थे। ऐसी स्थिति में आने वाले दिनों में एनएसएसएफ में जमा पैसा उनके बचत खाता धारकों को मिल पाएगा या नहीं, यह सवाल काफी बैचेन करने वाला है।

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