विष्णु नागर का व्यंग्यः मास्टरस्ट्रोक जी, चरणों में कैसे आ गए, अब पीछे हटे हो तो धीरे-धीरे पूरा हट जाओ!

जिनका दिल्ली आने का रास्ता रोकने के लिए आपने सड़कें खुदवाई थीं, बैरिकेडिंग करवाई थी। ठंड में पानी की बौछारों से जिनका 'स्वागत' करवाया था। जिन पर डंडे चलवाए। जिनका सिर फोड़ने का संकल्प था। जिनसे बात न करने की कसम खाई और खिलवाई थी। उनके आगे ही सिर नवा दिया?

फोटोः सोशल मीडिया
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विष्णु नागर

ये किसान कल तक तो खालिस्तानी हुआ करते थे, न महाशय? आतंकवादी थे न ये? चीन और पाकिस्तान के हाथों में खेल रहे थे न ये! टुकड़े-टुकड़े गैंग इनके पीछे था न! फिर परम राष्ट्रवादी जी, आप इनके सामने झुक कैसे गए? झुक गए आतंकवादियों-देशद्रोहियों' के आगे? ये किसान तो नहीं थे न! ये तो आढ़तिये थे न! ये तो मुट्ठी भर थे न, फिर भी झुक गए इनके आगे?

जिनका दिल्ली आने का रास्ता रोकने के लिए आपने सड़कें खुदवाई थीं, बैरिकेडिंग करवाई थी। जिन्हें रोकने के लिए सड़क पर बड़े-बड़े कीलें ठुकवाई थीं। तारों का जाल बिछवाया था। ठंड में पानी की बौछारों से जिनका 'स्वागत' करवाया था। जिन पर डंडे चलवाए थे। जिनका सिर फोड़ने का संकल्प था। जिनसे बात न करने की कसम खाई और खिलवाई थी आपने। उनके आगे ही सिर नवा दिया ?

अरे जब आपको अपनी नेकनीयती पर इतना भरोसा था, ये कानून जब देश के हित में हैं, अपने किसान हितैषी होने पर आपको पूरा विश्वास था तो पीछे क्यों हटे? और हटना था तो किसानों के धरने के दस, पंद्रह दिन बाद, एक महीने बाद हटते तो फायदा भी होता। चुनाव के समय अक्ल आई तो क्या अक्ल आई? एक साल बाद आई तो क्या आई? आप तो बड़े भारी रणनीतिकार माने जाते हो, यही थी आपकी रणनीति? अब तो भैया आप कुएं में गिरो या खाई में, बात एक है।गिरना आपको है। च्वाइस इनके बीच ही है। आपने अपने पर हंसने, खिल्ली उड़वाने का एक और मौका दे दिया है, इसके लिए देश की 130 करोड़ जनता का धन्यवाद, आभार।

अरे मास्टरस्ट्रोकी जी, ये फैसला लेने से पहले उन बेचारे गोदी चैनलों के एंकरों के बारे में सोचा होता, जो थूके हुए को अब चाट भी नहीं पा रहे और ये भी नहीं कह पा रहे कि हमने नहीं थूका था। पीछे हटने से पहले अपने लाखों भक्तों के बारे में भी सोचा होता, जो बेचारे सारी शर्म को ताक पर रखकर, कष्ट भोग कर भी पेट्रोल-डीजल के महंगे होने का जी जान से समर्थन कर रहे थे!


कुछ नहीं तो बेचारे उन मालवीय जी के बारे में सोचा होता, जो झूठ के पिटारे में रोज कुछ नया माल लाते और बेचते हैं। अब बेचारे ये सब जाएंगे कहां? करेंगे, वही जो कर रहे थे, मगर आपने इनका मॉरल डाउन कर दिया है। अब रोते-रोते, खांसते-खखारते, लजाते-शरमाते समर्थन कर रहे हैं। फिर पीछे हटोगे, तो फिर समर्थन करेंगे। फंस गए बेचारे गरीब मास्टरस्ट्रोकी जी के चक्कर में। अभी तो और भुगतोगे अर्णबों!

अब ऐसा है मोदी जी पीछे हटे हो तो अब हटते ही चले जाओ। इसी में भला है आपका। यही अब आपका मास्टरस्ट्रोक हो सकता है। जैसे क्रिकेट के खिलाड़ी समझ जाते हैं कि अब धीरे-धीरे हटकर पूरी तरह हटने का समय आ चुका है, उसी तरह हटते जाओ। जैसे सबसे पहले उत्तर प्रदेश चुनाव से हट जाओ। शाह और योगी पर सब छोड़ दो। आप आगे रहोगे तो भी वही होना है, इसलिए हारने का सेहरा इन दोनों के सिर पर बांधकर छुट्टी पाओ। फिर हटते-हटते इतना हट जाओ कि सीन से गायब हो जाओ।

इसी तरह 2024 भी मैं नहीं लड़ूंगा, यह घोषणा कर दो। फिर मजे से रामदेव के प्रोडक्ट्स का विज्ञापन करो। योगाश्रम खोल लो। टीवी पर पाककला का कार्यक्रम करो। खिचड़ी-फाफड़ा बनाने की विधि सिखाओ। इसे खाने के फायदे बताओ। यह बताओ कि ये सब खा-खाकर ही मैं पीएम बना था। अडाणी-अंबानी के लिए लाबिंग करना भी अच्छा धंधा साबित हो सकता है वरना राकेश झुनझुनवाला के साथ शेयर मार्केट में हिस्सेदारी ले लो। मतलब 71 वर्ष की उम्र में भी बहुत से काम हैं, जो आप कर सकते हो!

और मोदी जी ये मेरे मन की बात है। आपके प्रधानमंत्री होने का फायदा यह हुआ है कि मैं भी अब मन की बात करना सीख गया हूं!

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