गंदे नाले में उल्टा बर्तन, उसमें लगा पाइप और बन  गई चाय: ऐसे किस्सों पर तो सिर्फ मोदी भक्त ही विश्वास करेंगे 

पीएम नरेंद्र मोदी ने वर्ल्ड बायोफ्यूल डे पर अपने भाषण में जो किस्से सुनाए, उन्हें सुनकर आम लोग तो विस्मित हैं ही, वैज्ञानिक भी सोच में पड़ गए हैं कि आखिर  विज्ञान के चमत्कार सारे के सारे गुजरात में ही क्यों हुए, वह भी तब जब मोदी जी वहां सीएम थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आए दिन सामने आते बयानों और उनके क्रियाकलापों से ऐसा लगता है कि वे देश के लोगों को कुछ नहीं समझते और उन्हें लगता है कि वह जो भी बोलेंगे, उसपर लोग भरोसा कर लेंगे। वह देश को लोगों को इतना भोला समझते हैं कि वह ऐसे किस्से सुनाते हैं जैसे पुराने जमाने में दादी-नानी सुनाया करती थीं। वे परियों की, राजकुमार-राजकुमारियों की कहानियां सुनातीं और बच्चे सच मान कर उन्हें वास्तविक समझने लगते थे।

अभी शुक्रवार को यानी 10 अगस्त को प्रधानमंत्री ने वर्ल्ड बायो फ्यूअल डे के मौके पर जो कुछ कहा वह बड़ा रोचक है। उन्होंने ऐसे ऐसे किस्से सुना डाले, जिसके बाद यह विश्वास पक्का हो चला कि वह देश के लोगों को मूर्ख के अलावा कुछ नहीं समझते। उन्होंने एक ऐसे चाय वाले की कहानी सुनाई जो गंदे नाले से निकलने वाली गैस से सीधे चाय बना लेता था। और, एक ऐसे व्यक्ति की किस्सा सुना डाला जो बायो गैस को ट्रैक्टर क ट्यूब में भरकर अपने खेत पर ले जाता था और उससे पानी का पम्प चलाता था। इन दो किस्सों के बहाने उन्होंने लोगों को बायो फ्युएल की महत्ता बताई।

अब जरा पढ़िए उन्होंने कहा क्या: मैंने एक अखबार में पढ़ा कि एक शहर में नाले के पास एक व्यक्ति चाय बेचता था। उस व्यक्ति के मन में विचार आया कि क्यों न गंदे नाले से निकलने वाली गैस का इस्तेमाल किया जाए। उसने एक बर्तन को उल्टा करके उसमें सूराख कर लिया और पाइल लगा दिया। अब गंदे नाले से, गटर से जो गैस निकलती थी, उससे वह चाय बनाने लगा।

उन्होंने आगे बताया : जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था, तो एक दिन देखा कि एक व्यक्ति ट्रैक्टर की बड़ी सी ट्यूब को स्कूटर से बांध कर ले जा रहा है। हवा से ट्यूब काफी बड़ी हो गई थी। इस कारण उससे ट्रैफिक में परेशानी हो रही थी। पूछने पर उस व्यक्ति ने बताया कि वह रसोई घर के कचरे और पशुओं के गोबर से बायोगैस प्लांट में गैस बनाता है। बाद में उस गैस को ट्यूब में भर कर खेत पर ले जाता है, जिससे पानी का पम्प का चलाता है और खेत की सिंचाई हो जाती है।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में जो जो किस्से सुनाए, उनसे तो महसूस सिर्फ यही होता है कि वह देश के लोगों को निरा मूर्ख ही समझते हैं। वैसे ऐसा समझने में वह गलत भी नहीं हैं क्योंकि 2014 में भी तो कुछ जुमलों से ही उन्होंने देश को मूर्ख बनाया था। याद है उन्होंने कहा था कि अगर सत्ता में आ गए तो विदेशों में रखा कालाधन लेकर आएंगे और हर किसी के खाते में 15 लाख रुपए डालेंगे। हर भारतीय सैनिक की शहादत के बदले में वह पाकिस्तान के 10 सैनिकों के सिर काटकर लाएंगे। लोगों ने भरोसा करके उन्हें सत्ता सौंप दी, तो भी वह इस जुमलेबाज़ी से बाज़ नहीं आए।

उन्होंने नोटबंदी के बाद देश के गरीबों को सपने दिखाए कि नोटबंदी से आतंकवाद की कमर टूट जाएगी और देश शांति का आंगन बन जाएगा। सीधे-सादे लोगों ने इस पर विश्वास किया और बैंकों की लाइन में लग गए। इस सपने के लिए तो 100 से ज्यादा लोगों ने अपनी जान भी दे दी। इसलिए मोदी जी ने सोचा कि लोगों से कुछ भी कह दो, वे विश्वास कर ही लेंगे।

इस सबका एक दूसरा पहलू यह भी है कि विज्ञान की बारीकियों को आसान बनाकर पेश करने के चक्कर में प्रधानमंत्री यह भूल जाते हैं कि जब वे ये किस्से सुनाते हैं तो उस समय खुद को गुजरात का मुख्यमंत्री बताते हैं, और साथ ही यह भी बता जाते हैं कि विकास के जिस गुजरात मॉडल को बेचकर वह देश के कार्पोरेट को रिझाने और आम लोगों को विकास के सपने दिखाने में कामयाब हुए, उस गुजरात में लोगों की क्या हालत थी, जहां एक गरीब चाय वाला गंदे नाले के किनारे बैठा था और एक किसान को सिंचाई के लिए कितनी मशक्कत करनी पड़ती थी।

मोदी जी, देश के लोग एक बार फिर धोखे में आ सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि वह ऐसे किस्सों पर विश्वास कर लेंगे जिनका कोई सिर पैर और वैज्ञानिक आधार ही न हो। हां अगर ऐसे किस्सों से लोग झांसे में आते हैं तो उन्हें इंसान का चोला उतारकर आपके भक्त का चोला ही पहनना पड़ेगा।

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