अधिक आशावादी होते हैं चौतरफा समस्याओं से घिरे लोग, बचत करते हैं, स्वस्थ रहते हैं और लंबा जीते हैं

आज की जटिल दुनिया में सकारात्मक विचार रखना या आशावादी होना कठिन है क्योंकि पूंजीवादी नजरिया और कट्टरवाद हमें नकारात्मकता की ओर ले जाता है, पर वैज्ञानिकों के अनुसार आशावादी और सकारात्मक विचार हमें मानसिक और शारीरिक तौर पर भी स्वस्थ्य रखते हैं।

अधिक आशावादी होते हैं चौतरफा समस्याओं से घिरे लोग, बचत करते हैं, स्वस्थ रहते हैं और लंबा जीते हैं
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महेन्द्र पांडे

एक नए अध्ययन के अनुसार जिन देशों की आबादी बीमारियों की चपेट में अधिक रहती है और जहां इलाज भी सबको नहीं मिल पाता, वहां के लोग मानवता के भविष्य के प्रति अधिक आशावादी होते हैं और उनके विचार सकारात्मक रहते हैं। जर्नल ऑफ पर्सनैलिटी एंड इन्डविजुअल डिफरेंसेज में यूनिवर्सिटी ऑफ जॉर्जिया के वैज्ञानिकों और मनोवैज्ञानिकों के एक दल द्वारा प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, आशावादी रवैया विकासवाद की देन है जो विपरीत परिस्थितियों में भी मनुष्य को आगे बढ़ाने में मदद करता है। अनेक अध्ययनों के अनुसार सकारात्मक सोच से अनेक मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य परेशानियों से पार पाया जा सकता है।

विपरीत परिस्थितियों में भी स्वस्थ्य रहने के अनेक तरीके हो सकते हैं, पर संसाधन विहीन समाज में ऐसी स्थितियों में जिंदा रहने का सबसे बड़ा साधन भविष्य के प्रति सकारात्मक सोच है। इस अध्ययन के मुख्य लेखक ब्रायन हास के अनुसार यह ठीक उसी तरह है जिस तरह महासागरों में मार्ग ढूंढते किसी जलयान पर बैठे सकारात्मक विचारधारा वाले लोग सबको यह दिलासा देने में सफल रहते हैं कि उनका जलयान ठीक दिशा में जा रहा है और गंतव्य अधिक दूर नहीं है।

इस अध्ययन के लिए दुनिया के 68 देशों के 18000 से अधिक लोगों से समाज के विकास पर उनके विचार पूछे गए- उनसे पूछा गया कि आज आप समाज के विकास को किस तरह देखते हैं और अगले 1000 वर्षों के दौरान विकास किस तरह होगा। अंगोला, वियतनाम और वेनेजुएला जैसे अपेक्षाकृत गरीब देशों में जहां बीमारियों का बोझ अधिक है, के प्रतिनिधियों ने विकास को सकारात्मक बताया और अगले 1000 वर्षों में कई गुना अधिक विकास की उम्मीद जताई।

अमेरिका अमीर देश है, पर कोविड 19 के दौर में वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी– वहां के प्रतिनिधियों ने भी सामाजिक विकास के प्रति सकारात्मक विचार प्रकट किए। इसके विपरीत फ़्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम और दक्षिण कोरिया जैसे समृद्ध देशों के प्रतिनिधियों के अनुसार अगले 1000 वर्षों बाद भी सामाजिक विकास का स्तर वर्तमान जैसा ही रहेगा या इससे भी नीचे के स्तर पर रहेगा।


आज की जटिल दुनिया में सकारात्मक विचार रखना या आशावादी होना कठिन है क्योंकि पूंजीवादी नजरिया और कट्टरवाद हमें नकारात्मकता की ओर ले जाता है, पर वैज्ञानिकों के अनुसार आशावादी और सकारात्मक विचार हमें मानसिक और शारीरिक तौर पर भी स्वस्थ्य रखते हैं। दो वर्ष पहले प्रकाशित एक अध्ययन से स्पष्ट होता है की सकारात्मक विचार आपकी उम्र बढ़ा सकते हैं।

यह अध्ययन प्रोसीडिंग्स ऑफ़ नेशनल अकादमी ऑफ़ साइंसेज नामक जर्नल में प्रकाशित किया गया है। इस अध्ययन को इस तरीके का सबसे बड़ा अध्ययन कहा जा रहा है क्योंकि इसमें हजारों लोगों को शामिल किया गया है और लगभग तीन दशक के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। इसमें बताया गया है कि आशावादी लोगों की उम्र निराशावादी लोगों की अपेक्षा 15 प्रतिशत अधिक होती है।

जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में पहले किये गए दो अध्ययन के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। इसमें से एक अध्ययन 69744 महिलाओं पर किया गया था, जबकि दूसरा 1429 पुरुषों पर। दोनों अध्ययनों में लोगों से एक प्रश्नावली के माध्यम से पूछा गया था कि वे अपने भविष्य के बारे में क्या सोचते हैं। फिर उनके जवाबों के आधार पर उन्हें सकारात्मक सोच रखने वाले आशावादी या नकारात्मक सोच रखने वाले निराशावादी के वर्गों में बांटा गया। इस अध्ययन के अनुसार आशावादी महिलाओं की उम्र निराशावादी महिलाओं की अपेक्षा 14.9 प्रतिशत तक अधिक होती है, जबकि आशावादी पुरुषों की उम्र 10.9 प्रतिशत तक अधिक रहती है। निराशावादी महिलाओं की तुलना में आशावादी महिलाओं के लिए 1.5 गुना अधिक संभावना रहती है कि वे 85 वर्ष की उम्र पार कर जाएं, पुरुषों के वर्ग में यह संभावना 1.7 गुना अधिक रहती है।

एक नए अध्ययन के अनुसार, आशावादी लोग अधिक बचत करते हैं। यह प्रवृत्ति गरीब तबके में सबसे अधिक होती है। इस अध्ययन को यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो के मनोवैज्ञानिक जो ग्लैडस्टोन के नेतृत्व में किया गया है और इसे जर्नल ऑफ पर्सनैलिटी एंड सोशल साइकालजी में प्रकाशित किया गया है। इसके अनुसार जो व्यक्ति भविष्य के प्रति आशावान रहते हैं, उनमें बचत की आदत भविष्य के प्रति उदासीन या नकारात्मक सोच वाले लोगों से अधिक होती है।


इस अध्ययन के लिए 8 बड़े सर्वेक्षणों के आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया गया है, जो अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम के साथ ही यूरोप के 14 देशों में किए गए थे। इन सर्वेक्षणों में कुल 140000 प्रतिभागी थे और सभी सर्वेक्षण में भविष्य के प्रति नजरिए (आशावादी, निराशावादी और उदासीनता) और आय के साथ ही बचत से संबंधित सवाल पूछे गए थे। कुल 8 सर्वेक्षणों में से 3 सर्वेक्षण एक बार किए गए थे, जबकि 5 सर्वेक्षण दीर्घकालीन थे जिसमें नियत अंतराल पर प्रतिभागियों से प्रश्न पूछे गए थे। इस अध्ययन के दौरान प्रतिभागियों की समाज में स्थिति, उम्र, लिंग, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य और रोजगार की स्थिति का भी समावेश था।

अध्ययन के मुख्य लेखक जो ग्लैडस्टोन के अनुसार उनके दल ने पहले से अनुमान लगाया था कि भविष्य के प्रति आशावादी लोग बचत पर कम ध्यान देते हैं, क्योंकि उन्हें अपनी क्षमता पर और स्थितियों पर अधिक भरोसा रहता है पर यहां परिणाम इसके ठीक विपरीत रहे। आशावादी रवैया एक प्रभावी मनोवैज्ञानिक संसाधन की तरह उभरा जो बचत के लिए प्रेरित करता है। इसका प्रभाव समाज के पिछड़े और गरीब तबके में सबसे अधिक रहता है।

आशावादी दृष्टिकोण बचत के प्रति नजरिया बढ़ा देता है और लोग भविष्य के लिए बचत के लिए प्रेरित होते हैं। दूसरी तरफ आशावादी दृष्टिकोण का प्रभाव वित्तीय ज्ञान और जानकारी के साथ ही आपदा से जूझने में अधिक कारगर नहीं है। इस अध्ययन के अनुसार यह एक महत्वपूर्ण जानकारी है और भविष्य के लिए तैयार किए जा रहे वित्तीय योजनाओं में इस पक्ष को शामिल किया जाना चाहिए।

आजकल आशावाद से संबंधित बहुत सारे ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किये जाते हैं और यह पूरी दुनिया में एक बड़ा कारोबार बन गया है। अध्ययन के अनुसार सकारात्मक विचारों वाले लोगों की अधिक उम्र का राज उनकी सोच है. समस्याएं सबके पास आती हैं, पर सकारात्मक विचारों वाले इन समस्यायों से निराश नहीं होते और इसका हल ढूंढने का प्रयास करते हैं। सकारात्मक विचारों वाले लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूक रहते हैं। अब तो यह भी स्पष्ट हो गया है कि सकारात्मक विचार आपको दीर्घायु बना सकते हैं और समाज को आगे बढ़ने का रास्ता बता सकते हैं।