बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित हैं दिल्ली की पुनर्वास और झुग्गी बस्तियां

दिल्ली की पुनर्वास और झुग्गी बस्तियों में बुनियादी सुविधाओं का बहुत अभाव है और इस कारण यहां के लोगों, विशेषकर महिलाओं का दैनिक जीवन बहुत कष्टदायक है।

फोटो: सोशल मीडिया
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भारत डोगरा

“क्या आप यह व्यवस्था कर सकते हैं कि कम से कम साफ शौचालय मिल सकें ताकि हमें खुले में शौच के लिए न जाना पड़े?”

यह सवाल उन चार पुनर्वास बस्तियों में बार-बार सुनना पड़ा जिनका दौरा कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ इस लेखक ने हाल ही में किया।

यह चार बस्तियां हैं - बवाना पुनर्वास बस्ती (जीएफएच ब्लाक), बवाना जे जे कालोनी (एल ब्लाक के सामने) शाहबाद डेयरी और सी-2 सेक्टर रोहिणी पुनर्वास बस्ती।

हमें यह सुनकर आश्चर्य हुआ क्योंकि हाल के समय में सरकार का सबसे प्रचारित-प्रसारित विकास कार्य तो शौचालय बनाने का ही रहा है। इसके बावजूद देश की राजधानी में ही महिलाओं को शौचालयों की बड़ी कमी महसूस हो रही थी। कड़वी सच्चाई यह है कि इन चारों बस्तियों में अलग-अलग स्थानों पर 50 से 90 प्रतिशत तक लोग खुले में शौच के लिए जाने को मजबूर हैं क्योंकि शौचालय बहुत कम हैं या बहुत गंदे रहते हैं। जो कुछ साफ हैं तो उनमें शुल्क लिया जाता है। महिलाओं ने बार-बार जोर देकर कहा कि यह हमारी सबसे बड़ी समस्या है इसका समाधान कराओ। शौचालयों संबंधी कई वायदे किए गए पर उन्हें पूरा नहीं किया गया। महिलाओं ने बार-बार बताया कि खुले में शौच के लिए जाते समय वे असुरक्षित महसूस करती हैं। छेड़छाड़ करने वाले, शराबी, असमाजिक तत्त्व उन्हें परेशान करते हैं। सी-2 बस्ती में तो शौच के लिए गई एक लड़की को बदमाश उठा कर ले गए। किसी को आज तक उसका पता नहीं चला। रात के समय शौच के लिए जाना पड़ जाए तो बहुत कठिन और असुरक्षित स्थिति हो जाती है। जो थोड़े-बहुत शौचालय हैं वे तब तक बंद हो चुके होते हैं।

उचित तरह का स्नानघर कहीं भी मौजूद नहीं है। किसी तरह काम-चलाऊ स्थिति बनाई हुई है। अनेक महिलाओं को खुले में ही स्नान करना पड़ता है। इस ओर कुछ ध्यान ही नहीं दिया जा रहा है।

नालियों की सफाई और कूड़ा एकत्र करने की स्थिति लगभग सब जगह विकट है। बवाना पुनर्वास बस्ती में वीरेन्द्र सिंह ने बताया कि प्राकृतिक बहाव या ड्रेनेज के स्थान के अतिक्रमण के कारण दूषित पानी मोहल्लों में एकत्र हो जाता है।

पेयजल उपलब्ध होने की स्थिति सब जगह चिंताजनक है। शाहबाद डेयरी में नल में बहुत दूषित पानी आ रहा है। सभी स्थानों पर अधिक निर्भरता भूजल पर है, पर भूजल नीचे जाने और प्रदूषित होने से भूजल की गुणवत्ता अधिकांश स्थानों पर गिर रही है। बड़ी संख्या में लोग पेयजल खरीद कर पी रहे हैं। इसके लिए वे किसी अन्य व्यक्ति को 200 रुपए प्रतिमाह की राशि देते हैं और फिर उसके यहां से पानी भरने जाते हैं। बवाना पुनर्वास कॉलोनी के लोगों ने बताया कि दूषित पानी पीने से उनकी हड्डिया कमजोर हो रही हैं। शाहबाद डेयरी और अन्य स्थानों पर लोगों ने बताया कि पानी की तंगी के कारण बड़े झगड़े हो जाते हैं। दूर से पानी भरने जाने पर कई बार वहां के लोग साफ मना कर देते हैं।

स्कूली बच्चों की समस्याएं हर जगह हैं। बवाना में समस्या दूरी के कारण है। साथ में छेड़छाड़ के कारण भी लड़कियों को स्कूल जाने में परेशानी होती है। शाहबाद डेयरी में स्थानीय स्कूल की मरम्मत के कारण बच्चों को दूर के स्कूल में जाना पड़ता है जहां अन्य छात्र उन्हें धमकाते हैं कि तुम यहा क्यों आए हो। उनकी पिटाई भी होती है। पेयजल का अभाव है, शौचालय गंदे हैं। अतः बच्चे कहते हैं हम इस स्कूल में नहीं जाएंगे। सी-2 में 15 लड़कियों को मनमाने ढंग से दसवीं कक्षा से स्कूल से बाहर कर दिया गया। उन्हें पत्राचार से परीक्षा पास करने के लिए कहा गया। इन छात्राओं की शिक्षा इस कारण अचानक समाप्त हो गई।

कुल मिलाकर इन बस्तियों में बुनियादी सुविधाओं का बहुत अभाव है और इस कारण यहां के लोगों, विशेषकर महिलाओं का दैनिक जीवन बहुत कष्टदायक है। पुनर्वास बस्तियों के मजदूरों को बहुत दूर-दूर रोजगार के लिए जाना पड़ता है। तिस पर वे जब बहुत थक कर लौटते हैं तो उन्हें बुनियादी सुविधाओं का अभाव होने के कारण उनकी स्थिति बहुत कष्टप्रद हो जाती है। इसके अतिरिक्त अनेक स्वास्थ्य समस्याएं भी इस कारण उत्पन्न होती हैं। यहां की बुनियादी सुविधाओं में सुधार के प्रयास सरकार को शीघ्र करने चाहिए।

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