विष्णु नागर का व्यंग्यः मोदी राज में अकेले टहलने पर भी आप पर दर्ज हो सकता है देशद्रोह का केस!

अपनी खैर मनाना बंद कीजिये। यह भी सोचना बंद कीजिए कि ऐसा सिर्फ कश्मीरियों के साथ ही हो सकता है। हास्यापदता धर्म, रंग, जाति नहीं देखती। वह सार्वभौम होती है। तो तैयार हो जाइए पीएसए में अंदर होने के लिए। मोदी है तो मुमकिन ही मुमकिन है। नामुमकिन का जमाना गया।

फोटोः सोशल मीडिया
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विष्णु नागर

कल आप किसी भी तरह के किसी भी आरोप में गिरफ्तार किए जा सकते हैं। आप पर यह आरोप भी लग सकता है कि आप मंदिर या मस्जिद या गुरुद्वारे रोज क्यों जाते हैं  या कि आप हिंदू या मुसलमान या सिख होते हुए भी अपने-अपने धार्मिक स्थल क्यों नहीं जाते हैं? या आप मंदिर तो जाते हैं, मगर मस्जिद के आगे भी क्यों झुकते हैं और गुरुद्वारे भी क्यों चले जाते हैं या वहां भी झुकते क्यों है? क्यों न इस आधार पर आप पर धर्मनिरपेक्ष होने का मुकदमा चलाया जाए? यह भी पाया गया है कि आप भजन भी सुनते हैं और कव्वाली सुनकर भी मस्त हो जाते हैं और सबद कीर्तन सुनकर भी विह्वल हो जाते हैं। इससे इस आरोप को और पुख्तगी  मिलती है। आप संदिग्ध हैं!

आप पर आरोप यह भी लग सकता है कि आपने आठवीं तक ही शिक्षा लेना क्यों ठीक नहीं समझा, आपने बीए पास करके राष्ट्रीय संसाधनों पर बोझ क्योंं डाला? क्या आप भारत पिता (राष्ट्रपिता नहीं) का अनुकरण करते हुए फर्जी डिग्री लेकर इस शौक को पूरा नहीं कर सकते थे? क्या इसका अर्थ यह नहीं कि आप में भविष्य में कभी बीजेपी की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनने की आकांक्षा नहीं जागी और इस प्रकार आपकी देशभक्ति संदेह के दायरे में क्यों न मानी जाए?

आरोप यह भी हो सकता है कि आप बीए करके रुक क्यों गए, एमए क्यों नहीं किया? या बताइए कि आपको डॉक्टरेट की डिग्री मिल चुकी थी तो आपने पोस्ट डॉक्टरल डिग्री हासिल करके अपने जीवन के बाकी वर्ष बर्बाद करना क्यों जरूरी समझा? आपने बेरोजगार रहकर देश की सेवा करने में इतना विलंब क्योंं किया? या यह कि आप राजनीति में आए तो आपने बीजेपी में शामिल होने की बजाए कांग्रेस, एसपी, बीएसपी या आप में शामिल होना क्यों ठीक समझा? आप ‘पाकिस्तान’ की भाषा बोलने वाली पार्टियां में क्यों गए? या क्या वजह है कि आप शाम को टहलने कभी अकेले नहीं जाते, हमेशा बीवी के साथ जाते हैं? या टहलने हमेशा अकेले ही क्यों जाते हैं? क्या अपनी पत्नी से आपके संबंध ठीक नहीं है? बताएं कि क्यों? यह फलां-फलां धाराओं में जुर्म है!

अब मोदीजी और शाहजी की कृपा से कुछ भी असंभव नहीं रहा, यह भी कि बताइए आपने मुसलमान या ईसाई  मां-बाप के घर पैदा होना क्यों पसंद किया? आपको इतना भी पता नहीं था कि यह हिंदू राष्ट्र है और यहां हिंदू होने पर ही आप नागरिक माने जाएंगे? आपने यह कदम किस मुल्ला-मौलवी के बहकावे में आकर उठाया? और कोई ऐसी जबर्दस्ती कर रहा था तो आपने इसकी एफआईआर दर्ज क्यों नहीं  करवाई? यह भी संभव है कि पूछा जाए कि आप हिंदू के यहां पैदा हुए तो ब्राह्मण घर में पैदा क्यों नहीं हुए और ब्राह्मण घर में पैदा हुए थे तो चितपावन ब्राह्मण के घर क्यों नहीं जन्म लिया आपने?

और साहब आप तो बड़े प्रोग्रेसिव बनते हैं और आपको शर्म नहीं आई कि आप अग्रवाल परिवार में जन्मे और अगर अग्रवाल परिवार में जन्मे ही थे तो बीजेपी के वोटर क्यों नहीं बने? और इनमें से या इन जैसे किसी भी आरोप में आप पर आज नहीं, कल नहीं, परसों नहीं, नरसों या उसके भी बाद कभी भी सार्वजनिक सुरक्षा कानून (पीएसए) के अधीन ये या इस जैसे आरोप लग सकते हैं। आपको तीन या छह महीने की जेल हो सकती है और आप या आपका  वकील इसके खिलाफ अदालत नहीं जा सकता। तब भी नहीं, जब इसकी अवधि लगातार बढ़ाई जा रही हो। सुप्रीम कोर्ट भी कहेगा कि हम इस पीएसए कानून के विरुद्ध नहीं जा सकते।

आपको लग रहा होगा कि मैं यह क्या बेसिरपैर की बातें कर रहा हूं। कहीं मेरा सिर तो नहीं घूम गया है, मगर नहीं जनाब, ऐसा नहीं हुआ है। इन बातों का सिर भी है, पैर भी, कान भी, आंखें भी और शेष अन्य अंग भी हैं। यह कवि कल्पना नहीं है, यह भ्रम फैलाना नहीं है, मोदी राज की हकीकत है। इसमें चीजें इस हद तक हास्यास्पद हो चुकी हैं कि रवि क्या कवि की कल्पना भी यहां नहीं पहुंच सकती। और किसी खुशफहमी की जरूरत नहीं, आप पर आरोप लगाकर आपको अंदर रखने के सौ और तरीके भी ईजाद किए जा चुके हैं। दुनिया हंसेगी यह प्रश्न एकदम बकवास घोषित हो चुका है!

तो आइए बताता हूं। हाथ कंगन को आरसी क्या और पढ़े-लिखे को फारसी क्या? जब जम्मू-कश्मीर एक राज्य हुआ करता था और लद्दाख भी उसका हिस्सा हुआ करता था, तब उसके एक मुख्यमंत्री हुआ करते थे- उमर अब्दुल्ला और एक मोहतरमा महबूबा मुफ्ती भी कभी इसी पद पर हुआ करती थीं। ये इसलिए पिछले छह महीने से अधिक समय से हिरासत में हैं, क्योंकि हमारी राष्ट्रवादी सरकार ने कश्मीर से धारा 370 हटाना ठीक समझा है। पब्लिक सेफ्टी एक्ट के अंतर्गत इनकी गिरफ्तारी की अवधि बढ़ाने के लिए आरोप ऐसे ही लगे हैं, जिनके कुछ उदाहरण देने की जुर्रत मैंने की है।

उमर पर आरोप है कि उनका इतना प्रभाव है कि वह आतंकी गतिविधियों के बीच भी बड़ी संख्या में मतदाताओं से वोट डलवा सकते हैं। यह भी अब अपराध हो गया! और महबूबा मुफ्ती वही हैं, जिन्होंने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। अब उन पर आरोप है कि वह बदमिजाज हैं, षड़यंत्रकारी हैं। उनकी पार्टी के झंडे का रंग हरा है, उनकी पार्टी का चुनाव चिह्न कलम और दवात है! तो आरोपों का स्तर यहां तक पहुंच गया है।

इसलिए अपनी खैर मनाना बंद कीजिए। यह भी सोचना बंद कीजिए कि ऐसा कश्मीरी मुसलमानों के साथ ही हो सकता है। हास्यापदता धर्म, रंग, जाति नहीं देखती। वह सार्वभौम होती है। तो आइए तैयार हो जाइए पीएसीए में अंदर होने के लिए। मोदी है तो मुमकिन ही मुमकिन है। नामुमकिन का जमाना गया। जय श्री राम बोलो!

(अपरिहार्य कारणवश हम यह लेख हमेशा की तरह रविवार (9 फरवरी) को प्रकाशित नहीं कर पाए थे, इसलिए आज प्रकाशित किया जा रहा है।)

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