नेटफ्लिक्स पर कपिल शर्मा को देखकर लगा, शो अभी बाकी है!

अपने नए अवतार में कॉमेडियन कपिल शर्मा देश में हिन्दू-मुस्लिम एकता और बचपन की मासूमियत में लौट जाने की जरूरत के बारे में बात करते हुए एक खूबसूरत सपने में खो जाते हैं। इन दिनों मनोरंजन की दुनिया में अपनी रीढ़ को तलाशना और उसे सीधा रखना आसान नहीं है!

फोटो: सोशल मीडिया
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नम्रता जोशी

पिछले दिनों नेटफ्लिक्स के सह-संस्थापक, अध्यक्ष-सह- सीईओ रीड हेस्टिंग्स ने निवेशकों के साथ बातचीत में भारतीय बाजार में सफलता को लेकर अनिश्चय के माहौल को लेकर चिंता जताई थी और इसे निराश करने वाला कहा था। सोशल मीडिया पर आग लगाने के लिए इतना पर्याप्त था और नेटफ्लिक्स को निशाने पर आना ही था। लोगों ने स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म की खूब-लानत मलामत की और देश में इसकी प्रोग्रामिंग और रणनीति को लेकर सवाल उठाए। संयोग से अगले सप्ताह नेटफ्लिक्स से गुजरते हुए मेरे भी कुछ अनुभव हुए।

मैंने एलिजाबेथ और गुलिस्तान मिर्जाई की ऑस्कर चयनित खूबसूरत शॉर्ट डाक्यूमेंट्री ‘थ्री सांग्स फार बेनजीर’ से शुरुआत की। यह युद्धरत अफगानिस्तान के एक शरणार्थी शिविर में रह रहे नवदंपति शाइश्ता और बेनजीर की कहानी है जिसका प्यार आकाश में तैरते निगरानी बलून की छाया में परवान चढ़ रहा है। यहां युद्ध की विभीषिका के बीच कबीले से आने वाले शाइस्ता के सेना में भर्ती होने के जज्बे और बेनजीर से उसके प्यार के नायाब शेड्स हैं। एक क्षण ऐसा भी है जब शाइश्ता कुछ देर के लिए हताश है, पूछता है-‘मैं तुम्हारे अफगानिस्तान के लिए क्या कर सकता हूं?’ एक क्षण बाद ही वह बेनजीर के पकाए बैंगन के पकवान पर टूट पड़ता है और इसे ‘भोजन पर आत्मघाती हमला’ कहता है। गोया बता रहा हो कि हास्य भी एक बड़ा उपकरण है जो विपरीत हालात में जीवित रहने में मददगार है।


इससे बड़ा और चौंकाने वाला सरप्राइज ‘आय एम नॉट डन येट’ रहा। प्रसिद्ध कॉमेडियन कपिल शर्मा यहां मुझे ही नहीं, अपने विशाल दर्शक समुदाय के लिए भी एक नए रूप में दिखे। मैंने कपिल शर्मा शो के कुछ एपिसोड देखने के बाद उससे हमेशा के लिए दूरी बना ली थी। कपिल अपने कॉमिक टाइमिंग के साथ तेज तर्रार होंगे लेकिन उनका हास्य मुझे बहुत निचले दर्जे का, बचकाना और अक्सर सेक्सिस्ट लगता रहा है। उनकी ऑफस्क्रीन दुनिया की मुझे ज्यादा जानकारी नहीं रही। जैसे, 2016 की एक रात बीएमसी की शिकायत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्वीट करना कि- ‘मैं पिछले 5 सालों से 15 करोड़ टैक्स भर रहा हूं, फिर भी अपना दफ्तर बनाने के लिए मुझे बीएमसी कार्यालय को 5 लाख रिश्वत देनी पड़ेगी, क्यों?’ इसके बाद कपिल ने एक और ट्वीट किया- ‘ये हैं आपके अच्छे दिन (क्या यही आपके वायदे वाले अच्छे दिन हैं)?’

हालांकि बाद में कपिल ने सफाई दी कि यह नशे की हालत हुआ था। कपिल कहते हैं कि इस एपिसोड के नतीजे में उन्हें जैसी नाराजगी और दुर्व्यवहार झेलना पड़ा, उसने उन्हें कुछ दिन के लिए मालदीव जाने को मजबूर कर दिया था। कपिल बताते हैं कि इस सब में उनके नौ लाख रुपये खर्च हो गए जो बहुत बड़ा आर्थिक बोझ भले न रहा हो लेकिन उनकी पूरी पढ़ाई पर भी इतना खर्च न हुआ होगा।


अब यह अतिरंजित है या मजाक में कहा गया, सवाल यह नहीं है। चौंकाने वाली बात है कपिल जिन बातों पर यहां फोकस करते दिखते हैं, चर्चा करते हैं। मसलनफेक न्यूज, ट्रोलिंग, शराबनोशी की लत जैसा व्यक्तिगत मामला, अपना अवसाद, पिता का ऐसे वक्त अचानक चला जाना जब उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी। कपिल यहां साफगोई से नितांत व्यक्तिगत मुद्दों पर भी हल्के- फुल्के अंदाज में बातें करते हैं लेकिन उनका मजाक नहीं उड़ाते।

हां, कुछ बीवी वाली चुटकुलेबाजी है लेकिन बहुत कुछ बदला हुआ। कुछ-कुछ व्यक्तिगत को राजनीतिक और राजनीतिक को व्यक्तिगत में बदलने जैसा। यहां सत्ता के सामने सच बोलने की कोशिश है, भले ही थोड़ी उलझी हुई ही क्यों न हो! कुछ तीखे तीर भी हैं। कुछ तीर विजय माल्या और नीता अंबानी, यहां तक कि प्रधानमंत्री की ओर भी छूटते हैं। कपिल का मोदी पर कटाक्ष उतना सटीक और तीखा भले न हो जैसा मिमिक्री कलाकार और कॉमेडियन श्याम रंगीला दिखाते हैं लेकिन मोदी के अचानक ‘8 बजे’ वाली घोषणाओं के ‘आतंक’ को वह बखूबी दर्शक तक पहुंचा देते हैं।

मौजूदा बिगड़े माहौल में भी वह हिन्दू-मुस्लिम एकता के बारे में बात करते हैं, कौन किस ईश्वर को पूजता है, इससे किसी को दिक्कत क्यों हो? को रेखांकित करते हैं और बचपन की उस मासूमियत में लौट जाने की बात करते हैं जहां इस सब के लिए कोई जगह नहीं होती। यह सब उस तीखी जबान वाले कपिल शर्मा से अलग, थोड़ा हटकर खासा स्नेहिल, कुछ-कुछ अपना-अपना सा लगता है।


दरअसल, यह कल्पना करना थोड़ा मुश्किल लगता है कि यह वही कपिल हैं जिसे अपने शो में ‘स्वच्छ भारत अभियान’ को प्रोमोट करना होता है। यह नया वाला और बदला हुआ कपिल शर्मा उस एपिसोड को शूट करने के कुछ हफ़्ते बाद का ही है जब उसने प्रधानमंत्री के ‘आधिकारिक’ प्रचारक अक्षय कुमार पर भी अपने शो (द कपिल शर्मा शो) में चुटकी ले ली थी। उस शो में अक्षय जब बचकाने सवालों के लिए लगातार कपिल की टांग खिंचाई कर रहे थे, कपिल ने उन्हें 2019 के चर्चित इंटरव्यू में प्रधानमंत्री से ‘आम खाने के तरीके’ वाला सवाल याद दिलाकर बैक फुट पर ला दिया था।

मनोरंजन की दुनिया में इन दिनों किसी का अपनी रीढ़ तलाशना, फिर उसे सीधा भी रखने की कोशिश आसान बात नहीं रह गया है। तब तो और भी नहीं जब बहुसंख्य जमात साष्टांग मुद्रा में हो। किसी को ठीक-ठीक पता भी नहीं होगा कि उसकी रीढ़ सही सलामत है भी या नहीं। या यह कि छवि का यह परिवर्तन प्रशंसकों और सत्ता जिसकी भी हो, के बीच किस तरह लिया जाएगा! खैर, यह सब तो वक्त तय करेगा! लेकिन सिर्फ इसी एक कारण से कोई यह उम्मीद तो कर ही सकता है कि कपिल शर्मा और उनका शो वास्तव में अभी तक पूरा नहीं हुआ है।

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Published: 06 Feb 2022, 10:00 PM