विष्णु नागर का व्यंग्यः फाइल में 'साहेब' की जान है, बस जादूगर के इशारे की देरी है, फाइल तो खुलेगी!

कुछ दिन पहले साहेब को वार्निंग सिग्नल दे दिया गया है कि तुम्हारे उस खासमखास की फाइल इसीलिए खोली गई है, उसका झूठ इसीलिए उजागर किया गया है कि तुम भी सावधान रहो। तुम्हारी भी फाइल है। वह इससे भी मोटी और खतरनाक है। वह हम खोल देंगे।

फाइल में 'साहेब' की जान है, बस जादूगर के इशारे की देरी है, फाइल तो खुलेगी!
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फाइल तो खुलेगी भैया, फाइल तो खुलेगी। फाइल तो खुलेगी बहना, फाइल तो खुलेगी। कुछ दिन पहले साहेब को वार्निंग सिग्नल दे दिया गया है कि तुम्हारे उस खासमखास की फाइल इसीलिए खोली गई है, उसका झूठ इसीलिए उजागर किया गया है कि तुम भी सावधान रहो।तुम्हारी भी फाइल है। वह इससे भी मोटी और खतरनाक है। वह हम खोल देंगे, अगर तुम हमारे साथ समझौते-समझौते का खेल, खेलोगे, समझौता नहीं करोगे तो फाइल तो तुम्हारी भी है, फाइल तो खुलेगी।

फाइल में तोते की जान है, उसकी जान चली जाए तो भी उन्हें परवाह नहीं मगर फाइल तो खुलेगी। आज नहीं तो कल और कल नहीं तो परसों और परसों भी नहीं तो शुभमुहूर्त में नरसों खुलेगी, मगर फाइल तो खुलेगी। डरो या नकली बहादुर बनो मगर फाइल तो फाइल है, जादूगर के खुल जा सिम-सिम कहने की देरी है बस, फाइल तो खुलेगी।

दायें हाथ से नहीं खुली तो बाएं हाथ से खोली जाएगी। दोनों हाथों से नहीं खुली तो हाथों और टांगों का जोर लगाकर, उसे खोला जाएगा। फाइल का गुण-धर्म है, खुलना, इसलिए वह तो खुलेगी ही खुलेगी! अपने गुण-धर्म से वह समझौता नहीं कर सकती। आजकल अधिकतर फाइलें कागज़ों पर नहीं , कंप्यूटर में होती हैं। जिसके पास यह फाइल है, अगर उसने सही समय पर इसे नहीं खोला, देरी की, ना-नुकुर किया तो कोई एथिकल या अनएथिकल हैकर उसे खोलेगा मगर खोलेगा जरूर, फाइल तो मैया, खुलकर ही रहेगी।

इतना तो सबको मोटा-मोटी पता है कि उसमें क्या है मगर बहुत कुछ और भी हो सकता है! इनके दुश्मनों से ज्यादा, इनके दोस्त उसे जानना चाहते हैं, इसलिए फाइल तो खुलेगी! खुलेगी ही खुलेगी। इस में फोटो भी होंगे और विडियो भी। यह जिद्दी फाइल है, यह खुलकर ही मानेगी। वैसे भी फाइल का धर्म है खुलना, इसलिए वह खुलेगी ही खुलेगी!

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देश में नहीं है वह फाइल, इनके कब्जे से बहुत दूर है, इनकी धौंसपट्टी वहां नहीं चलेगी। फाइल खुलने से इनकार करेगी, तो भी उसे उसकी इच्छा के विरुद्ध खोल‌ दिया जाएगा मगर फाइल तो खुलेगी, चाचा, फाइल तो खुलेगी। जिसके पास यह फाइल है, वह इनका पक्का दोस्त है, बड़ा भाई है, इसलिए फाइल तो वह खोलकर रहेगा। वह इनका दुश्मन होता तो थोड़ी दया भी कर सकता था, इनका लिहाज रख सकता था मगर वह इनका अपना खास है, बड़े भाई स्वरूप है, इसलिए अपनापन तो वह दिखाकर रहेगा! फाइल तो वह खोलकर रहेगा! उसकी तो सारी फाइलें खुल हुई हैं, इसलिए वह अपने मित्र को, अपने छोटे भाई को भी यह सौभाग्य प्रदान करेगा, इसलिए फाइल तो खुलेगी।

जो पिछले बारह साल से देश में फाइल-फाइल खेलते आए हैं, किसी को खरीदते और किसी को बेचते आए हैं, किसी को धमकाते और किसी को पुचकारते आए हैं, किसी को जेल भेजते और किसी का दल बदलवा कर सीएम आदि बनाते आए हैं, उनकी भी फाइल है। जिसके पास इनकी फाइल है, उसे धमकाने की हैसियत इनकी है नहीं, उससे ये दया की भीख ही मांग सकते हैं और वह यह भीख देना जानता नहीं, इसलिए फाइल वायरस लगने से पहले ही खुलेगी। फाइल तो खुलेगी।

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सबके आकाओं के पास उनके मातहतों की गोपनीय फाइलें होती हैं। इनके आका के पास इनकी फाइल है। वैसे इनकी एक ही फाइल नहीं है, अनेक रंगों में अनेकानेक फाइलें हैं। फाइलों का ठसाठस भरा भंडार है। कुछ यहां हैं‌‌ तो वहां भी हैं। कुछ खुल चुकी हैं तो कुछ आधी खुली या पूरी तरह बंद हैं। वे फाइलें बेचैन हो रही हैं, खुलने के लिए, इसलिए फाइल तो खुलेगी।खोलनेवाले कंप्यूटर के सामने बैठाए जा चुके हैं। उन्हें क्लिक करने के आदेश का इंतजार है। फिर यह फाइल कुछ सेकंड में दिग-दिगंत तक पहुंच जाएगी।

जिनकी फाइलें इन्होंने अपने पास रखी हैं, वे भी कम होशियार नहीं हैं। उन्होंने भी इनकी फाइलें अपने पास रख रखी हैं। वे भी संकट के समय अपना बचाव करना चाहते हैं। वे भी शुभ मुहूर्त की प्रतीक्षा में हैं,‌ जो बताते हैं कि निकट आ चुका है, इसलिए फाइल तो खुलेगी। जिसकी यह फाइल है, उसकी सूरत पर दयनीयता बसेरा कर चुकी है, उसकी नींद हवा हो‌ चुकी है मगर फाइल का इससे क्या वास्ता! फाइल भावुक नहीं होती, फाइल उदास भी नहीं होती, फाइल लल्लोचप्पो में नहीं आती, रिश्वत नहीं खाती, तोहफा नहीं लेती, इसलिए फाइल तो खुलेगी दादा, फाइल तो खुलेगी!

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