बीजेपी राज में खेलों की दुर्दशा और भगवाकरण, प्रचार और प्रधानमंत्री की फोटो के पीछे एक अंधेरी दुनिया
देश में हर खेल बीजेपी के ध्रुवीकरण का माध्यम बन गया है। किस तरह भारत में क्रिकेट का भगवाकरण (मोदीकरण) किया गया है और देश की सत्ता इस खेल का इस्तेमाल अपनी हिंसक जियो-पोलिटिकल विचारधारा को बढ़ाने के लिए कर रही है, वह सबके सामने है।

कुश्ती की अंतरराष्ट्रिय खिलाड़ी, विनेश फोगाट, पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर आशंका जता रहीं थीं– अंत में वैसा ही हुआ। एशियाई खेलों के लिए चयन प्रतियोगिता से उन्हें बाहर कर दिया गया। प्रतियोगिता से ठीक पहले कुश्ती फेडरैशन ने नियमों में ऐसे बदलाव किए कि विनेश फोगाट को प्रतियोगिता से बाहर होना पड़ा। अनेक अंतरराष्ट्रिय पदक जीत चुकी विनेश फोगाट एक ऐसी खिलाड़ी हैं जिन्होंने बाहुबली बीजेपी सांसद के साथ ही देश की सत्ता के विरुद्ध आवाज उठाने का साहस दिखाया था।
देश में केवल कुश्ती ही नहीं बल्कि हरेक खेल बीजेपी की ध्रुवीकरण और महिला-विरोधी राजनैतिक विचारधारा को आगे बढ़ाने का माध्यम रह गया है। किस तरह भारत में क्रिकेट का भगवाकरण (मोदीकरण) किया गया है और देश की सत्ता इस खेल का इस्तेमाल अपनी हिंसक जियो-पोलिटिकल विचारधारा को बढ़ाने के लिए कर रही है, वह सबके सामने है।
क्रिकेट की हरेक बड़ी प्रतियोगिता के मुख्य आयोजन नरेंद्र मोदी स्टेडियम में किए जाने लगे हैं और प्रधानमंत्री या गृह मंत्री इसमें अपनी उपस्थिति दर्ज कराने लगे हैं। आईपीएल 2026 का फाइनल बेंगलुरु में खेला जाना था, पर अब इसे अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में शिफ्ट कर दिया गया है। जय शाह के नेतृत्व में हमारे देश में सत्ता ने क्रिकेट को घातक हथियार की तरह इस्तेमाल किया है। प्रधानमंत्री तो सारी मर्यादाओं को तोड़कर मैच के दौरान प्लेयर्स बॉक्स में भी बैठ जाते हैं।
यह हाल केवल क्रिकेट का ही नहीं है, बल्कि हरेक खेल में सत्ता या व्यवस्था के विरुद्ध आवाज उठाते खिलाड़ियों को परेशान किया जा रहा है और उन्हें प्रतियोगिताओं से दूर करने की कवायद चल रही है। दूसरी तरफ लगभग हरेक खेल में अब प्रचार ज्यादा होता है और सुविधाएं कम होती जा रही हैं। सत्ता के विरोध में उठती आवाजें परेशान हैं, खेलों में परेशानियां झेल रही हैं। खेलो इंडिया और इस तरह के तमाम रंगीन पोस्टरों के बीच एथलेटिक्स के देश में 90 प्रतिशत से अधिक ट्रैक और दूसरी सुविधाएं मानकों से बदतर हैं और हमारा देश डोपिंग के संदर्भ में सबसे निकृष्ठ देशों में एक है। देश की सत्ता को खेलों से केवल इतना मतलब है- जब कोई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रिय पदक जीतता है तब प्रधानमंत्री तमाम चैनलों पर बड़े ईवेंट और लाइव प्रसारण के बीच खिलाड़ियों से मिलते हैं और संबंधित खेल से अपने जन्मजात रिश्ते की बात कैमरे पर करते हैं।
कुश्ती में स्वर्ण सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने वाली और लंबे समय से कुश्ती फेडरैशन के पिछले अध्यक्ष ब्रजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली, विनेश फोगाट, ने हाल में ही यह पहली बार खुलासा किया कि कुश्ती की जिन 6 खिलाड़ियों ने यह मामला न्यायालय में आगे बढ़ाया है, उनमें से एक वे स्वयं हैं। पीएम मोदी नारी शक्ति पर खूब प्रवचन दे रहे हैं और अपने आप को मसीहा के तौर पर प्रचारित कर रहे हैं– इसी बीच में विनेश फोगाट को सोशल मीडिया पर एक विडियो के माध्यम से अपने जीवन और खेल की सुरक्षा के लिए गुहार लगानी पड़ रही है।
इससे पहले विनेश ने कुश्ती फेडरेशन पर आरोप लगाया था कि एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुकाबले के लिए कुश्ती फेडरेशन उनके पंजीकरण में व्यवधान डाल रहा है। हालांकि, इस आरोप के बाद उनका पंजीकरण हो गया। यह मुकाबला उत्तर प्रदेश के गोंडा में आयोजित किया जाना है, यह इलाका बाहुबली ब्रजभूषण शरण सिंह का है। वे अभी सांसद नहीं हैं और न ही कुश्ती फेडरैशन के अध्यक्ष, लेकिन वर्तमान अध्यक्ष संजय सिंह उनके करीबी हैं और विनेश फोगाट की चिंता भी यही है। यह हमारे देश में खेलों की स्थिति है, जहां सत्ता खिलाड़ियों और महिलाओं के साथ नहीं बल्कि यौन शोषण का अपराध करने वालों के साथ खड़ी रहती है।
क्रिकेट के बाइबिल माने जाने वाले, विजडन, के संपादक लारेंस बूथ ने अपने संपादकीय में बीजेपी राज में भारतीय क्रिकेट के भगवाकरण की विस्तार से चर्चा की है। उन्होंने भारतीय क्रिकेट में सत्ता के बढ़ते प्रभाव और नियंत्रण की कड़े शब्दों में निंदा की है। संपादकीय के अनुसार राजनीति अब इस कदर हावी है कि क्रिकेट पीछे छूट गया है। वर्ष 2025 के एशिया कप में भारतीय खिलाड़ियों का पाकिस्तानी खिलाड़ियों से मैच से पहले हाथ नहीं मिलाना, इस संपादकीय में “हैंड्सशेक गेट” के तौर पर लिखा गया है। खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाना, लेकिन मैच खेलना, कोई खेल नहीं था बल्कि पाकिस्तान को अपमानित करने की सोची-समझी साजिश थी– यह कम से कम क्रिकेट तो नहीं था। यह क्रिकेट के खेल को सैनिक युद्ध से जोड़ने की साजिश थी।
यह स्थिति खेलों से विपरीत कितनी विकराल थी इसका अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने पाकिस्तान पर पहली जीत को भारतीय सेना को समर्पित कर दिया। एशिया कप से पहले भी इतना तो स्पष्ट था कि भारतीय क्रिकेट सत्ता में बैठी बीजेपी की कठपुतली बन चुका है। खेल भावना को युद्ध में परिवर्तित करने का काम प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं किया था– पाकिस्तान की हार के बाद उन्होंने सोशल मीडिया साइट, एक्स, पर लिखा था– यह खेल के मैदान का “ऑपरेशन सिंदूर” था, नतीजा वही रहा, पाकिस्तान हार गया।
आईपीएल 2026 की नीलामी में कोलकाता नाइट राइडर्स ने बांग्लादेश के खिलाड़ी, मुस्तफिजुर रहमान को 9.2 करोड़ में खरीदा था। नीलामी के ठीक पहले बांग्लादेश में एक हिन्दू की हत्या की खबर आई थी। इसके बाद तो मुस्तफिजुर और कोलकाता टीम के सह-मालिक और अभिनेता शाहरुख खान दोनों ही सत्ता समर्थित हिंदुवादी संगठनों के निशाने पर आ गए। मीडिया और सत्ता ने इस मुद्दे को इतनी हवा दी कि अंत में कोलकाता नाइट राइडर्स को मुस्तफिजुर रहमान को आनन-फानन में रिलीज करना पड़ा। यह वाकया स्पष्ट तौर पर दिखाता है कि क्रिकेट भारत में खेल नहीं रह गया है बल्कि सत्ता की नीतियों के प्रसार का माध्यम बन गया है।
समस्या यह है कि भारतीय क्रिकेट का भगवाकरण जय शाह के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुंच गया है। टी-20 विश्व कप में बांग्लादेश की क्रिकेट टीम ने भारत के साथ अपने मैच भारत में खेलने से मना कर दिया और इस मैच को श्रीलंका में करवाने का अनुरोध आईसीसी से किया, पर आईसीसी ने ऐसा करने से मना कर दिया। जबकि वर्ष 2025 की चैंपियंस ट्रॉफी के समय भारत ने पाकिस्तान में खेलने से मना किया था, तब भारत-पाकिस्तान मैच दुबई में आयोजित कर दिया गया था। देश में खेलों का माहौल किस कदर धार्मिक उन्माद में तब्दील हो चुका है इसका एक उदाहरण तो टी-20 की ट्रॉफी का मंदिरों में भ्रमण भी था।
केवल क्रिकेट ही नहीं बल्कि देश में हरेक खेल वर्ष 2014 के बाद से बस उन्माद में तब्दील हो गया है। तमाम खिलाड़ी विदेशों में जाकर ट्रैनिंग करते हैं और फिर देश के लिए मेडल लाते हैं। जाहिर है, विदेशों में ट्रेनिंग केवल समृद्ध घरों के खिलाड़ी ही कर पाते हैं। देश में खेलों इंडिया के तमाम पोस्टर लटकाए जाते हैं पर देश में खेलों का इंफ्रास्ट्रक्चर बदहाल है। महिला खिलाड़ियों के यौन उत्पीड़न के अलावा भी दूसरी बहुत समस्याएं हैं और जिन्हें दूर करने के बारे में कोई योजना है ही नहीं। हाल में ही एथलेटिक्स फेडरैशन ऑफ इंडिया ने बताया है कि देश में बिछाए गए एथलेटिक्स के लिए कुल सिन्थेटिक ट्रैकस में से 90 प्रतिशत से अधिक निर्धारित मानकों से निकृष्ट दर्जे के हैं। ये ट्रैक कच्चे माल, बिछाए जाने के तरीके और तय आकार– हरेक तरीके से मानकों से बदतर हैं। कई ट्रैक तो ऐसे हैं जिसमें पालीयुरथेन के बदले रबर के टायर बिछाए गए हैं। अब ऐसे सब-स्टैन्डर्ड ट्रैक पर ईमानदारी से खून-पसीना बहाकर भी परिणाम तो नहीं मिलेगा।
हमारे देश में खेल के हरेक फेडरैशन पर राजनेताओं का दबदबा है– इनमें अधिकतर राजनेता बीजेपी से जुड़े हैं। ऐसे में देश में खेलों के नाम पर खेल कम, राजनीति अधिक होती है। इन राजनेताओं का पूरा ध्यान राजनीति में अपना रसूख बढ़ाने पर होता है, खेलों और खिलाड़ियों पर नहीं। अंतरराष्ट्रीय संस्था “एथलेटिक्स इन्टेग्रिटी यूनिट” ने भारत को उन देशों में रखा है जहां प्रतिबंधित रसायनों के उपयोग (डोपिंग) का सबसे अधिक खतरा है। हमारा देश पिछले तीन वर्षों से डोपिंग में पकड़े गए खिलाड़ियों की संख्या में दुनिया में पहले स्थान पर है। एथलेटिक्स इन्टेग्रिटी यूनिट के अनुसार देश में डोपिंग की जांच का कोई स्पष्ट कार्यक्रम ही नहीं है।
बीजेपी की चमक-धमक के पीछे हरेक चीज पूरी काली है– प्रचार और प्रधानमंत्री की फोटो के पीछे एक अंधेरी दुनिया है। यहां खेल बस राजनीति है और इस घिनौनी राजनीति में विनेश फोगाट जैसे खिलाड़ी नेपथ्य में पहुंच जाते हैं और बृजभूषण शरण सिंह जैसे नेता सत्ता में और ताकतवर हो जाते हैं, बाहुबली बन जाते हैं।
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