विष्णु नागर का व्यंग्यः दोस्त मोदी से कहकर शाह को बुला लें ट्रंप, वहां भी सब दो मिनट में सेट कर देंगे!

ऐसा देश भी भला कोई देश है, जहां के राष्ट्रपति को सुरंग में छुपना पड़ जाए! एक अदना सा पुलिस प्रमुख, देश के राष्ट्रपति, यानी हमारे प्रधानमंत्री की हैसियत के आदमी से, यह कहने की हिम्मत करे कि जरा चुप रहना भी सीखो! ढंग की बात कर सकते हो, तो करो, वरना चुप बैठो।

फोटोः सोशल मीडिया
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विष्णु नागर

भाइयों-बहनों, आज अगर मैं भी 'मन की बात' करूं तो आपको बुरा तो नहीं लगेगा? लगे तो भी मैं तो करूंगा। तो ये देश अमेरिका, अपने को बिल्कुल समझ में नहीं आया। होगा विश्व की महाशक्ति, हुआ करे, हमारी बला से।

अरे ऐसा देश भी भला कोई देश है, जहां के राष्ट्रपति को सुरंग में छुपना पड़ जाए! जहां के राष्ट्रपति भवन तक प्रदर्शनकारी चले आएं, नारे लगाएं, हुुड़दंग मचाएं! ह्यूस्टन का पुलिस प्रमुख, देश के राष्ट्रपति, यानी समझो हमारे प्रधानमंत्री की हैसियत के आदमी से, यह कहने की हिम्मत करे कि ऐ ट्रंपश्री, जरा चुप रहना भी सीखो! मुंह बंद भी रखा करो। अल्लमबल्लम कुछ भी बका मत करो। ढंग की बात कर सकते हो, तो करो, वरना चुप बैठो।

हमारे यहां प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री तो बहुत दूर, कोई अधिकारी, जिला बीजेपी अध्यक्ष से भी इस भाषा में बात कर ले, तो भक्त इसे हिंदुत्व और मोदीजी का संयुक्त अपमान मानते हुए उसकी खटिया खड़ी कर देंगे। ऐसा पक्का इंतजाम करवा देंगे कि उसकी बाकी जिंदगी चैन से न गुजर सके!

और अगर भाई साहब, खुदा न खास्ता, उसने प्रधानमंत्री या गृह मंत्री से ऐसा कह दिया तो उसकी ड्रेस निकलवाकर उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। इतने केस उस पर मढ़ दिए जाएंगे कि उनसे निबटने के लिए यह मानव जीवन उसे अपर्याप्त लगेगा। सरकार किसी की भी आए, उसे जार्ज फ्लायड की तरह यह कहने का मौका भी नहीं मिलेगा कि मेरी सांस घुट रही है, मैं मर जाऊंगा। कोई उसका वीडियो बनाता तो उसका मोबाइल या कैमरा ही नहीं, उसका सिर भी तोड़ दिया जाता।

यह होता है देश, ये होता है असली मनुवादी लोकतंत्र! और वहां दो सौ साल पुराना लोकतंत्र है और एक पुलिस प्रमुख इतनी बदतमीजी पर उतर आता है और फिर भी साफ बच निकल आता है! चल चुका ऐसा देश और ऐसा लोकतंत्र। अरे सीखो मेरे देश की इस महान सरकार से! लेकिन साहब घमंड है अमेरिका होने का, सीखेंगे थोड़े ही!

और बस इतना ही नहीं, वहां चार दशक पुराना दक्षिणपंथी स्तंभकार ट्रंपश्री को दो कौड़ी का विदूषक बताता है और कहता है कि इसने अमेरिका का कबाड़ा करके रख दिया है! कहां एक स्तंभकार और कहां देश का सर्वेसर्वा! कोई मुकाबला है दोनों में? फिर भी देशद्रोह की कार्रवाई तक नहीं और वहां के कालों की इतनी हिम्मत कि अमेरिका के 75 शहरों में प्रदर्शन करें और गोरे और तमाम लोग उनके साथ आ जाएं और पुलिसवाले उनके सामने घुटने टेक दें और प्रदर्शनकारियों से यह भी कहें कि हम भी तुम्हारे साथ हैं!

ऐसे चलती है क्या किसी देश की व्यवस्था? राष्ट्रपति मिलिट्री बुलाने, कर्फ्यू लगाने की बात करता है और गवर्नर उसकी सुनते तक नहीं। राष्ट्रपति को अपने शब्द वापिस लेने पड़ते हैं! ये कोई बात हुई! हमारे यहां यह सब नहीं चलता, क्योंकि यहां लोकतंत्र है! हमारा यह लोकतंत्र अमर रहे।

अरे ट्रंपश्री, मोदीजी तो आपके फास्ट फ्रेंड हैं। उनसे कहो कि अमित शाह को महीने भर के लिए आपको उधार दे दें! यहाँ तो ऑलमोस्ट वह सबकुछ सेट कर चुके हैं, वहां भी सब दो मिनट में कर देंगे! और वह सच्चे 'देशभक्त' हैं तो अमेरिका से यहां भी सब सेट करते रहेंगे।

और इससे भी अधिक आकर्षक प्रस्ताव देता हूं कि अगर आप थक गए हों तो मोदीजी को भी वहां बुला लो। उनका हवा-पानी बदले, कई महीने हो गए हैं। दोनों मिलकर सब कालों, उनके साथी गोरों वगैरह की हवा टाइट कर देंगे। और भारत का क्या है, मोदीजी जैसा तो कोई भी चला लेगा। यहां एक से एक 'अवर्णनीय योग्य' मंत्री हैं- पीयूष गोयल, निर्मला सीतारमण, रविशंकर प्रसाद, स्मृति ईरानी आदि और सबसे योग्यतम हैं- गिरिराज सिंह और उनसे भी बढ़िया रहेंगी- साध्वी प्रज्ञा। हालांकि, अभी वह बेचारी सांसद हैं।

बस एक ही दिक्कत है बीजेपी में मार्गदर्शक मंडल जैसी व्यवस्था है। पता चला उधर अमेरिका में मोदी-शाह अपना झंडा फहरा कर आए और इधर इन्हें नये प्रधानमंत्री ने मार्गदर्शक मंडल के  क्वारंटीन सेंटर में स्थायी रूप से भेज दिया! बीजेपी में यह परंपरा स्वयं मोदीजी द्वारा स्थापित है तो वे शिकायत भी नहीं कर सकते!

खैर जो भी हो, ट्रंपश्री आप मान लो मेरी बात, फायदे में रहोगे वरना चुनाव हार सकते हो! और आपको बता दूं कि आपकी हार से आपको जितना दुख होगा, उससे दोगुना दुख हमारे मोदीजी को होगा। वह रोना भी जानते हैं, जो शायद आप नहीं जानते। और वह जब रोते हैं तो बड़े-बड़े पर्वत पिघल जाते हैं। हिमालय उनकी वजह से ही पिघल रहा है, इसलिए अपने खातिर नहीं तो भारत के 130 करोड़ लोगों की खातिर हमारे मोदीजी को दुख के सागर में मत डुबोना!

वरना उस फकीर का कोई भरोसा नहीं। कब अपना झोला लेकर निकल जाए और केदारनाथ की गुफा में तपस्या करने चला जाए। वह गया तो फिर गया, फिर  नहीं लौटेगा और भारत फिर से नेहरू युग में पहुंच जाएगा। बड़ी मुश्किल से तो मोदीजी बेचारे कश्ती को निकाल कर 'न्यू इंडिया' तक लाए हैं! ऐसा मत होने देना ट्रंपश्री। मैं बहुत आशा से आपकी ओर देख रहा हूं।

और अंत में, अगर कोई अंग्रेजीदां, भाई अथवा बहन इसे पढ़ रही हो तो इसका अनुवाद करके सीधे व्हाइट हाउस पहुंचा देना। मोदीजी बिलकुल बुरा नहीं मानेंगे। उल्टे वह खुश होंगे कि 130 करोड़ में कम से कम एक 'देशद्रोही' कम हुआ और 'देशभक्त' बन गया!

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