यूक्रेन तनाव: अमेरिकी खुफिया जानकारियों से उठ चुका है भरोसा, फिर भी टला नहीं है युद्ध का खतरा

पिछले कुछ दशकों में अमेरिकी जानकारियां इतनी गलत साबित हुई हैं कि लोगों का भरोसा उठ गया है। सबसे गलत जानकारी 2003 में इराक को लेकर दी गई थी। पर झूठे फ्लैग ऑपरेशंस के बाबत रूस का रिकॉर्ड भी अच्छा नहीं है। कुल मिलाकर संशय, झूठ और अफवाहों का बोलबाला है।

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प्रमोद जोशी

कुछ दिन पहले यूक्रेन के माहौल को देखते हुए लगता था कि लड़ाई अब शुरू हुई कि तब। मीडिया में तारीख घोषित हो गई थी कि 16 फरवरी को हमला होगा। 16 तारीख निकल गई बल्कि उसी दिन रूस ने कहा कि हम फौजी अभ्यास खत्म करके कुछ सैनिकों को वापस बुला रहे हैं। इस घोषणा से फौरी तौर पर तनाव कुछ कम जरूर हुआ था, पर अब अमेरिका का कहना है कि यह घोषणा फर्जी साबित हुई है। रूस पीछे नहीं हटा बल्कि सात हजार सैनिक हजार और भेज दिए हैं। बहरहाल यूक्रेन तीन तरफ से घिरा हुआ है। जबर्दस्त अविश्वास का माहौल है।

रूस ने युद्धाभ्यास रोकने की घोषणा की है और बातचीत जारी रखने का इरादा जताया है। यूक्रेन चाहता है कि यूरोपियन सुरक्षा और सहयोग से जुड़े संगठन ओएससीई की बैठक हो जिसमें रूस से सवाल पूछे जाएं। जर्मन चांसलर ओलाफ शॉल्त्स यूक्रेन गए हैं। हालांकि अमेरिका मुतमइन नहीं है फिर भी लंबी फोन-वार्ता के बाद बाइडेन और बोरिस जॉनसन ने कहा कि समझौता अभी संभव है।

धमकियां-चेतावनियां

पहली नजर में लगता है कि बातों, मुलाकातों का दौर खत्म हो चुका है, पर ऐसा नहीं है। परदे के पीछेविमर्शजारी है। गत 11 फरवरी को जो बाइडेन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलीवन ने अमेरिकी नागरिकों से कहा कि वे 48 घंटे के भीतर यूक्रेन से बाहर निकल जाएं। अमेरिकी दूतावास भी बंद किया जा रहा है। लड़ाई की शुरुआत हवाई बमबारी या मिसाइलों के हमले के रूप में होगी। साथ में उन्होंने यह भी जोड़ा कि व्लादिमीर पुतिन ने अभी आखिरी फैसला नहीं किया है।

रूस का कहना है कि हमला करने का हमारा कोई इरादा नहीं है। उसके विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने 12 फरवरी को कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने रूसी हमले का जबर्दस्त प्रचार कर रखा है। 12 फरवरी को ही जो बाइडेन ने पुतिन को कॉल करके कहा था कि आपने हमला किया, तो समझ लीजिए कि परिणाम बहुत खराब होंगे। इस पर पुतिन के विदेश-नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने कहा, अमेरिका का हिस्टीरिया क्लाइमेक्स पर है।

समझ में नहीं आता कि कौन किसको गलत साबित कर रहा है। अमेरिका के अलावा पश्चिमी यूरोप के दूसरे देशों ने भी अपने नागरिकों के नाम चेतावनियां जारी की हैं। डच विमान सेवा केएलएम ने 12 फरवरी से कीव की उड़ानें बंद कर दी हैं। दूसरी सेवाएं भी बंद होने जा रही हैं। नागरिकों ने भागना और पत्रकारों ने आना शुरू कर दिया है। वैश्विक मीडिया के लिए युद्ध का नया एपिसोड शुरू होने जा रहा है।

हाइब्रिड-वॉर

अमेरिकी मीडिया में युद्ध की संभावित तारीख तक घोषित हो चुकी हैं। कुछ तारीखें निकल गईं और कुछ निकलने वाली हैं। अमेरिका सरकार मीडिया को लाइव इंटेलिजेंस की जानकारी दे रही है, शायद रूस को हतोत्साहित करने के लिए कि वह हमला करने की हिमाकत न करे। क्या इस सूचना-युद्ध का रूस पर असर होगा? क्या वह अपने हाथ खींचने को मजबूर होगा?

साप्ताहिक इकोनॉमिस्ट ने लिखा है कि हमने रूस में तमाम डिप्लोमैट, पत्रकारों, अफसरों और कारोबारियों से बात की है। बहुत कम लोगों को लगता है कि युद्ध होगा या होना चाहिए। वे सब मानते हैं कि लड़ाई हुई तो बहुत गलत होगा। वैश्विक-तनाव से रूसी अर्थव्यवस्था को वैसे ही काफी नुकसान हो रहा है। बांड, शेयर बाजार और मुद्रा बाजार से यह साफ दिखाई पड़ रहा है। हो सकता है कि 2014 की तरह रूस कमजोर साबित न हो, पर असर तो होगा।


यूक्रेन सरकार और नागरिकों का कहना है कि लड़ाई अभी हाइब्रिड-युद्ध की शक्ल में हैं। साइबर-अटैक, आर्थिक-दबाव और बमबारी की फर्जी धमकियां और अफवाहें लगातार जारी हैं। सीमा पर युद्ध के हालात हैं, पर उससे ज्यादा देश के भीतर अफरा-तफरी है। यूक्रेन ने तमाम ऐसे टीवी स्टेशनों को बंद कर दिया है जिन पर आरोप है कि वे रूस-समर्थक प्रसारण कर रहे हैं। फिर भी बागी रेडियो-प्रसारण जारी है। तीन तरफ से करीब एक लाख रूसी सैनिकों ने देश को घेर लिया है। रूसी नौसेना ब्लैक सी में युद्धाभ्यास कर रही है संकेत हैं कि यूक्रेन के दक्षिणी तट की नाकेबंदी होगी जिससे बंदरगाहों पर करोबार ठप हो जाएगा। रूस ने पहले से ही समुद्री रास्तों को बंद कर रखा है।

अविश्वसनीय प्रचार

गत 23 जनवरी को ब्रिटिश सरकार ने दावा किया कि रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव में अपनी पिट्ठू सरकार बैठाने की साजिश की है। इसके बाद 3 फरवरी को अमेरिका ने कहा कि अफवाह है कि रूसी जमीन या रूसी भाषियों के इलाके पर हमला हुआ है। इससे रूस को यूक्रेन पर हमला करने का बहाना मिल जाएगा। देश के पूर्वी सीमा-क्षेत्र में आबादी का एक हिस्सा रूस-समर्थक है, वह रूसी सेनाओं की मदद करेगा।

अमेरिका की ओर से रूसी सेना की गतिविधियों की जानकारियां जारी की जा रही हैं। प्रचार है कि रूसी सेना के भीतर सैनिक- कार्रवाई को लेकर असंतोष है। साप्ताहिक इकोनॉमिस्ट ने सेटेलाइट चित्रों के मार्फत दिखाया है कि रूसी कहां और किन उपकरणों के साथ तैनात है। फिर भी अमेरिकी पत्रकारों को अपनी सरकार पर भरोसा नहीं है। पिछले कुछ दशकों में अमेरिकी जानकारियां इतनी गलत साबित हुई हैं कि लोगों का भरोसा उठ गया है।

सबसे गलत जानकारी 2003 में इराक को लेकर दी गई थी। पर झूठे फ्लैग ऑपरेशंस के बाबत रूस का रिकॉर्ड भी अच्छा नहीं है। कुल मिलाकर संशय, झूठ और अफवाहों का बोलबाला है। रूस ने 2014 में यूक्रेन में और 2008 में जॉर्जिया में सैनिक हस्तक्षेप किए, पर उसे मिला क्या? यूक्रेन की आधी से ज्यादा आबादी नाटो और यूरोपियन यूनियन समर्थक है। काफी कारोबार यूरोपीय संघ की ओर चला ही गया है। जंगी हालात की वजह से निवेशक और कारोबारियों ने हाथ खींच लिए हैं। राष्ट्रीय मुद्रा ह्रीन्विया की हालत पतली है। पश्चिम और रूस के टकराव में यूक्रेन पिस रहा है।

रास्ता क्या है?

बेलारूस की राजधानी मिंस्क में हुए 2014 में हुए समझौते के आधार पर रास्ता निकालने की कोशिशें चल रही हैं। वह समझौता यूक्रेनी सेना और रूस-समर्थित बागियों के बीच लड़ाई रोकने के लिए हुआ था जिसे 2015 में अपडेट किया गया। सुलीवन के बयान के पहले 10 फरवरी को रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधियों की बर्लिन में फ्रांस और जर्मनी के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत हुई थी। इसे ‘नॉर्मैंडी फॉर्मेट’ कहते हैं जो मिंस्क समझौते को आगे बढ़ाता है। रूस चाहता है कि यूक्रेन स्थानीय चुनाव कराए, ताकि उसके समर्थक राजनीतिक नेता मजबूत हों। सवाल है कि डोनबास में अलग हुए एनक्लेव को यूक्रेन किस हद तक स्वायत्तता देगा। रूस चाहता है कि डोनबास को विदेश नीति में वीटो अधिकार प्राप्त हों।

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