असित सेन: जिस अनोखे अंदाज से मिली सिनेमा में पहचान, बोलने का वह स्टाइल उनके नौकर का था
असित सेन ने अपने लंबे करियर में करीब 250 फिल्मों में काम किया। 'आराधना', 'आनंद', 'अमर प्रेम', 'बॉम्बे टू गोवा', 'भूत बंगला', 'ब्रह्मचारी', 'मेरा गांव मेरा देश' और 'पूरब और पश्चिम' जैसी फिल्मों में उनके किरदार आज भी याद किए जाते हैं।

जब भी पुराने दौर की हिंदी फिल्मों और कॉमेडी की बात होती है, तो असित सेन का जिक्र जरूर होता है। उनकी आवाज और बेहद धीमी रफ्तार में बोले गए डायलॉग्स लोगों को खूब हंसाते थे। खास बात यह थी कि उनका यह अंदाज किसी एक्टिंग क्लास से नहीं आया था, बल्कि उनके बचपन की एक छोटी सी याद से पैदा हुआ था। बहुत कम लोग जानते हैं कि असित सेन ने अपनी मशहूर धीमी डायलॉग डिलीवरी अपने एक नौकर से सीखी थी, जो बेहद धीरे-धीरे बात करता था। बाद में यही अंदाज उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गया और उन्होंने इसी स्टाइल से हिंदी सिनेमा में अलग जगह बना ली।
असित सेन का जन्म 13 मई 1917 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक बंगाली परिवार में हुआ था। उनका परिवार पश्चिम बंगाल के बर्दवान से गोरखपुर आकर बस गया था। बचपन से ही असित सेन का मन कला और फोटोग्राफी में लगता था। उनके पिता अलग-अलग कारोबार करते थे, लेकिन असित को कैमरे के साथ समय बिताना ज्यादा पसंद था। वह छोटी उम्र में ही लोगों की तस्वीरें खींचने लगे थे। बाद में उन्होंने गोरखपुर में 'सेन फोटो स्टूडियो' नाम से अपना स्टूडियो भी शुरू किया था।
युवावस्था में असित सेन कोलकाता पहुंचे। उन्होंने परिवार वालों से कहा कि वह पढ़ाई करने जा रहे हैं, लेकिन असल में उनका सपना फिल्मों और थिएटर की दुनिया को करीब से देखने का था। वहां उन्होंने नाटकों में अभिनय करना शुरू किया। इसी दौरान उनकी मुलाकात मशहूर निर्देशक बिमल रॉय से हुई। बिमल रॉय उस समय भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित फिल्मकारों में गिने जाते थे। असित सेन की प्रतिभा देखकर उन्होंने उन्हें अपने साथ काम करने का मौका दिया।
शुरुआत में असित सेन फिल्मों में कैमरे और प्रोडक्शन से जुड़े काम करते थे, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें छोटे अभिनय रोल मिलने लगे। फिल्मों में असली पहचान उन्हें तब मिली, जब उन्होंने अपने डायलॉग्स बोलने का एक अलग तरीका अपनाया। कहा जाता है कि बचपन में उनके घर में एक नौकर था, जो बहुत धीरे-धीरे बोलता था। असित सेन को उसका अंदाज हमेशा याद रहा। बाद में जब उन्हें फिल्मों में कॉमेडी रोल मिलने लगे, तो उन्होंने उसी शैली को अपनाया। उनकी धीमी आवाज और रुक-रुक कर बोले गए डायलॉग्स लोगों को इतने पसंद आए कि यही उनकी खास पहचान बन गई।
फिल्म 'बीस साल बाद' में उनका 'गोपीचंद जासूस' वाला किरदार सुपरहिट साबित हुआ। असित सेन ने अपने लंबे करियर में करीब 250 फिल्मों में काम किया। 'आराधना', 'आनंद', 'अमर प्रेम', 'बॉम्बे टू गोवा', 'भूत बंगला', 'ब्रह्मचारी', 'मेरा गांव मेरा देश' और 'पूरब और पश्चिम' जैसी फिल्मों में उनके किरदार आज भी याद किए जाते हैं। उन्होंने अभिनय के अलावा 'परिवार' और 'अपराधी कौन' जैसी फिल्मों का निर्देशन भी किया।
उस दौर में उन्हें 'हास्य सम्राट' कहा जाता था। बड़े-बड़े सितारे भी उनके साथ काम करना पसंद करते थे। असित सेन की निजी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए। उनकी पत्नी मुकुल सेन उनके बेहद करीब थीं। जब उनकी पत्नी का निधन हुआ, तो असित सेन पूरी तरह टूट गए। पत्नी की मौत का दुख वह सह नहीं पाए और कुछ ही महीनों बाद 18 सितंबर 1993 को उन्होंने भी इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
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