नहीं रहे 'फ्रीडम एट मिडनाइट' और 'सिटी ऑफ जॉय' के लेखक डॉमिनिक लापिएर

डॉमिनिक लापिएर फ्रांस के थे, लेकिन भारत को लेकर उनकी लेखनी हमेा चलती रही। 1985 में आई उनकी किताब सिटी ऑफ जॉय कलकत्ता (आज का कोलकाता) के एक रिक्शा वाले की कहानी है जो भारत में बेहद लोकप्रिय हुई। इस किताब में 1992 में क फिल्म भी बनी थी।

Getty Images
Getty Images
user

नवजीवन डेस्क

फ्रीडम एट मिडनाइट और सिटी ऑफ जॉय जैसी बहुचर्चित किताबों के लेखक डॉमिनिक लापिएर का निधन हो गया। उनकी पत्नी ने उनकी मृत्यु की जानकारी देते हुए संदेश लिखा है कि 91 वर्ष की उम्र में डोमिनिक अब नहीं रहे।

वैसे डॉमिनिक लापिएर फ्रांस के थे, लेकिन भारत को लेकर उनकी लेखनी हमेा चलती रही। 1985 में आई उनकी किताब सिटी ऑफ जॉय कलकत्ता (आज का कोलकाता) के एक रिक्शा वाले की कहानी है जो भारत में बेहद लोकप्रिय हुई। इस किताब में 1992 में क फिल्म भी बनी थी जिसका निर्देशन रोलां जोफ ने किया था और पैट्रिक स्वेज ने इसमें मुख्य भूमिक निभाई थी।

डोमिनिक ने अपनी किताब से हुई कमाई को भारत में टीवी और कोढ़ से ग्रस्त मरीजों के इलाज पर खर्च किया था। 2005 में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा था कि उनकी किताब  से हुई कमाई से 24 साल में करीब 10 लाख टीबी मरीजों का इलाज संभव हो सका साथ ही कोढ़ से ग्रस्त करीब 9000 बच्चों की देखभाल की जा सकी।

Getty Images
Getty Images
Carlos Alvarez

लापिएर का जन्म 30 जुलाई 1931 को फ्रांस के चेटिलेलियां में हुआ था। उनके लेखन का सबसे स्वर्णिम अध्याय लैरी कॉलिंस के साथ लिखी गई किताबें हैं। उनकी लिखी बेस्ट सेलर की सूची में शामिल रही 6 किताबों की बिक्री 5 करोड़ से भी अधिक आंकी जाती है।

उनकी संभवत: सबसे लोकप्रिय किताह है ‘इज पैरिस बर्निंग?’ यह किताब 1965 में आई थी और इसमें उन घटनाओं का अक्स दिखता है जिनसे होते हुए 1944 के नाजी जर्मनी का पैरिस पर कब्जा होता है। इस किताब पर भी फिल्म बनी थी जिसे फ्रांसिस फोर्ड कोपोला और गोर विदाल ने बनाया था। फ्रांसिस फोर्ड कोपोला को मार्लिन ब्रेंडो और अल पचीनो अभिनीत मशहूर फिल्म गॉडफादर के रचियता के रूप में भी जाना जाता है। डोमिनिक और लैरी कॉलिंस की अन्य किताबें ‘ऑर आई विल ड्रेस यू इन द मॉर्निंग (1968)’, ‘ओ जेरुसेलम (1972)’, ’द फिफ्थ हॉर्समैन (1980)‘ और इज न्यूयॉर्क बर्निंग’ आदि हैं।


डोमिनिक भोपाल गैस त्रासदी पर आधारित किताब फाइव पास्ट मिडनाइट इन भोपाल के भी सह लेखक हैं। यह किताब दरअसल एक शोधपत्र है जिसमें उस घटना के साक्षी लोगों से बातचीत को आधार बनाया गया है। इस किताब से हुई आमदनी का भी एक हिस्सा डॉमिनिक ने भोपाल गैस दुर्घटना के पीड़ितों की मदद पर खर्च किया था।

डॉमिनिक को 2008 में भारत के तीसरे नागरिक सम्मान पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था।

Google न्यूज़नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें

प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia