बीबीसी ने बनाई दुनिया के इतिहास में 100 ताकतवर महिलाओं की सूची, इंदिरा गांधी समेत 4 भारतीय महिलाएं शामिल

दुनिया की अब तक की 100 ताकतवर महिलाओं में 4 भारतीय महिलाएं शामिल

बीबीसी द्वारा बनाई गई दुनिया की 100 सबसे ताकतवर महिलाओं की सूची में 4 भारतीय महिलाओं का नाम शामिल हैं जिन्होंने दुनिया बदलने में अपना योगदान दिया। इसमें इंदिरा गांधी, सरोजिनी नायडू, मदर टेरेसा और अमृता प्रीतम के नाम हैं।

बीबीसी द्वारा बनाई गई दुनिया की 100 सबसे ताकतवर महिलाओं की सूची में 4 भारतीय महिलाओं का नाम शामिल हैं जिन्होंने दुनिया बदलने में अपना योगदान दिया। इसमें इंदिरा गांधी, सरोजिनी नायडू, मदर टेरेसा और अमृता प्रीतम के नाम हैं।

इंदिरा गांधी:

भारत की पूर्व पीएम इंदिरा गांधी (19 नवंबर, 1917-31 अक्टूबर,1984)

भारत की पूर्व पीएम इंदिरा गांधी (19 नवंबर, 1917-31 अक्टूबर,1984)

इस सूची में 49वां स्थान पर देश की पहली और इकलौती महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी हैं। इंदिरा गांधी का जन्म 19 नवम्बर 1917 को राजनीतिक रूप से प्रभावशाली नेहरू परिवार में हुआ था। इनके पिता जवाहरलाल नेहरू और इनकी माता कमला नेहरू थीं। इंदिरा गांधी को दृढ़ संकल्पी व्यक्तित्व और कठोर निर्णयों के लिए जाना जाता है। उन्होंने चार बार देश की सत्ता संभाली। 1969 में उन्होंने बैंकों का राष्ट्रीयकरण करके देश की अर्थव्यस्था को सुधारने में बड़ा योगदान दिया। 1971 के युद्ध में पाकिस्तान को करारी शिकस्त देने के बाद उन्हें दुर्गा कहा जाने लगा।

सरोजिनी नायडू:

स्वतंत्रता सेनानी सरोजिनी नायडू (13 फरवरी,1879-2 मार्च, 1949)

स्वतंत्रता सेनानी सरोजिनी नायडू (13 फरवरी,1879-2 मार्च, 1949)

इस सूची में 77वां स्थान मौजूद भारत की स्वर कोकिला, स्वतंत्रता सेनानी और कवयित्री सरोजिनी नायडू कांग्रेस की अध्यक्ष और किसी प्रदेश की राज्यपाल बनने वाली पहली भारतीय महिला थीं। 1917 में उन्होंने भारतीय महिला एसोसिएशन के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सरोजिनी नायडू का जन्म भारत के हैदराबाद नगर में हुआ था। इनके पिता अघोरनाथ चट्टोपाध्याय एक नामी विद्वान तथा मां कवयित्री थीं और बांग्ला में लिखती थीं।

मदर टेरेसा:

समाज सेविका मदर टेरेसा (26 अगस्त, 1910-5 सितंबर,1997)

समाज सेविका मदर टेरेसा (26 अगस्त, 1910-5 सितंबर,1997)

20वां स्थान सूची में अल्बानिया में जन्मीं अगनेस गोंझा बोयाजिजू ने कम उम्र में ही गरीबों, लाचारों और बीमारों की सेवा करने का प्रण ले लिया था। मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त, 1910 को स्कॉप्जे (अब मेसीडोनिया में) में हुआ था। इनके पिता निकोला बोयाजू एक साधारण व्यवसायी थे। मदर टेरेसा का वास्तविक नाम ‘अगनेस गोंझा बोयाजिजू’ था। वह रोमन कैथलिक नन बनीं और 1948 में कलकत्ता आ बसीं। यहीं उन्होंने अपना पूरा जीवन बिताया। उनके सेवा कार्यों के लिए उन्हें मदर टेरेसा नाम मिला। 1950 में उन्होंने मिशनरीज ऑफ चैरिटी संस्था का गठन किया। रमन मैग्सेसे और नोबेल शांति पुरस्कार समेत कई पुरस्कार मिले।

अमृता प्रीतम:

लेखिका अमृता प्रीतम (31 अगस्त,1919-31 अक्टूबर, 2005)

लेखिका अमृता प्रीतम (31 अगस्त,1919-31 अक्टूबर, 2005)

100वां स्थान सूची में पंजाबी और हिंदी भाषा की लेखिका और कवयित्री अमृता प्रीतम अपने समय की महिलाओं से कहीं आगे की मानी जाती हैं। अमृता प्रीतम पंजाबी के सबसे लोकप्रिय लेखकों में से एक थी। पंजाब (भारत) के गुजरांवाला जिले में पैदा हुईं अमृता प्रीतम को पंजाबी भाषा की पहली कवयित्री माना जाता है। उन्होंने कुल मिलाकर लगभग 100 पुस्तकें लिखी हैं जिनमें उनकी चर्चित आत्मकथा ‘रसीदी टिकट’ भी शामिल है। उन्होंने लेखन में महिलाओं की आवाज बुलंद की और कई मानवीय पहलुओं को नए रूप में सामने रखा। उन्हें साहित्य अकादमी, भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार, पद्म श्री और पद्म विभूषण से नवाजा गया।

मैरी क्यूरी :

इसके सूची में पहले स्थान पर मैरी क्यूरी हैं। मैडम क्युरी एक रशियन महिला थीं। उनका जन्म वारसा (पोलैंड) में 7 नवंबर 1867 को हुआ था। मां अध्यापिका तथा पिता प्रोफेसर थे। माता-पिता की शिक्षाओं का असर मैरी क्युरी पर भी पड़ा। मैरी क्युरी फ्रांस में डॉक्टरेट पूरा करने वाली पहली महिला हैं। उनको पेरिस विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बनने वाली पहली महिला होने का भी गौरव प्राप्त हुआ। यहीं उनकी मुलाकात पियरे क्यूरी से हुई जो उनके पति बने। इस वैज्ञानिक दंपत्ति ने 1898 में पोलोनियम की महत्त्वपूर्ण खोज की। कुछ ही महीने बाद उन्होंने रेडियम की भी खोज की। जो की चिकित्सा विज्ञान और रोगों के उपचार में एक महत्वपूर्ण क्रांतिकारी खोज साबित हुई। 1903 में इस दंपत्ति को रेडियोएक्टिविटी की खोज के लिए भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला। 1911 में उन्हें रसायन विज्ञान के क्षेत्र में रेडियम के शुद्धीकरण (आइसोलेशन ऑफ प्योर रेडियम) के लिए रसायनशास्त्र का नोबेल पुरस्कार भी मिला।

रोज़ा पार्क्स:


रोजा लुईज मक्कॉली पार्क्स अफ्रीकी-अमेरिकी नागरिक अधिकार कार्यकर्त्ता थीं जिन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका की कांग्रेस ने ‘द फर्स्ट लेडी ऑफ सिविल राइट्स’(नागरिक अधिकारों की पहली औरत) और ‘द मदर ऑफ द फ्रीडम मूवमंट’ (आजादी लहर की मां) नामों से पुकारा। रोजा लुईज मक्कॉली का जन्म टस्कागी, अलाबामा पर 4 फरवरी 1913 को हुआ था। 1 दिसंबर 1955 को मोंटगोमेरी, अलाबामा में जब बस में काम से घर वापस आ रही थी और अपनी सीट पर बस में बैठी हुई थी। एक गोरे ने उसको सीट छोड़ने को कहा। रोजा अपनी सीट पर बैठी रही। उसको पुलिस ने पकड़ लिया परन्तु अगले दिन उसको चढ़ा लिया गया। अदालत ने उसपर 5 दिसंबर को जुर्माना कर दिया। इसी दिन को अफ्रीकी-अमरीकी समुदाय ने मिलकर बसों का बॉयकॉट किया।

अन्य प्रमुख नाम:


मार्गरेट थैचर: ब्रिटेन की पहली महिला प्रधानमंत्री, छठा स्थान
एंजेला बर्डेट-काउट्स: इंग्लैंड की सबसे अमीर महिलाओं में शुमार, 7वां स्थान
मैरी वोलस्टोनक्राफ्ट: ब्रिटिश लेखिका व दार्शनिक, 8वां स्थान
फ्लोरेंस नाइटिंगेल: ब्रिटिश नर्स और सामाजिक कार्यकर्ता, 9वां स्थान
मैरी स्टोप्स: ब्रिटिश लेखिका और महिला अधिकारों की हिमायती, 10वां स्थान
डायना: वेल्स की राजकुमारी, 15वां स्थान
अमेलिया इयरहार्ट: पायलट, 16वां स्थान
महारानी विक्टोरिया: ब्रिटेन की महारानी, 17वां स्थान
क्लियोपेट्रा: मिस्र सम्राज्य की आखिरी महारानी, 24वां स्थान
वर्जीनिया वुल्फ: ब्रिटिश उपन्यासकार, 31वां स्थान
फ्रीडा काह्लो: मेक्सिकन कलाकार, 34वां स्थान
कोको शनेल: फ्रांसीसी फैशन डिजायनर, 45वां स्थान
कैथरीन ग्राहम: वाशिंगटन पोस्ट की प्रकाशक, 48वां स्थान
श्रीमाओ भंडारनायके: श्रीलंका की प्रधानमंत्री, 53वां स्थान
जंको ताबेई: जापानी पर्वतारोही, 57वां स्थान
रूथ हैंडलर: बार्बी डॉल बनाने वाली अमेरिकी बिजनेसवुमन, 78वां स्थान

नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें

सबसे लोकप्रिय

अखबार सब्सक्राइब करें