इरफान खान: बेचैन आंखों और शर्मीली मुस्कुराहट वाला बेमिसाल अभिनेता

इरफान खान होते तो आज अपना 54वां जन्मदिन मनाते, लेकिन साल 2020 ने कई फिल्मी हस्तियों के साथ ही उन्हें हमसे छीन लिया। बेचैन आंखों और शर्मीली मुस्कान वाले इस इरफान इतना सहज अभिनय करते थे कि पता ही नहीं चलता था कि असली इरफान कहां है।

फोटो : Getty Images
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इकबाल रिजवी

अब वे फिल्मों मे काम नहीं कर पाएंगे। वे यानी इरफान। सात जनवरी को यह उनका पहला जन्मदिन है जब उन्हें बधाई नहीं दी जा सकती। बस याद किया जा सकता है। साल 2020 ने कई फिल्मी हस्तियों को छीन लिया, लेकिन इरफान की मौत का तो अभी तक यकीन नहीं होता। भारतीय अभिनेताओं की जब जब बात होगी तो इरफान के बिना पूरी नहीं हो पाएगी।

इरफान को याद करें तो उनकी एक छवि उभरती है, सबसे अलग अंदाज, दिल और दिमाग को भेद कर पार निकल जाने वाली बेचैन आंखें और बेहद शर्मीली सी मुस्कुराहट। नाटकों से टीवी धारावाहिकों और फिर फिल्मी पर्दे तक का उनका सफर बेहद दिलचस्प और चुनौती भरा रहा। इरफान का पूरा नाम था साहबज़ादा इरफान अली खान। अपने वतन जयपुर से दिल्ली आए तो साहबज़ादा को जयपुर में छोड़ आए। दिल्ली से मुंबई जाने से पहले ही इरफान अली खान , इरफान खान हो गए। मुंबई में कुछ वक्त बिताने के बाद एहसास होने लगा कि नाम के आगे खान लगाना काफी बोरिंग है। इसलिये मुंबई में सिर्फ इरफान रह गए।

फोटो : Getty Images
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जो चीज़ या विचार पसंद ना आए उसके ज्यादा दिन करीब रहना इरफान की फितरत में नहीं था। अपनी ज़िंदगी में उन्होंने हमेशा पारदर्शिता को प्राथमिकता दी। जो दिल मे रहा वह चेहरे से झलका। कहीं कोई बनावट नहीं, यहां तक की अभिनय में भी नहीं।

शूरु-शुरू में इरफान को धारावाहिकों और फिल्मों में बेहद मामूली से रोल मिले। लेकिन फिल्म 'एक डाक्टर की मौत' के जरिये उन्होंने दर्शकों को उनके बारे में सोचने पर मजबूर किया और इसकी चर्चा की बदौलत उन्हें अंग्रेजी फिल्म 'द वारियर' मिली। यहां से इरफान ने जो स्टार्ट लिया तो फिर रूकने का नाम ही नहीं लिया।

'मक़बूल', 'हासिल' और 'साहब बीवी गैंगस्टर रिटर्न' के खलनायक को कैसे भुलाया जा सकता है। 'नेम सेक' का शरीफ इंसान और 'पान सिंह तोमर' का बाग़ी भी हमेशा याद रहेगा। याद तो 'पीकू', 'कारवां', 'लंच बाक्स' और 'हिंदी मीडियम' का आम आदमी भी रहेगा और 'थैंक्यू', 'क्रेजी 4' और 'इंगलिश मीडियम' का सहज हास्य भी भुलाया नहीं जा सकता।

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'रोग', 'हैदर', 'सात खून माफ', 'लाइफ इन मेट्रो', 'तलवार', 'डी डे', 'घात' जैसी फिल्में हों या फिर 'मदारी', 'आन' और 'बिल्लू' हों , आप इन्हें देखिये और स्तब्ध हो कर सोचते रहिये कि क्या अदाकार थे इरफान।

इरफान के किस-किस किरदार की चर्चा की जाए। एक से बढ़ कर एक और बेमिसाल अभिनय के नमूने उन्होंने पेश किये। उनके अभिनय की खासियत थी। अपने को छिपा कर किरदार में गहराई तक उतर जाना। इरफान ने अलग-अलग किरदारों में आम आदमी को इस तरह जिया कि देख कर गौर करना पड़ता है कि इरफान ने एक्टिंग कब की। उनका किरदार पर्दे पर इतने सहज तरीके से उभरता है कि यह लगता ही नहीं कि एक्टिंग का प्रयास भी किया गया हो।

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इरफान के अभिनय ने सिर्फ एक बार नहीं बल्कि काई बार विदेशी फिल्मकारों को आकर्षित किया। उन्होंने अपनी पहली विदेशी फिल्म द वारियर के अलावा, इनफर्नो, लाइफ ऑफ पाई, दार्जलिंग अनलिमिटेड, ए माइटी हार्ट सहित जितनी विदेशी फिल्में कीं उस संख्या तक अभी कोई भारतीय अभिनेता नहीं पहुंच सका है।

एक इंटरव्यू में इरफान ने कहा था कि “मुझे नहीं पता कि मैं बड़ा एक्टर बना कि नहीं हाँ मैं अभिनय की कोशिश करता रहा हूं...।“ अब इस कोशिश पर हमेशा के लिये विराम लग गया है। 29 अप्रैल 2020 को महज़ 53 साल की उम्र में इरफान का निधन हो गया। मुंबई के अंधेरी इलाके में रहने वाला वो शख्स अब सिर्फ यादों में ज़िंदा रहेगा।

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