यादों में इंदीवरः जनता के लिए गीत लिखने वाले गीतकार, संघर्ष से शुरू हुआ सफर, दिए हजार से ज्यादा गाने

सरल हिंदी-उर्दू में लिखे इंदीवर के गीतों में अपनापन और जीवन की सच्चाई झलकती है। लिहाजा, उन्हें जनता की भाषा में जनता के लिए गीत लिखने वाला गीतकार तक कहा जाने लगा। उनके गीत सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि भावनाओं का अमर संग्रह हैं, जो पीढ़ियों तक साथ रहेंगे।

यादों में इंदीवरः जनता के लिए गीत लिखने वाले गीतकार, संघर्ष से शुरू हुआ सफर, दिए हजार से ज्यादा गाने
i
user

नवजीवन डेस्क

श्यामलाल बाबू राय हिंदी सिनेमा के उन महान गीतकारों में से एक का नाम है, जिनके कमाल के गीत आज भी लोगों के जेहन में जिंदा हैं। उन्होंने अपने शानदार गीतों से लाखों दिलों को छुआ। उन्हें दुनिया इंदीवर के नाम से प्यार और सम्मान देती है। इंदीवर की कलम में मोहब्बत की नाजुकता, दर्द की गहराई के साथ देशभक्ति और मिट्टी की सोंधी महक भी थी। चार दशक के करियर में उन्होंने 300 से ज्यादा फिल्मों के लिए एक हजार से ज्यादा गीतों की रचना की। उनकी खासियत थी उनकी भाषा।

हिंदी सिनेमा के सदाबहार गीतकार इंदीवर की पुण्यतिथि 27 फरवरी को है। इंदीवर का जन्म उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के बरुआ सागर कस्बे में हुआ था। बचपन से ही कविता और गीत लेखन में उनकी रुचि थी। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने आजाद के नाम से कई देशभक्ति गीत लिखे और अंग्रेजों को ललकारने के कारण जेल भी गए। स्वतंत्रता के बाद उन्हें स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा मिलने में दो दशक लग गए।

विवाह के बाद वह मुंबई आए, जहां शुरुआती दिनों में संघर्ष झेला। उनकी खासियत थी कि वह कठिन उर्दू-फारसी शब्दों के बजाय हिंदी और उर्दू के मिश्रित रूप (हिंदुस्तानी) का इस्तेमाल करते थे। उनका मानना था, “कामयाबी के लिए जनता की जुबान तक जाना है। जनता की जुबान मिली-जुली हिंदी है।” इसी सरलता ने उनके गीतों को अमर बना दिया। साल 1946 में फिल्म ‘डबल फेस’ के लिए उन्होंने पहली बार गीत लिखे, लेकिन फिल्म ज्यादा नहीं चली।

इंदीवर को असली पहचान 1951 में फिल्म ‘मल्हार’ से मिली, जहां उनका गीत 'बड़े अरमानों से रखा है बलम तेरी कसम' रोशन के संगीत में सुपरहिट हुआ। साल 1963 में बाबूभाई मिस्त्री की फिल्म ‘पारस मणि’ में उनका गीत 'ओ नाजुक हो, नाज से भी तुम प्यार से भी प्यारी' काफी लोकप्रिय हुआ। इसके बाद उनका सफर रुका नहीं।


एक दिलचस्प किस्सा उनकी फिल्म 'मल्हार' के गीत से जुड़ा है। गीत था- “बड़े अरमानों से रखा है सनम तेरी कसम, प्यार की दुनिया में ये पहला कदम।” इसमें एक लाइन थी- “मेरी नैया को किनारे का इंतजार नहीं, तेरा आंचल हो तो पतवार की दरकार नहीं।” इंदीवर ने इसे 'पतवार की दरकार नहीं' लिखा था, जो हिंदी के हिसाब से सही लगता था। लेकिन संगीतकार कल्याणजी ने उन्हें अलग से बुलाया और समझाया कि 'दरकार' का मतलब 'चाहिए' होता है। इसलिए यहां 'पतवार की दरकार नहीं' की जगह 'पतवार भी दरकार नहीं' होना चाहिए, क्योंकि 'भी' से अर्थ और मजबूत होता है।

इंदीवर ने इसका जवाब देते हुए भरत व्यास के एक गीत का उदाहरण दिया - “जिंदगी भी एक मोटरकार है, उसको भी एक ड्राइवर की दरकार है।” लेकिन कल्याणजी ने अपनी बात पर जोर दिया और समझाया कि भाषा के सही इस्तेमाल से गीत का भाव बेहतर पहुंचता है। इस छोटी सी बातचीत से इंदीवर की भाषा की सरलता और संगीतकारों के साथ उनके रिश्ते और मजबूत होते गए।

इंदीवर की सबसे मजबूत जोड़ी संगीतकार कल्याणजी-आनंदजी के साथ बनी। उन्होंने मनोज कुमार की फिल्म 'उपकार' में 'कसमें वादे प्यार वफा सब बातें हैं, बातों का क्या' और 'मेरे देश की धरती सोना उगले' जैसे गीत लिखे, जिनमें देशभक्ति और सामाजिक संदेश को खूबसूरती से पिरोया। इंदीवर ने 'पूरब और पश्चिम' में 'है प्रीत जहां की रीत सदा' और 'कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे' में देशभक्ति और भावनाओं को खूबसूरती से पिरोया। 'अभी तुमको मेरी जरूरत नहीं' जैसे गीत आज भी सुनने वालों को भावुक कर देते हैं।

राकेश रोशन की फिल्मों में भी इंदीवर ने कमाल किया। ‘कामचोर’, ‘खुदगर्ज’, ‘खून भरी मांग’, ‘काला बाजार’, ‘किशन कन्हैया’, ‘करण अर्जुन', और ‘कोयला’ जैसी फिल्मों के गीतों ने दर्शकों के दिल जीते। उत्तम कुमार और शर्मिला टैगोर की फिल्म ‘अमानुष’ में 'दिल ऐसा किसी ने मेरा तोड़ा' गीत के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला।


इंदीवर सिर्फ हिंदी फिल्मों तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने पॉप सिंगर नाजिया हसन और जोहैब हसन के लिए भी गीत लिखे। नाजिया के 'आप जैसा कोई', 'बूम बूम', और 'चंदन सा बदन' जैसे गीतों ने युवाओं पर गहरा असर छोड़ा। इंदीवर ने ‘दिल ने पुकारा’, ‘सरस्वती चंद्र’, ‘यादगार’, ‘सफर’, ‘सच्चा झूठा’, ‘जॉनी मेरा नाम’, ‘धर्मात्मा’, ‘हेरा फेरी’, ‘डॉन’, ‘कुर्बानी’, ‘कलाकार’ जैसी दर्जनों फिल्मों में अमर गीत दिए। उनके शब्दों में सरलता और गहराई का अनोखा मेल था। 27 फरवरी 1997 को इंदीवर इस दुनिया से चले गए, लेकिन उनके गीत आज भी जिंदा हैं।

सरल हिंदी-उर्दू में लिखे उनके गीतों में अपनापन और जीवन की सच्चाई झलकती है। लिहाजा, उन्हें जनता की भाषा में जनता के लिए गीत लिखने वाले गीतकार तक कहा जाने लगा। इंदीवर जनता की सरल भाषा में गीत लिखने के लिए मशहूर थे। इंदीवर के गीत सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि भावनाओं का अमर संग्रह हैं, जो पीढ़ियों तक लोगों के साथ रहेंगे।

Google न्यूज़नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें

प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia