ललिता पवारः 9 साल की उम्र में फिल्मी दुनिया में दस्तक, फिर बनीं बॉलीवुड की सबसे 'अत्याचारी सास'
ललिता पवार ने फिल्म 'चतुर सुंदरी' में 17 अलग-अलग किरदार निभाए। यह बेहद चुनौतीपूर्ण था। हर किरदार का स्वभाव, अंदाज और भाव अलग-अलग था, कभी गंभीर, कभी हास्यपूर्ण, कभी चालाक और कभी मासूम। दर्शक यह देखकर दंग रह गए कि यह सब एक ही अभिनेत्री ने किया है।

बॉलीवुड में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं, जिनकी एक्टिंग इतनी दमदार होती है कि लोग उन्हें हमेशा याद रखते हैं। उनमें से एक नाम है ललिता पवार का। ललिता पवार के बिना बॉलीवुड की खलनायिका की छवि अधूरी लगती है। आज उनकी पुण्यतिथि पर हम उनके चुनौतीपूर्ण सफर के बारे में बात करेंगे, जिसमें उन्होंने बाल कलाकार से लेकर बॉलीवुड की सबसे अत्याचारी सास बनने तक की यात्रा तय की।
ललिता पवार की एक्टिंग इतनी दमदार होती थी कि उनका किरदार लोगों के जेहन में बस जाता था। छोटे बच्चों से लेकर बड़ों तक, सभी उनके नकारात्मक किरदारों से डरते थे। लेकिन, असल जिंदगी में ललिता एक बेहद मेहनती अभिनेत्री थीं। आज हम उनकी पुण्यतिथि के मौके पर ललिता पवार के चुनौतीपूर्ण सफर के बारे में बात करेंगे।
ललिता पवार का जन्म 18 अप्रैल 1916 को महाराष्ट्र के नासिक जिले में हुआ था। उनका असली नाम अंबा लक्ष्मण राव सगुन था। उनके पिता रेशम व्यापारी थे और मां घर संभालती थीं। बचपन से ही ललिता को एक्टिंग का शौक था, और उनकी प्रतिभा को देखकर उनके माता-पिता ने उन्हें फिल्मों में कदम रखने की अनुमति दी। फिल्मों में आने के बाद वह ललिता पवार के नाम से मशहूर हुईं।
ललिता ने महज 9 साल की उम्र में अपनी पहली फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र' (1928) से करियर की शुरुआत की। उस समय भारत में फिल्में मूक युग की थीं, लेकिन ललिता ने छोटी सी उम्र में अभिनय का जलवा दिखाया। उस समय सिनेमा पूरी तरह से नया था, और एक बच्ची के रूप में कदम रखना आसान नहीं था, लेकिन ललिता ने अपने अभिनय और भाव-भंगिमाओं से सबका ध्यान खींचा। बाल कलाकार के रूप में उन्होंने कई फिल्मों में काम किया, और यही उनकी फिल्मी दुनिया की शुरुआत थी।
समय के साथ ललिता ने बड़ी हीरोइन बनने की ठानी, लेकिन एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसे ने उनकी जिंदगी का रास्ता बदल दिया। 1942 में रिलीज हुई फिल्म 'जंग-ए-आजादी' की शूटिंग के दौरान, एक सीन में को-एक्टर को उन्हें थप्पड़ मारना था। उस एक्टर ने ललिता को इतनी जोर से थप्पड़ मारा कि वह फर्श पर गिर पड़ी, उनकी आंख की नस फट गई और शरीर के एक हिस्से में लकवा मार गया। इसके कारण उन्हें कुछ सालों तक फिल्मों से दूर रहना पड़ा और उनका हीरोइन बनने का सपना अधूरा रह गया।
लेकिन, ललिता ने हार नहीं मानी। उन्होंने खुद को नए रोल्स के लिए ढाला और साइड किरदार और खलनायिका की भूमिकाओं में अपनी पहचान बनाई। उनकी दमदार एक्टिंग के चलते दर्शक उन्हें 'अत्याचारी सास' और 'नकारात्मक महिला' के रूप में पहचानने लगे। खासकर रामानंद सागर की रामायण में मंथरा का किरदार उनके करियर का अहम मोड़ बन गया। मंथरा के किरदार ने उन्हें घर-घर में प्रसिद्ध कर दिया और उनकी खलनायिका की छवि को और मजबूत किया।
समय के साथ ललिता ने मुख्य भूमिकाओं में भी कदम रखा, लेकिन उनकी प्रतिभा केवल मुख्य किरदारों तक सीमित नहीं रही। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि तब आई, जब उन्होंने फिल्म 'चतुर सुंदरी' में 17 अलग-अलग किरदार निभाए। यह बेहद चुनौतीपूर्ण था। हर किरदार का स्वभाव, अंदाज और भाव अलग-अलग था, कभी गंभीर, कभी हास्यपूर्ण, कभी चालाक और कभी मासूम। दर्शक यह देखकर दंग रह गए कि यह सब एक ही अभिनेत्री ने किया है।
ललिता पवार न सिर्फ अभिनय करती थीं, बल्कि हर किरदार में जान फूंक देती थीं। आज भी कोई अभिनेत्री उनके इस रिकॉर्ड को नहीं तोड़ पाई है। इस उपलब्धि के बाद ललिता ने अपनी कला को और भी ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनका नाम खासकर खलनायिका और क्रूर सास के किरदारों के लिए जाना जाता है।
ललिता पवार ने अपने लंबे करियर में लगभग 700 फिल्मों में काम किया, जिनमें हिंदी, मराठी और गुजराती फिल्में शामिल थीं। उन्होंने अभिनय के क्षेत्र में इतनी मेहनत और स्थिरता दिखाई कि उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में सबसे ज्यादा समय तक अभिनय करियर रखने वाली महिला अभिनेता के रूप में दर्ज हुआ। बॉलीवुड की दुनिया में सफलता के बावजूद ललिता का जीवन हमेशा आसान नहीं रहा। मुंह के कैंसर के कारण 24 फरवरी 1998 को पुणे में उनका निधन हो गया। ललिता पवार आज भले दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी फिल्मों, उनके किरदारों और उनके रिकॉर्ड ने उन्हें अमर बना दिया।
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