हिंदी के प्रख्यात साहित्यकार और आलोचक वीरेंद्र यादव का निधन, 'प्रयोजन' पत्रिका के थे संपादक

वीरेंद्र यादव ने जान हर्सी की पुस्तक ‘हिरोशिमा’ का अंग्रेज़ी से हिन्दी में अनुवाद किया। प्रेमचन्द सम्बन्धी बहसों और ‘1857’ के विमर्श पर हस्तक्षेपकारी लेखन के लिए विशेष रूप से चर्चित रहे।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

हिंदी के प्रख्यात समालोचक और लेखक वीरेंद्र यादव का शुक्रवार को हृदय गति रुकने से निधन हो गया। उनका स्वास्थ्य कुछ दिनों से खराब था। उन्होंने इंदिरा नगर में अपने आवास पर अंतिम सांस ली।

वीरेंद्र यादव का जन्म 1950 में जौनपुर जिले में हुआ था। वे कथा आलोचना में बराबर सक्रिय रहे। उनके शिक्षा की बात करें तो वीरेंद्र यादव ने लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीतिशास्त्र में एमए किया था। छात्र जीवन से ही वामपंथी बौद्धिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय हिस्सेदारी शुरू कर दी थी।


वीरेंद्र यादव उत्तर प्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ के लम्बे समय तक सचिव रहे। वे ‘प्रयोजन’ पत्रिका के संपादक भी रहे।

वीरेंद्र यादव ने जान हर्सी की पुस्तक ‘हिरोशिमा’ का अंग्रेज़ी से हिन्दी में अनुवाद किया। प्रेमचन्द सम्बन्धी बहसों और ‘1857’ के विमर्श पर हस्तक्षेपकारी लेखन के लिए विशेष रूप से चर्चित रहे।

उनके कई लेखों का अंग्रेजी और उर्दू में भी अनुवाद प्रकाशित हुआ। 'राग दरबारी' उपन्यास पर केंद्रित विनिबंध इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, दिल्ली के एम.ए. पाठ्यक्रम में शामिल है। आलोचना के क्षेत्र में उन्हें वर्ष 2001 के ‘देवीशंकर अवस्थी सम्मान’ से सम्मानित किया गया था।