यादों में एसपी बालासुब्रमण्यमः एक सुरीली और मखमली आवाज, जो सलमान से कमल हसन तक कई स्टार की बनी पहचान
अपने लंबे करियर में एसपी बालासुब्रमण्यम ने 40 हजार से ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए और चार अलग-अलग भाषाओं में छह नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी जीते। उनके नाम पद्म श्री, पद्म भूषण से लेकर मरणोपरांत पद्म विभूषण तक कई बड़े सम्मान दर्ज हैं।

दिवगंत गायक एसपी बालासुब्रमण्यम की आज पुण्यतिथि है। एसपी बालासुब्रमण्यम ने कई दशकों तक भारतीय सिनेमा के गानों को अलग पहचान दी। उन्होंने सिर्फ हिंदी ही नहीं, बल्कि तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और दूसरी भाषाओं में भी हजारों गाने गाए। उनकी आवाज ने अलग-अलग दौर के कई बड़े कलाकारों को पर्दे पर अपनी पहचान दी। यही वजह है कि उनके काम को देश के बड़े फिल्म और नागरिक सम्मानों से भी नवाजा गया।
कमल हसन और सलमान खान को अलग पहचान दिलाई
पर्दे पर कुछ आवाजें किसी चेहरे की पहचान का हिस्सा बन जाती हैं। एसपी बालासुब्रमण्यम यानी एसपीबी की आवाज भी ऐसी ही थी। यूं तो उन्होंने कई अभिनेताओं के लिए गाने गाए लेकिन कमल हसन और सलमान खान के लिए उनकी आवाज ने दोनों स्टार को सबसे अलग पहचान दिलाई। उन्होंने अपने करियर में हजारों गाने गाए। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि जिस अभिनेता के लिए गाते थे, उसकी स्क्रीन पर्सनैलिटी के हिसाब से अपनी आवाज में अलग रंग ले आते थे।
पांच दशक लंबे करियर में 16 भाषाओं में हजारों गाने
25 सितंबर 2020 को एसपीबी के निधन ने भारतीय संगीत की दुनिया को बड़ा झटका दिया था। एसपी बालासुब्रमण्यम ने करीब पांच दशक लंबे करियर में 16 भाषाओं में हजारों गाना गाया। दक्षिण भारतीय सिनेमा के कई बड़े सितारों के लिए उनकी आवाज बार-बार सुनाई दी। हिंदी दर्शकों के बीच उन्हें खास पहचान सलमान खान की आवाज के तौर पर मिली।
1989 में सूरज बड़जात्या की फिल्म 'मैंने प्यार किया' आई तो सलमान खान एक नए दौर के रोमांटिक हीरो के तौर पर सामने आए। इस फिल्म के गानों में एसपीबी की आवाज ने सलमान की उस रोमांटिक स्क्रीन इमेज को एक अलग पहचान दी। 'दिल दीवाना' जैसे गाने उस दौर में बेहद लोकप्रिय हुए और सलमान की आवाज के साथ एसपीबी की आवाज का यह मेल दर्शकों को खूब पसंद आया।
इसके बाद यह सिलसिला सिर्फ एक फिल्म तक नहीं रुका। 'साजन', 'हम आपके हैं कौन' और 90 के दशक की दूसरी फिल्मों में भी एसपीबी ने सलमान के लिए गाने गाए। 'हम आपके हैं कौन' के 'पहला पहला प्यार है' जैसे गानों ने सलमान की रोमांटिक हीरो वाली छवि को और मजबूत किया।
आवाज में मिठास के साथ इमोशन
एसपीबी की आवाज में एक तरफ मिठास थी, तो दूसरी तरफ एक ऐसा इमोशन भी था, जो पर्दे पर दिख रहे कलाकार की भावनाओं के साथ आसानी से जुड़ जाता था। एसपीबी की पहचान सिर्फ हिंदी सिनेमा और सलमान खान तक सीमित नहीं थी। दक्षिण भारतीय सिनेमा में उनका योगदान कहीं ज्यादा बड़ा था। कमल हासन के लिए उन्होंने कई फिल्मों में अपनी आवाज दी। कमल हासन ने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए और एसपीबी ने उनके किरदारों के हिसाब से अपनी गायकी का अंदाज बदला। 'एक दूजे के लिए' में कमल हासन के किरदार की आवाज का इस्तेमाल भी इसी तरह के एक अलग एक्सपेरिमेंट का हिस्सा था।
रजनीकांत के साथ भी एसपीबी की आवाज का खास रिश्ता रहा। दक्षिण भारत में रजनीकांत की फिल्मों के गानों और उनके स्टारडम के साथ एसपीबी की आवाज लंबे समय तक सुनाई देती रही। उनके लिए गाते समय एसपीबी की आवाज में वह एनर्जी और जोश सुनाई देता था, जो रजनीकांत के बड़े पर्दे वाले अंदाज के साथ फिट बैठता था।
एसपीबी की खासियत यह भी थी कि वह सिर्फ एक ही तरह के गाने तक सीमित नहीं रहे। रोमांटिक गाने हों, दर्द भरे गीत हों या फिर किसी सुपरस्टार के लिए जोश से भरा गाना, उनकी आवाज हर जगह अलग असर छोड़ती थी। वह अलग-अलग म्यूजिक स्टाइल और किरदारों के हिसाब से अपनी आवाज का अंदाज बदलने के लिए जाने जाते थे।
चार अलग-अलग भाषाओं में छह नेशनल फिल्म अवॉर्ड
डेथ एनिवर्सरी पर उनकी उपलब्धियों को याद करें तो अपने करियर में उन्होंने 40 हजार से ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए और चार अलग-अलग भाषाओं में छह नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी जीते।उनके नाम पद्म श्री, पद्म भूषण से लेकर मरणोपरांत पद्म विभूषण तक कई बड़े सम्मान दर्ज हैं।उनका पहला नेशनल अवॉर्ड 1979 की तेलुगु फिल्म 'शंकराभरणम' के लिए आया। इसके बाद 1981 में हिंदी फिल्म 'एक दूजे के लिए' के गाने 'तेरे मेरे बीच में' के लिए उन्हें बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का नेशनल अवॉर्ड मिला। यही वह दौर था जब हिंदी सिनेमा में भी उनकी आवाज की पहुंच तेजी से बढ़ रही थी।
इसके बाद बालासुब्रमण्यम ने तेलुगु सिनेमा में अपनी पकड़ और मजबूत की। 1983 में फिल्म 'सागर संगमम' और 1988 में 'रुद्रवीणा' के लिए उन्हें फिर नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। ये सम्मान इस बात के सबूत थे कि उनकी आवाज सिर्फ एक तरह के गानों तक सीमित नहीं थी।
उनके नेशनल अवॉर्ड का सिलसिला यहीं नहीं रुका। 1995 में कन्नड़ फिल्म 'संगीत सागर गानयोगी पंचाक्षर गवई' के लिए उन्हें एक बार फिर बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का नेशनल अवॉर्ड मिला। इसके अगले ही साल यानी 1996 में तमिल फिल्म 'मिनसारा कनवु' के गाने 'थंगा थमराई' के लिए उन्होंने अपना छठा नेशनल फिल्म अवॉर्ड जीता। इस तरह करीब दो दशक के दौरान उन्होंने तेलुगु, हिंदी, कन्नड़ और तमिल फिल्मों के गानों के लिए यह सम्मान हासिल किया।
पद्म श्री, पद्म भीषण और पद्म विभूषण से भी सम्मानित
बालासुब्रमण्यम के सम्मान सिर्फ नेशनल फिल्म अवॉर्ड तक सीमित नहीं रहे। भारत सरकार ने उन्हें साल 2001 में पद्म श्री से सम्मानित किया। इसके दस साल बाद 2011 में उन्हें पद्म भूषण दिया गया। इसके बाद 2021 में, उनके निधन के बाद, उन्हें मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
इसके अलावा बालासुब्रमण्यम को आंध्र प्रदेश के नंदी अवॉर्ड्स से भी कई बार सम्मानित किया गया। उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक, उन्होंने अलग-अलग कैटेगरी में 25 नंदी अवॉर्ड जीते। उन्हें तमिलनाडु सरकार का कलैमामणि अवॉर्ड भी मिला और 2008 में कर्नाटक राज्योत्सव अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उनके नाम कई मानद डॉक्टरेट और दूसरे सम्मान भी दर्ज हैं।
बालासुब्रमण्यम ने पांच दशक से ज्यादा लंबे करियर में 16 भाषाओं में गाने गाए और 40 हजार से ज्यादा गानों को रिकॉर्ड भी किया। उन्होंने प्लेबैक सिंगिंग के अलावा एक्टिंग, म्यूजिक डायरेक्शन, डबिंग और फिल्म प्रोडक्शन में भी काम किया। 25 सितंबर 2020 को बालासुब्रमण्यम का निधन हो गया।
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