हम हैं कामयाब-13: अनुभव और दूरदृष्टि के बल पर कार्पेट की दुनिया में सफल हुआ ‘एम.के.आर इंटरनेशनल’

अब्दुल माबूद ने ‘एम.के.आर. इंटरनेशनल’ की शुरुआत 4 कर्मचारियों के साथ की थी। 2 वर्षों में कर्मचारियों की संख्या बढ़कर एक दर्जन हो गई और 5 वर्षों के बाद यह 200 के पार पहुंच चुकी है।

‘एम.के.आर. इंटरनेशनल’ के संस्थापक अब्दुल माबूद
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क्या आपको शहज़ादा हुसैन याद हैं? वही शहज़ादा हुसैन, जिनका उल्लेख ‘अलिफ़ लैला’ अर्थात ‘हज़ार दास्तानों’ में से एक दास्तान ‘तीन शहज़ादे और शहज़ादी नूरुन्नहार’ (परी बानो और शहज़ादा अहमद की कथा) में मिलता है। शहज़ादा हुसैन ने एक ऐसा जादुई क़ालीन खरीदा था, जिस पर बैठकर कोई भी व्यक्ति पलक झपकते ही अपनी इच्छित जगह पर पहुंच सकता था। जादुई क़ालीन की यह कथा तो केवल कल्पना पर आधारित है, लेकिन क़ालीन यानी कार्पेट से जुड़ी एक वास्तविक कहानी आज हम आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं।

हम हैं कामयाब-13: अनुभव और दूरदृष्टि के बल पर कार्पेट की दुनिया में सफल हुआ ‘एम.के.आर इंटरनेशनल’

यह बात 1990 के दशक के पूर्वार्ध की है, जब एक बच्चा अपने और अपने चचेरे भाई-बहनों के साथ खेलने के लिए क़ालीन बनाया करता था। इस काम में उसे अत्यंत आनंद का अनुभव होता था। यह खेल कब एक सपने का रूप ले बैठा, इसका उसे पता ही नहीं चला। सपना था सुंदर और आकर्षक क़ालीन (कार्पेट) तैयार करना तथा उन्हें विदेशों में भेजकर अपने पैतृक नगर भदोही का नाम रोशन करना। आज वही बच्चा एक अनुभवी और कुशल क़ालीन निर्माता बन चुका है। उनका नाम है अब्दुल माबूद। उन्होंने वर्ष 2021-22 में एम.के.आर. इंटरनेशनल नामक कंपनी की स्थापना की, जिसने बहुत कम समय में सफलता की नई कहानी लिख दी। इस कंपनी की विशेषता यह है कि स्थापना के बाद से अब तक इसे कभी भी पतन का सामना नहीं करना पड़ा, बल्कि यह निरंतर तीव्र गति से प्रगति करती चली जा रही है। इस सफलता के पीछे अब्दुल माबूद का लगभग ढाई दशक का अनुभव है।


यह उल्लेखनीय है कि भदोही पूरी दुनिया में हाथ से बने क़ालीनों के लिए प्रसिद्ध है। इस नगर को ‘कार्पेट सिटी ऑफ इंडिया’ भी कहा जाता है। अर्थात अब्दुल माबूद ने बचपन से ही सुंदर हस्तनिर्मित क़ालीनों को बनते देखा और फिर भाई-बहनों के साथ खेल-खेल में क़ालीन बनाते-बनाते अपने भविष्य की योजना तैयार कर ली। वे बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें विदेश घूमने का बहुत शौक था। बाद में जब क़ालीन निर्माण में रुचि उत्पन्न हुई, तो ‘शौक’ और ‘रुचि’ के इस संगम ने उन्हें ऐसा मार्ग दिखाया, जिस पर चलकर वे अपने सपने को साकार कर सकते थे।

हम हैं कामयाब-13: अनुभव और दूरदृष्टि के बल पर कार्पेट की दुनिया में सफल हुआ ‘एम.के.आर इंटरनेशनल’

वर्ष 1997 में इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के तुरंत बाद अब्दुल माबूद ने अपने सपने को पूरा करने की दिशा में पहला कदम बढ़ाया। वे बताते हैं कि “मैंने 1998 में एक कंपनी से जुड़कर क़ालीन निर्माण की कला सीखनी शुरू की। अनुभवी क़ालीन निर्माताओं का साथ और कठिन परिश्रम ने मुझे कम समय में ही कुशल बना दिया, लेकिन अपनी कंपनी स्थापित करने के लिए क़ालीन उद्योग के प्रत्येक क्षेत्र की जानकारी होना आवश्यक था। यही कारण है कि 2020 तक विभिन्न कंपनियों में कार्य करते हुए अनुभव प्राप्त किए और कच्चे माल के आयात से लेकर तैयार उत्पाद को बाज़ार तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया की बारीकियों को समझा।” वे यह भी बताते हैं कि उनका उद्देश्य प्रारंभ से ही क़ालीनों का निर्यात करना था, इसलिए पहले से ही ऐसे संपर्क स्थापित किए जिससे कंपनी शुरू होने के बाद किसी प्रकार की कठिनाई न हो। अब्दुल माबूद की यही दूरदृष्टि थी, जिसके परिणामस्वरूप पांच वर्षों में कंपनी को किसी बड़े संकट का सामना नहीं करना पड़ा। आरंभ में एक अच्छी टीम तैयार करने के दौरान कुछ समस्याएं अवश्य आईं, लेकिन समय के साथ सब कुछ आसान होता गया।

हम हैं कामयाब-13: अनुभव और दूरदृष्टि के बल पर कार्पेट की दुनिया में सफल हुआ ‘एम.के.आर इंटरनेशनल’

अब्दुल माबूद ने ‘एम.के.आर. इंटरनेशनल’ की शुरुआत केवल 4 कर्मचारियों के साथ की थी। 2 वर्षों में कर्मचारियों की संख्या बढ़कर एक दर्जन हो गई और 5 वर्षों के बाद यह 200 के पार पहुंच चुकी है। इससे सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि अपने सपने को साकार करने के लिए उन्होंने कितनी मेहनत और योजनाबद्ध ढंग से कार्य किया होगा। यदि कभी कठिन समय आया और वे मानसिक रूप से परेशान हुए, तो उनके परिवार ने उनका मनोबल बढ़ाया। विशेष रूप से उनकी पत्नी सुमैया ने पूरे घर की जिम्मेदारी संभाली और अपने तीनों बच्चों के उत्तम पालन-पोषण पर पूरा ध्यान दिया। अर्थात कहीं न कहीं ‘एम.के.आर. इंटरनेशनल’ की सफलता में श्रीमती अब्दुल माबूद का भी महत्वपूर्ण योगदान है।

हम हैं कामयाब-13: अनुभव और दूरदृष्टि के बल पर कार्पेट की दुनिया में सफल हुआ ‘एम.के.आर इंटरनेशनल’

फिलहाल यह कंपनी क़ालीन निर्माण के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाले टेक्सटाइल उत्पादों के लिए भी लोकप्रिय हो चुकी है। कंपनी की वेबसाइट पर देखा जा सकता है कि यहां क़ालीनों की अनेक श्रेणियां उपलब्ध हैं, जिनमें प्रिंटेड, ब्रेडेड (चोटीदार), टेबल टफ्टेड (गुच्छेदार), हाथ से बुने हुए, हाथ से टफ्ट किए हुए (हैंड टफ्टेड) तथा हाथ से गांठदार शैली (हैंड नॉटेड) के बने हुए क़ालीन शामिल हैं। इसी प्रकार टेक्सटाइल उत्पादों में तकिए, बेल्ट, एप्रन, सीट, हैंडबैग आदि उपलब्ध हैं, जो आकर्षक होने के साथ-साथ टिकाऊ भी हैं।

हम हैं कामयाब-13: अनुभव और दूरदृष्टि के बल पर कार्पेट की दुनिया में सफल हुआ ‘एम.के.आर इंटरनेशनल’

अब्दुल माबूद का कहना है कि विदेशों में कंपनी ने बहुत कम समय में अपनी अलग पहचान बना ली, क्योंकि हमारी कोशिश हमेशा पारंपरिक कला और पुराने शिल्प को आधुनिक डिज़ाइन के साथ जोड़कर उसे नई आकर्षकता प्रदान करने की रही है। विशेष रूप से विभिन्न देशों की संस्कृति और परंपराओं को ध्यान में रखते हुए उनके लिए विशेष डिज़ाइन वाले क़ालीन और अन्य उत्पाद तैयार करना चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। इसके लिए शोध के साथ-साथ बुद्धिमत्ता की भी आवश्यकता होती है। वे कहते हैं “सबसे अच्छी बात यह है कि हमारी एक सशक्त टीम तैयार हो चुकी है, और कंपनी की जो सफलता आप देख रहे हैं, वह इसी टीम की मेहनत का परिणाम है।”

वर्तमान में अब्दुल माबूद की कंपनी ‘एम.के.आर. इंटरनेशनल’ जर्मनी, इटली, फ्रांस, अमेरिका, जापान सहित एक दर्जन देशों में अपना व्यवसाय सफलतापूर्वक संचालित कर रही है। अब उनका लक्ष्य खाड़ी देशों में प्रवेश करने का है, जो एक चुनौतीपूर्ण चरण है। सामान्यतः क़ालीनों का प्रमुख बाज़ार ठंडे देशों में होता है, इसलिए गर्म देशों को ध्यान में रखते हुए अब्दुल माबूद कुछ अलग प्रकार के उत्पाद तैयार करने की योजना बना रहे हैं। उनका कहना है कि खाड़ी देशों में वॉल हैंगिंग, परदे और पायदान जैसे उत्पादों को प्रस्तुत करना अधिक उपयुक्त हो सकता है, लेकिन फिलहाल इस दिशा में शोध कार्य जारी है। एक बार शोध पूरा हो जाने के बाद नए देशों में प्रवेश करना आसान हो जाएगा। उन्हें आशा है कि अगले 2 वर्षों में वे इस सपने को भी पूरा कर लेंगे। यह बहुत कठिन भी नहीं है, क्योंकि अब उनके बड़े बेटे 21 वर्षीय अहमद अब्दुल माबूद भी कंपनी से जुड़ चुके हैं। अर्थात अब ‘अनुभव’ और ‘आधुनिक तकनीक’ का संगम हो चुका है। यह संगम भले ही हवा में उड़ने वाला ‘जादुई क़ालीन’ न बना सके, लेकिन विदेशी ग्राहकों को ‘मोहित कर देने वाला क़ालीन’ बनाने की क्षमता अवश्य रखता है।

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