शख्सियत

क्या हुआ था जब गुस्से से कांपते देवानंद ने सुरैया को मार दिया था थप्पड़ !

सुरैया और देव का मिलन तो नहीं हो पाया लेकिन सुरैया ने देवानन्द से बेपनाह मोहब्बत की थी। इस मोहब्बत को अपने मन में हमेशा जिंदा रखने के लिए सुरैया ने जीवन भर शादी नहीं की।

फोटो : सोशल मीडिया

इकबाल रिजवी

9 साल की उम्र में उन्होंने फिल्मों के लिये गीत गाना शुरू कर दिया। 14 साल की उम्र में वे अभिनेत्री बन गयी और 17 की होते होते उनका क्रेज़ पूरे देश में सिर चढ़ कर बोलने लगा। ये किस्सा है अभिनेत्री सुरैया का। उनके चाहने वालों की उनके घर के सामने ऐसी भीड़ जमा होती थी की व्यवस्था बनाए रखने के लिये पुलिस को खास कदम उठाने पड़ते थे। सब कुछ ठीक चल रहा था कि अचानक सुरैया के जीवन में देवानन्द ने प्रवेश किया। सुरैया और देवानन्द की पहली फ़िल्म “विद्या” थी। विद्या की शूटिंग के दौरान नदी में तैरती नाव पर देवानन्द और सुरैया पर एक गीत फ़िल्माया जाना था। देव और सुरैया नाव में बैठे। लांग शॉट लिया जाना था इसलिये यूनिट के लोग सुरैया और देव की नाव से दूर दूसरी नावों में बैठे थे। पता नहीं क्या हुया कि अचानक देव और सुरैया की नाव पलट गयी। नदी अधिक गहरी नहीं थी लेकिन सुरैया को बिल्कुल तैरना नहीं आता था। देवानन्द ने अपनी परवाह किये बिना बुरी तरह घबराई और डरी हई सुरैया को बचा लिया।

बिल्कुल फिल्मी कहानी की तरह सुरैया के मन में नाव की दुर्घटना के बाद देवानन्द के लिये ख़ास जगह बन गयी। लेकिन सुरैया और उनके पूरे परिवार पर कड़ा नियंत्रण रखने वाली नानी हर समय सुरैया के साथ रहती थीं इसलिये देव और सुरैया के बीच चिट्ठियों के ज़रिये प्यार फलने फूलने लगा। चिट्ठियों को एक दूसरे के पास पहुंचाने का काम दोनो के दोस्त, गुरूदत्त, कामनी कौशल और दुर्गा खोटे करते थे।

सुरैया और देवानन्द के दोस्त चाहते थे कि दोनो की शादी हो जाए। एक दिन बातों बातों में देव और सुरैया की शादी की योजनातैयार हो गयी। उन दिनो वे दोनो फ़िल्म “ जीत “ की शूटिंग में व्यस्त थे। इस फ़िल्म में देव और सुरैया के विवाह का दृश्य था। योजना थी की इस दृश्य को असलियत में बदल दिया जाए। पंडित को बुला कर असली शादी कर दी जाए। सेट पर मौजूद नानी इसे फ़िल्म के दृश्य का हिस्सा ही समझती रहेंगी। यूनिट के कई कलाकार और तकनीशियन भी इस योजना में शामिल थे। सारी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं मगर किसी को पता नहीं था कि सुरैया से एक तरफ़ा प्रेम करने वाला एक शख़्स जो फ़िल्म की यूनिट में सहायक के रूप में काम कर रहा था देवानन्द से ईर्ष्या रखता था। शादी की योजना उस शख़्स को भी पता थी। शूटिंग शुरू होने से पहले उसने पूरी योजना नानी को बता दी। फिर क्या था नानी तो सेट पर फट पड़ीं। उनके रौद्र रूप को देख कर किसी की हिम्मत नहीं पड़ी कि उन्हें शांत करा सकें। नानी सबके सामने सुरैया को सेट से घसीटते हुए घर ले गयीं। ग़ुस्से, अपमान और सदमें में डूबी सुरैया को नानी ने समझाना शुरू किया कि वे इस समय देश की सबसे बड़ी स्टार हैं उनकी फ़िल्मो को पसंद करने वाले करोड़ों दर्शक हैं ऐसे में वो किसी हिंदू से शादी करेंगी तो देश में दंगे हो सकते हैं। देवानन्द की जान को ख़तरा हो जाएगा। सुरैया ने इस दिशा में तो कभी सोचा ही नहीं था।

उधर देवानन्द भी इस घटना के बाद बहुत परेशान रहने लगे। जब उनकी बेचैनी और घुटन चरम पर पहुंच गयी तो एक दिन वे सीधे सुरैया के घर जा पहुंचे। उन्हें देखते ही सुरैया के अभिनेता मामा जहूर ने उनका कालर पकड़ के घर से बाहर धक्का दे दिया। देवानन्द को अब भी भरोसा था कि वे सुरैया को शादी के लिये राज़ी कर लेंगे। जब फ़िल्म नीली की शूटिंग शुरू हुई तो एक दिन देवानन्द सुरैया की नानी की आंखों से बच कर सुरैया के सामने जा खड़े हुए। उन्होंने शादी को लेकर सुरैया से उनका आख़री फ़ैसला पूछा। सुरैया को देव से बहुत प्यार था वे उनके साथ ही जीवन बिताना चाहती थीं। लेकिन घर से भागने की हिम्मत नहीं जुटा पायीं। बेतहाशा धड़कते दिल पर क़ाबू पाते हुए उन्होंने देव से बस इतना ही कहा कि वे उनसे शादी नहीं कर सकती।

ग़ुस्से और दुख से कांपते हुए देव ने सुरैया के चेहरे पर भरपूर तमाचा मारा। यही वो लम्हा था जिसने सुरैया की पूरी ज़िंदगी बदल दी। सुरैया पर हाथ उठाने के बाद देवानन्द शर्मिंदगी से भर उठे। उन्होंने सिर झुका कर सुरैया से अपने किये की माफ़ी मांगी और वहां से चले गए। उस समय सुरैया की उम्र महज़ 20 साल थी। सुरैया और देव का मिलन तो नहीं हो पाया लेकिन सुरैया ने देवानन्द से बेपनाह मोहब्बत की थी। इस मोहब्बत को अपने मन में हमेशा जिंदा रखने के लिए सुरैया ने जीवन भर शादी नहीं की। 15 जून1929 को जन्मी सुरैया तमाम उम्र तन्हा रहीं। 31 जनवरी 2004 को उनका निधन हो गया।

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