‘बीटल्स’ की याद में उत्तराखंड में खुलेगा संग्रहालय

प्रसिद्ध रॉक बैंड ‘बीटल्स’ के सदस्य जॉन लेनन, पॉल मैक्कार्टनी, जॉर्ज हैरिसन और रिंगो स्टार अपने भारत दौरे के दौरान आध्यात्मिक गुरू महेश योगी के ऋषिकेश स्थित आश्रम में ठहरे थे।

बीटल्स के सदस्य/ फोटो: Twitter
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एस एम ए काजमी

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उत्तराखंड का पर्यटन विभाग मशहूर संगीत बैंड ‘बीटल्स’ की याद में एक संग्रहालय बनाने जा रहा है। इस संग्रहालय को आध्यात्मिक गुरू महेश योगी के ऋषिकेश स्थित ‘चौरासी कुटिया’ आश्रम में खोला जाएगा। मशहूर रॉक बैंड बीटल्स के सदस्य अपनी ऋषिकेश यात्रा के दौरान इसी आश्रम में ठहरे थे। उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने मंगलवार को इस संबंध में घोषणा की।

उत्तराखंड पर्यटन विभाग की यह योजना शायद इंग्लैंड के लिवरपुल स्थित ‘दि बीटल्स स्टोरी’ से प्रेरित है। दो मंजिला इमारत में स्थित ‘बीटल्स स्टोरी’ वहां का एक अहम पर्यटन केंद्र है। ‘बीटल्स स्टोरी’ अगले वर्ष बीटल्स की भारत और ऋषिकेश यात्रा की 50वीं वर्षगांठ का जश्न मनाने जा रहा है। बीटल्स के प्रशंसक और पत्रकार राजू गुसियान ने बताया कि अगले वर्ष के अपने कार्यक्रम को अंतिम रुप देने के लिए ‘बीटल्स स्टोरी’ का एक दल कुछ दिनों पहले ऋषिकेश आया था।

उत्तराखंड वन विभाग द्वारा राजाजी नेशनल पार्क स्थित ऋषिकेश आश्रम को वर्ष 2015 में पर्यटकों के लिए खोला गया था। अब आश्रम का दर्शन करने आने वाले पर्यटकों से वन विभाग शुल्क वसूल कर रहा है। इसके लिए प्रत्येक विदेशी पर्यटक को 600 रुपए और भारतीयों को 150 रुपए प्रति व्यक्ति का शुल्क देना होता है। बीटल्स के सदस्यों ने इसी आश्रम में अपने मशहूर एलबम एबे रोड, लेट इट बी और द व्हाइट एल्बम के गानों को संगीतबद्ध किया था।

आध्यात्मिक गुरू महर्षी महेश योगी से योग और ध्यान का प्रशिक्षण लेने के लिए रॉक बैंड बीटल्स के सदस्य 1968 में यहां आए थे। महेश योगी को मिली लीज के साल 2000 में खत्म होने के बाद एक दशक से भी ज्यादा समय तक यह बेकार पड़ा रहा। अब इस आश्रम को इको टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। बीटल्स प्रशंसकों के लिए भी यह प्रमुख आकर्षण होगा। लोगों को इस जगह के महत्व को बताने के लिए यहां की दीवारों पर बीटल्स और महेश योगी के चित्र बनाए गए हैं।

साल 1961 में महेश योगी को ऋषिकेष के पास 15 एकड़ वन भूमि का आवंटन किया गया था। भारतीय आध्यात्मिक गुरू महेश योगी अचानक से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उस समय प्रसिद्ध हो गए, जब फरवरी 1968 में बीटल्स बैंड के चारों सितारे ध्यान के प्रशिक्षण के लिए भारत आए थे। बैंड के सदस्य तीन महीने के कोर्स के लिए ऋषिकेश आए थे, लेकिन किसी ने इसे पूरा नहीं किया। सबसे पहले वापस लौटने वाले रिंगो थे जो 10 दिन में ही वापस लौट गए। दूसरे सदस्य पॉल पांच सप्ताह तक रुके थे, जबकि जॉन और जॉर्ज आठ सप्ताह बाद वापस लौट गए थे।

(लेखक उत्तराखंड के देहरादून में वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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Published: 11 Aug 2017, 7:45 PM