ममता बनर्जी को बड़ा झटका, करीबी मदन मित्रा बागी खेमे में शामिल, एक दिन पहले ED ने परिवार को भेजा था समन

ममता ने कहा कि जांच का सामना कर रहे नेता सिद्धांतों की बजाय ‘राजनीतिक सुविधा’ को चुन रहे हैं उन्होंने कहा कि जिनकी ‘सेटिंग’ है, वे बीजेपी की वॉशिंग मशीन में जा रहे हैं। जो विधायक और सांसद ‘सेटिंग कंपनी’ में शामिल हुए हैं, उन्होंने डर की वजह से ऐसा किया है।

ममता बनर्जी को बड़ा झटका, करीबी मदन मित्रा बागी खेमे में शामिल, एक दिन पहले ED ने परिवार को भेजा था समन
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पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी को बुधवार को एक और बड़ा झटका लगा। टीएमसी के वरिष्ठ नेता और कमारहाटी से विधायक मदन मित्रा ने अभिषेक बनर्जी पर कई आरोप लगाते हुए ममता बनर्जी की पार्टी में सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। इसके तुरंत बाद वह विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी के बागी गुट में शामिल हो गए। खास बात ये है कि एक दिन पहले ईडी ने नगर निगम भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में मदन मित्रा की पत्नी और दो बेटों को समन जारी किया था।

मदन मित्रा के आरोपों पर ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में ‘गद्दारों की ओर से’ लोगों से माफी मांगी और कहा कि न तो उन्होंने और न ही उनके परिवार ने कभी राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए समझौता किया। ममता बनर्जी ने कड़े तेवर दिखाते हुए बीजेपी पर केंद्रीय जांच एजेंसियों और पुलिस का इस्तेमाल कर नेताओं से दल बदलवाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो वह तृणमूल कांग्रेस को फिर से शुरू से खड़ा करेंगी।

पूर्व मुख्यमंत्री ने तृणमूल में फूट के बाद अभिषेक बनर्जी का जोरदार तरीके से बचाव करते हुए कहा कि उनके भतीजे को पार्टी पर हमला करने का ‘बहाना’ बना दिया गया है। ममता ने कहा, “अभिषेक बनर्जी को एक बहाना बना दिया गया है। उनके परिवार के सदस्यों को तलब किया गया। अगर वह चाहते तो राहत पा सकते थे, लेकिन वह मैदान छोड़कर नहीं भागे। जिस तरह उन्होंने लड़ाई जारी रखी, उससे उनकी सारी कमियां माफ हो गईं।”


ममता बनर्जी ने मदन मित्रा के आरोप को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि मदन मित्रा के पार्टी छोड़ने की वजह मंगलवार को उनकी पत्नी और दो बेटों को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से भेजा गया समन था। उन्होंने कहा, “जो व्यक्ति (मदन मित्रा) आज गया, उसने कल ही हमें बताया था कि उसे और उसके परिवार को समन मिला है। तभी हमें समझ में आ गया था कि वह पाला बदल सकता है। उसके इस फैसले से अभिषेक का कोई लेना-देना नहीं है।”

ममता बनर्जी ने बीजेपी का नाम लिए बिना आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्ष को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया, “बीजेपी, तृणमूल कांग्रेस को तोड़ने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है। सत्तारूढ़ दल डर और धमकी के जरिए नगर निकायों के बोर्डों को भंग कर रही है।” पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि जांच का सामना कर रहे नेता अपने सिद्धांतों की बजाय ‘राजनीतिक सुविधा’ को चुन रहे हैं और बीजेपी की ‘वॉशिंग मशीन’ में जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “जिनकी ‘सेटिंग’ है, वे बीजेपी की ‘वॉशिंग मशीन’ में जा रहे हैं। जो विधायक और सांसद ‘सेटिंग कंपनी’ में शामिल हुए हैं, उन्होंने डर की वजह से ऐसा किया है।”

ममता बनर्जी दल बदलने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए भावुक भी नजर आईं। उन्होंने नेताओं के जाने के बावजूद मजबूती का संदेश देते हुए तृणमूल कांग्रेस के इतिहास के सबसे कठिन दौर में से एक का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “मुझे कोई नहीं रोक सकता। अगर मैं 2004 के बाद फिर से शुरुआत कर सकती थी, तो 2026 के बाद भी दोबारा शुरुआत कर सकती हूं।” उन्होंने यह भी कहा कि वह कभी भी जनता से जुड़े आंदोलनों से पीछे नहीं हटीं।

इससे पहले दिन में मदन मित्रा खुद गाड़ी चलाकर विधानसभा पहुंचे। वहां से वह ऋतब्रत बनर्जी के दफ्तर गए। दूसरे गुट में औपचारिक रूप से शामिल होने के बाद उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा देने की घोषणा की। उन्होंने पार्टी के कमजोर होने के लिए तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदार ठहराते हुए उन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अभिषेक बनर्जी की वजह से पार्टी की यह स्थिति हुई है और उन्हीं के कारण पार्टी बर्बाद हो गई।


मदन मित्रा ने कहा, "मैं टीएमसी के साथ था और आज भी टीएमसी में ही हूं। मैंने सिर्फ एक गुट से दूसरे गुट में कदम रखा है। पार्टी किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि सभी की है।" उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी की मौजूदा स्थिति अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व का नतीजा है। गुट बदलने के बावजूद मदन मित्रा ने ममता बनर्जी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी लंबे समय से पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ खड़ी रही हैं। साथ ही, उन्होंने पुष्टि की कि वह 21 जुलाई को कोलकाता में विरोधी गुट के 'शहीद दिवस' कार्यक्रम में शामिल होंगे।

उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट में उनके पास जो भी संगठनात्मक जिम्मेदारियां थीं, उनसे उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने दो पंक्तियों की एक कविता सुनाई और कहा, "मैं सिर्फ तृणमूल का विधायक नहीं हूं, मैं पूरे बंगाल का विधायक हूं। मैं विधानसभा का सदस्य हूं। मैंने तृणमूल के लिए सब कुछ छोड़ दिया। मेरे पास जो भी पद थे, उन सभी से मैंने इस्तीफा दे दिया।"

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिम बंगाल के कथित नगर निकाय भर्ती घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में मदन मित्रा की पत्नी और उनके बेटों को समन भेजा था। समन मिलने के बाद मदन मित्रा ने मध्य कोलकाता में दूसरे गुट के विधायक संदीपन साहा के घर जाकर पूर्व तृणमूल विधायक स्वर्ण कमल साहा से मुलाकात की। इसके बाद उनके गुट बदलने की अटकलें तेज हो गईं।

विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी में हुई टूट के बीच मदन मित्रा का यह कदम ममता बनर्जी के गुट के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है। इससे पहले 60 से ज्यादा विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दूसरे गुट में शामिल हो चुके थे, जबकि ममता बनर्जी के साथ अब बहुत कम विधायक बचे हैं।


मदन मित्रा को ममता बनर्जी के भरोसेमंद और वफादार नेताओं में से एक माना जाता था। उन्हें संगठन में कई अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। इनमें दमदम-बैरकपुर संगठनात्मक जिले के अध्यक्ष, पार्टी की हॉकर विंग के प्रमुख और विधानसभा में पार्टी के मुख्य संयोजक जैसे पद शामिल थे। ममता बनर्जी के गुट में अहम पदों पर रह चुके कई बड़े नेता, जिनमें फरहाद हकीम, चंद्रिमा भट्टाचार्य और ज्योति प्रिया मल्लिक का नाम शामिल है, पहले ही दूसरे गुट में शामिल हो चुके हैं। मदन मित्रा के गुट बदलने के साथ ही इस सूची में एक और बड़ा नाम जुड़ गया है।

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