बिहारः एनडीए में सीएम ‘फेस’ को लेकर अंदरखाने हलचल, बीजेपी की लीपापोती से नीतीश कुमार को कितनी राहत?

बिहार एनडीए के एक घटक बीजेपी के अंदर से राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की बात उठना साफ बताता है कि गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। ऐसे में इस बात की प्रबल संभावना है कि चुनाव करीब आते-आते बिहारवासियों को एक बार फिर प्रदेश में राजनीतिक उथलपुथल देखने को मिले।

फोटोः सोशल मीडिया
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आईएएनएस

बिहार में विधानसभा चुनाव होने में अभी एक साल का समय शेष है, लेकिन अब सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में भी मुख्यमंत्री के चेहरे (फेस) को लेकर झगड़ा बढ़ गया है और अब यह गठबंधन से बाहर भी आ गया है। इसी बीच बुधवार को बीजेपी नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने एक ट्वीट कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एनडीए का कप्तान बता दिया। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, "नीतीश कुमार बिहार एनडीए के कप्तान हैं। जब हमारे कैप्टन चौके और छक्के लगा रहे हैं और विरोधियों को हरा रहे हैं तो बदलाव का सवाल ही कहां उठता है।"

इस ट्वीट के आने के बाद इस कयास को और बल मिल गया कि मुख्यमंत्री पद को लेकर बीजेपी और जेडीयू में घमासान काफी तेज हो गया है। हालांकि इसी बीच, बिहार में एनडीए के एक अन्य घटक लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के अध्यक्ष रामविलास पासवान ने भी नीतीश के पक्ष में बयान दिया है। पासवान ने बुधवार को पटना में पत्रकारों से कहा कि बिहार में नीतीश कुमार ही एनडीए के सर्वमान्य नेता हैं, और इसमें कोई विवाद नहीं है।

हालांकि, सुशील मोदी और रामविलास पासवान से उलट बीजेपी नेता और विधान पार्षद संजय पासवान ने दो दिन पहले नीतीश कुमार को नसीहत देते हुए कहा था कि उन्हें अब मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर केंद्र की राजनीति करनी चाहिए। उन्होंने कहा था, "नीतीश कुमार के काम पर पूरा भरोसा है, लेकिन बिहार में उन्हें 15 साल हो गए। इस बार उप मुख्यमंत्री को पूरा मौका मिलना चाहिए। नीतीश कुमार को सेकंड लाइन के नेताओं को मौका देना चाहिए। 15 साल का समय बहुत लंबा होता है।"

संजय पासवान के इसी बयान के बाद नीतीश कुमार को लेकर बीजेपी दो खेमों में बंटी नजर आ रही है। बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सी पी ठाकुर ने भी पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय पासवान के बयान का समर्थन करते हुए बिहार में बीजेपी को एक बार मौका देने की तरफदारी की है। मंगलवार को सीपी ठाकुर ने कहा कि "बीजेपी पहले की तरह कमजोर नहीं, बल्कि देश में अभी सबसे मजबूत पार्टी है। बीजेपी के पास सबसे ताकतवर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।" उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के नाम को आगे रखना चाहिए, इससे पार्टी को फायदा होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव में बीजेपी के अकेले लड़ने पर विचार नहीं हुआ है।

हालांकि, बीजेपी के नेता बिहार में एनडीए सरकार के ठीक ढंग से चलने का दावा जरूर कर रहे हैं, परंतु वे भी मुख्यमंत्री के उम्मीदवार को लेकर चुप्पी साध ले रहे हैं। बीजेपी प्रवक्ता शहनवाज हुसैन कहते हैं कि “बिहार में बीजेपी, जेडीयू और एलजेपी की सरकार ठीक ढंग से चल रही है। लोकसभा चुनाव में भी एनडीए को लोगों का समर्थन मिला। बिहार की जनता को भी इन सभी दलों का साथ रहना पसंद है।”

उधर जेडीयू के नेता हालांकि बीजेपी नेताओं के इन बयानों को सही नहीं मानते। जेडीयू महासचिव के सी त्यागी ने कहा, "गठबंधन के लिए ऐसे बयान कहीं से सही नहीं हैं। जेडीयू के किसी भी नेता ने बीजेपी के शीर्ष नेताओं के खिलाफ कभी कोई टिप्पणी नहीं की है। नीतीश कुमार को बिहार की जनता ने नेतृत्व सौंपा है। ऐसे बयानों से नेताओं को बचना चाहिए।"

ऐसे में गठबंधन के अंदर नेतृत्व परिवर्तन की बात उठना इस बात का साफ संकेत है कि बिहार एनडीए में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। बीजेपी में ही इस मुद्दे को लेकर दो तरह की राय सामने आई है। ऐसे में इस बात की प्रबल संभावना है कि चुनाव नजदीक आते-आते हो सकता है कि बिहारवासियों को एक बार फिर प्रदेश में राजनीतिक उथलपुथल देखने को मिले।

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