यूपी चुनाव में विकास के मुद्दे को परे धकेलने में जुटी बीजेपी, अब्बा जान, तालिबान को मुद्दा बनाने की कोशिश

बीजेपी स्पष्ट रूप से तालिबान के जरिये राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे और अब्बा जान के जरिये मुस्लिम तुष्टीकरण पर गैर-बीजेपी दलों को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रही है। स्पष्ट तौर पर योगी आदित्यनाथ को एक मजबूत हिंदुत्व ब्रांड के रूप में उभारने की कोशिश है।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

अगले साल की शुरूआत में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की उलटी गिनती शुरू हो गई है। इसी के साथ ही राज्य में शासन और विकास जैसे मुद्दे पीछे हट रहे हैं और 'अब्बा जान' और तालिबान जैसे मुद्दे उत्तर प्रदेश में नए चुनावी मुद्दे के रूप में उभर रहे हैं। राज्य के सीएम योगी आदित्यनाथ ने रविवार को एक सभा में कहा कि 2017 से पहले 'अब्बा जान' कहने वाले लोग गरीबों के लिए भेजा गया मुफ्त राशन खा जाते थे और भ्रष्टाचार में लिप्त होकर गरीबों के लिए सरकारी नौकरियों पर कब्जा कर लेते थे।

इस भाषण के बाद सीएम योगी अदित्यनाथ के खिलाफ विपक्ष ने जमकर हमला बोला। उन्होंने इस भाषण पर आपत्ति जताते हुए कहा कि 'अब्बा जान' शब्द पिता के प्रेम के तौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है। इसको लेकर बीजेपी राजनीति कर रही है और एक खास समुदाय के खिलाफ भावनाएं भड़काने की कोशिश कर रही है।

हालांकि, मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में किसी विशेष पार्टी का नाम नहीं लिया था, लेकिन यह स्पष्ट था कि वह समाजवादी पार्टी का जिक्र कर रहे थे क्योंकि उन्होंने पहले एक टीवी कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के लिए 'अब्बा जान' शब्द का उपयोग किया था। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अखिलेश यादव जैसे नेता पहले अपने मुस्लिम वोट-बैंक को ठेस पहुंचाने के डर से मंदिरों में नहीं जाते थे। इसके बाद एसपी सांसद शफीकुर्रहमान बर्क की तालिबान को लेकर की गई टिप्पणी को तोड़ने-मरोड़ने के बाद तालिबान को कथा में जोड़ा गया।

वहीं इस मामले पर तमाम राजनीतिक दल बीजेपी पर हमला बोल रहे हैं। कांग्रेस नेता कह रहे हैं कि बीजेपी नेता अपने हिंदू वोट बैंक को मजबूत करने के लिए उनकी टिप्पणी का उल्लेख कर रहे हैं। हालांकि, इन तमाम बातों का नतीजा यह है कि विकास जैसे प्रमुख मुद्दे को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है और लगभग सभी राजनीतिक नेता अब अपनी हिंदू साख स्थापित करने के लिए बीजेपी नेताओं के उल्लास के आगे झुक रहे हैं।


इसी कड़ी में, बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के सांसद सतीश मिश्रा ने सबसे पहले अयोध्या का दौरा किया और दावा किया कि मायावती के शासन में भव्य मंदिर बनकर तैयार होगा। हाल ही में जब मायावती ने लखनऊ में अपनी पार्टी की बैठक को संबोधित किया, तो उनका जय श्री राम के नारों से स्वागत किया गया- बीएसपी में अब तक इस तरह की कोई बात सुनने में नहीं आई है।

वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) के नेता संजय सिंह और दिल्ली की डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने सोमवार को अयोध्या के विभिन्न मंदिरों में पूजा-अर्चना की, जबकि प्रियंका गांधी ने अपनी यूपी की हालिया यात्रा के दौरान रायबरेली में एक हनुमान मंदिर का दौरा किया। इसके अलावा भी अन्य विपक्षी दल लक्षित जातियों का सम्मेलन कर रहे हैं।

बीजेपी स्पष्ट रूप से तालिबान के जरिये राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे का इस्तेमाल करते हुए और अब्बा जान के जरिये मुस्लिम तुष्टीकरण पर गैर-बीजेपी दलों को कटघरे में खड़ा कर रही है। पार्टी द्वारा संचालित सोशल मीडिया हैंडल और व्हाट्सएप समूहों पर साझा सामग्री से पता चलता है कि पिछले दो हफ्तों में लगभग एक चौथाई पोस्ट तालिबान से संबंधित थे, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक मजबूत व्यक्तित्व के रूप में संदर्भित कर रहे थे और मुख्यमंत्री योगी को प्रोजेक्ट कर रहे थे। इन ताकतों के खिलाफ योगी आदित्यनाथ को एक मजबूत हिंदुत्व ब्रांड के रूप में उभारने की कोशिश है।

(आईएएनएस के इनपुट के साथ)

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