औंधे मुंह गिरे ज़हरीली बोली बोलकर ‘गद्दारों’ को गोली मारने वाले बीजेपी के बयानवीर

दिल्ली चुनाव के नतीजे आ गए हैं, जिसमे आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर बड़ी जीत दर्ज की है। खास बात ये है कि इन नतीजों में उन बीजेपी नेताओं की बड़ी हार हुई है, जिन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान जमकर विवादित और ज़हरीले उन्मादी बयान दिए।

फोटोः सोशल मीडिया
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आसिफ एस खान

दिल्ली के लोगों ने आम आदमी पार्टी को एक बार फिर बड़ा जनादेश दिया है। पूरी तरह से चुनाव नतीजे आने के बाद राजनीतिक विश्लेषक इस पूरे चुनाव के अलग-अलग मायने निकालेंगे। लेकिन चुनाव नतीजों पर पहली नजर से ही स्पष्ट है कि दिल्ली की जनता ने नकारात्मक राजनीति को नकारकर बता दिया कि वह ऐसी राजनीति पसंद नहीं करती है। आज के नतीजों में बीजेपी के उन नेताओं की बड़ी हार हुई है, जो चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से एक से बढ़कर एक विवादित और उन्मादी बयान दे रहे थे।

इस फेहरिस्त में सबसे प्रमुख नाम बीजेपी नेता कपिल मिश्रा का है, जिन्हें मॉडल टाउन सीट से बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। दिल्ली चुनाव में ‘गद्दारों को गोली मारो’ का नारा देने वाले कपिल मिश्रा को आप के निवर्तमान विधायक अखिलेशपति त्रिपाठी ने हराया है। कपिल मिश्रा ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ एक मार्च का नेतृत्व किया था, जिसमें उन्होंने नारा दिया था, देश के गद्दारों को, गोली मारो....को’। यही नहीं, चुनाव से ठीक पहले उन्होंने दिल्ली चुनाव को ‘हिंदुस्तान बनाम पाकिस्तान का मुकाबला’ करार देते हुए कहा था कि इस चुनाव में पाकिस्तान की हार होगी। फिलहाल उनकी हार हो गई है।

हालांकि अभी भी इतनी करारी हार के बाद कपिल मिश्रा की भाषा नहीं बदली है। दिल्ली में बीजेपी की बुरी गत होने और मॉडल टाउन से खुद चुनाव हारने पर उन्होंने एक ट्वीट कर कहा, ‘‘मैंने सीएए का विरोध करने वालों या शाहीन बाग प्रदर्शन के बारे में जो भी कहा, उस पर आज भी कायम हूं। डंके की चोट पर कहता हूं कि चुनाव परिणाम आज भले प्रतिकूल आया है, लेकिन कल अनुकूल भी आएगा। हम और मेहनत करेंगे। लेकिन इस नतीजे से सीएए या शाहीन बाग पर सोच बदल लेंगे, यह गलतफहमी मत पालिए।’’

इस कड़ी में दूसरा नाम आता है पश्चिमी दिल्ली लोकसभा सीट से सांसद परवेश वर्मा का। चुनाव प्रचार के दौरान सीएम अरविंद केजरीवाल को ‘आतंकवादी’ करार देने और सीएए के खिलाफ चल रहे शाहीन बाग प्रदर्शन को लगातार विवादित बयानों से चुनावी मुद्दा बना देने वाले परवेश वर्मा खुद तो चुनाव नहीं लड़ रहे थे, लेकिन उनके चाचा आजाद सिंह मुंडका से बीजेपी उम्मीदवार थे। लेकिन परवेश वर्मा की लगातार विवादित बयानबाजी के बावजूद उनके चाचा को मुंडका के लोगों ने खारिज कर दिया। आप के धर्मपाल लाकड़ा ने उन्हें हराया है। मुंडका सीट प्रवेश वर्मा की लोकसभा सीट पश्चिमी दिल्ली के तहत आती है।

खास बात तो ये है कि परवेश वर्मा की पश्चिमी दिल्ली लोकसभा सीट के तहत आने वाली सभी दस विधानसभा सीटों पर बीजेपी उम्मीदवारों की हार हुई है। इस संसदीय क्षेत्र में दिल्ली विधानसभा की मादीपुर, जनकपुरी, द्वारका, राजौरी गार्डन, विकासपुरी, हरिनगर, उत्तम नगर, नजफगढ़, मटियाला और तिलक नगर सीटें आती हैं। इन सभी दस सीटों पर आम आदमी पार्टी की जीत हुई है।

अब इस कड़ी में तीसरा नाम है दिल्ली बीजेपी के सबसे विवादित नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा का। सोशल मीडिया पर अक्सर विवादित और सांप्रदायिक पोस्ट और कमेंट करने वाले बग्गा को हरिनगर विधानसभा के लोगों ने बुरी तरह खारिज कर दिया है। बीजेपी के बग्गा को आप की राजकुमारी ढिल्लों ने पराजित किया है। तेजिंदर बग्गा सोशल मीडिया पर बीजेपी के सबसे उग्र योद्धाओं में से एक हैं।

इनके अलावा इस कड़ी में चौथा नाम केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का है। अनुराग ठाकुर वैसे तो केंद्र में वित्त राज्य मंत्री हैं और दिल्ली में कहीं से चुनाव भी नहीं लड़ रहे थे, लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान बतौर देश का वित्त मंत्री होने के नाते उन्होंने दिल्ली के युवाओं के सामने उन्होंने एक अनोखा ही रोजगार प्लान रखा था। उन्होंने चुनावी सभा के मंच से केंद्रीय मंत्री के पद पर रहते हुए भड़काउ भाषण देते हुए गद्दारों को गोली मारने के उकसावे वाले नारे लगवाए। उन्होंने हाथ उठाकर मंच से नारा दिया कि- देश के गद्दारों को, इसके जवाब में उनके समर्थकों ने कहा- गोली मारो .... को। लेकिन मजे की बात ये है कि जिस रिठाला विधानसभा क्षेत्र में ठाकुर ने ये नारे लगवाए, उस सीट से भी बीजेपी उम्मीदवार की हार हुई है।

अब इन उदाहरणों से साफ है कि दिल्ली की जनता ने नफरत, उन्माद और ध्रुवीकरण की राजनीति को पूरी तरह से नकार दिया है और केजरीवाल ने जो राष्ट्रवादी हिंदुत्व की चादर में कथित विकास का जो मॉडल उनके सामने रखा, वही उन्हें मंजूर है। दिल्ली के नतीजों ने एक बात और स्पष्ट कर दी है कि सकारात्मक राजनीति की अभी भी जगह है, हां ये जरूर है कि उसके लिए प्रचार तंत्र भी जरूरी है।

Published: 11 Feb 2020, 10:24 PM
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