बेदाग छवि को खराब करने के लिए मोदी सरकार के इशारे पर काम कर रही है सीबीआईः चिदंबरम

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा है कि उनके खिलाफ तत्काल आपराधिक कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण है और राजनीतिक प्रतिशोध के तहत है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई उनके खिलाफ मोदी सरकार के इशारे पर काम कर रही है।

फोटोः सोशल मीडिया
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आईएएनएस

पूर्व वित्तमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने बुधवार को आरोप लगाया कि आईएनएक्स मीडिया मामला राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है और जांच एजेंसी केंद्र के इशारे पर काम कर रही है। चिदंबरम ने दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष दायर अपने आवेदनों में कहा, "इस मामले में तत्काल आपराधिक कार्रवाई एक दुर्भावनापूर्ण मामला है, जो कि राजनीतिक प्रतिशोध से पैदा हुआ है। जांच एजेंसी केंद्र के इशारे पर काम कर रही है, जो याचिकाकर्ता की बेदाग छवि को धूमिल करना चाहती है।"

पी चिदंबरम ने बुधवार को हाईकोर्ट के समक्ष दो आवेदन पेश किए, जिनमें से एक जमानत के लिए था। इसके अलावा दूसरा आवेदन 5 सितंबर को निचली अदालत द्वारा पारित उस आदेश के खिलाफ है, जिसमें उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। चिदंबरम ने अपनी दलीलों में आगे कहा कि वह सरकार के राजनीतिक विरोधी हैं और यह राजनीतिक प्रतिशोध का एक स्पष्ट मामला है।

पिछले गुरुवार को अदालत में पेश किए जाने के बाद विशेष सीबीआई न्यायाधीश अजय कुमार कुहर ने पूर्व केंद्रीय मंत्री चिदंबरम को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। अदालत ने चिदंबरम द्वारा दायर आवेदनों को भी स्वीकार कर लिया था। इनमें ‘जेड’ श्रेणी की सुरक्षा के साथ एक खाट, बाथरूम के साथ एक अलग सेल और दवाओं की अनुमति मांगी गई थी। उन्होंने जेल में पश्चिमी शैली के शौचालय (इंग्लिश टॉयलेट) की भी मांग की थी।

चिदंबरम ने आईएनएक्स मीडिया से संबंधित प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामले में समर्पण करने की अनुमति के लिए अदालत में एक और आवेदन दिया था। अदालत ने इस पर वित्तीय निगरानी एजेंसी ईडी को नोटिस जारी किया था और मामले की अगली सुनवाई 12 सितंबर को तय कर दी थी।

सुनवाई के दौरान चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल ने कई दलीलें पेश की। उन्होंने सबूतों के साथ छेड़छाड़ या गवाहों पर दबाव बनाने जैसी संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया। इसके बाद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील देते हुए कहा कि जहां तक ईडी मामले का संबंध है, सुप्रीम कोर्ट ने सबूतों से छेड़छाड़ की संभावना को स्वीकार किया है। सबूतों के साथ छेड़छाड़ की एक मजबूत संभावना है।

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