झारखंड चुनाव में कसौटी पर जेडीयू-बीजेपी की दोस्ती, सीधा असर बिहार में गठबंधन पर पड़ेगा

जेडीयू और बीजेपी की बरसों की दोस्ती झारखंड में इसी साल होने वाले चुनाव में कसौटी पर है। जेडीयू अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर पहले ही यह संकेत दे चुका है कि झारखंड विधानसभा चुनाव के रण में वह बीजेपी के साथ नहीं, बल्कि आमने-सामने होगा।

फोटोः gettyimages
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मनोज पाठक, IANS

नीतीश कुमार की अगुवाई वाली जनता दल (युनाइटेड) भले बिहार में बीजेपी की मदद से सरकार चला रही है, मगर दोनों दलों की बरसों की दोस्ती झारखंड में इसी साल होने वाले चुनाव में कसौटी पर है। जेडीयू अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर पहले ही यह संकेत दे चुका है कि झारखंड विधानसभा चुनाव के रण में वह बीजेपी के साथ नहीं, बल्कि आमने-सामने होगा।

ऐसा नहीं है कि बिहार में कई साल से गठबंधन चला रही बीजेपी और जेडीयू की दोस्ती सहज है। यहां भी कई मुद्दों पर दोनो दलों के नेता अक्सर आमने-सामने आते रहे हैं। हालांकि, झारखंड विधानसभा चुनाव में जेडीयू नेता जिस तरह से बीजेपी सरकार पर आक्रामक हैं, उससे यह तय है कि आने वाले दिनों में इस दोस्ती की डगर आसान नहीं है।

झारखंड विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे जेडीयू के नेता कभी बीजेपी की रघुवर दास सरकार को भ्रष्ट कह रहे हैं, तो कभी शराबबंदी को लेकर बीजेपी सरकार की घेराबंदी कर रहे हैं। वैसे, सबसे दिलचस्प बात ये है कि लगातार आक्रमणों के बावजूद बीजेपी ने अब तक जेडीयू के खिलाफ हमला नहीं बोला है। हालांकि जेडीयू के ये तेवर बीजेपी नेताओं को कितने दिन ऐसे रोक पाते हैं, यह देखने वाली बात होगी।

बीजेपी के प्रवक्ता प्रवीण प्रभाकर इस बारे में कहते हैं कि जेडीयू झारखंड में बीजेपी से अलग है। उन्होंने कहा कि वह क्या बोल रही है और क्या कर रही है, यह उसका मामला है। उन्होंने कहा कि बिहार में जेडीयू भले ही बीजेपी के साथ है, इसका मतलब यह नहीं कि उसके साथ हर राज्य में गठबंधन हो। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि अभी चुनाव में देर है, जो भी दल बीजेपी के साथ गठबंधन करना चाहेगा, उसके बारे में बीजेपी नेतृत्व फैसला करेगा।

इधर, जेडीयू के नेता झारखंड में अपनी पहचान बनाने को लेकर बेताब हैं। झारखंड में कई स्थानों पर कार्यकर्ता सम्मेलन कर कार्यकर्ताओं में जोश भर चुके जेडीयू महासचिव आर.सी.पी. सिंह कहते हैं कि झारखंड में सबसे अधिक दिन तक बीजेपी की सरकार रही है, लेकिन राज्य में बिजली, पानी, सड़क, रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाएं चौपट हैं। यहां की जनता विकल्प की तलाश में है और हम उनके लिए विकल्प के रूप में यहां आए हैं।

जेडीयू को झारखंड में नई धार देने को लेकर बीजेपी पर आक्रामक जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष सालखन मुर्मू ने तल्ख अंदाज में कहा कि जेडीयू यहां बीजेपी पर निर्भर नहीं है। उन्होंने नीतीश कुमार और रघुवर दास की तुलना करते हुए कहा कि नीतीश जहां बिहार में शराबबंदी कर लोगों को शराबमुक्त बनाने पर जोर दे रहे हैं, वहीं झारखंड की सरकार जगह-जगह शराब की दुकान खुलवाने पर आमादा है। उन्होंने कहा कि झारखंड में विकास के नाम पर लूट मची हुई है, भ्रष्टाचार की गंगा बह रही है।

वैसे, जेडीयू के सूत्रों का कहना है कि इस विधानसभा चुनाव में उसे भले ही एक भी सीट न मिले, लेकिन भविष्य के चुनावों की राह यहां से खुल जाएगी। सूत्रों का दावा है कि जेडीयू झारखंड चुनाव में झारखंड विकास मोर्चा, वामपंथी दलों और बीजेपी विरोधी छोटे दलों से समझौता कर सकती है। इधर बीजेपी के नेता जेडीयू के इन कदमों से असहज जरूर हैं। बीजेपी के एक नेता का कहना है, "अभी चुनाव में देर है। वक्त का इंतजार कीजिए, जेडीयू की कितनी क्षमता है, सामने आ जाएगी।"

प्रदेश की राजनीति के जानकार भी स्पष्ट कहते हैं कि जेडीयू की झारखंड में ऐसी कोई हैसियत नहीं है कि उनके बयानों को बीजेपी तरजीह दे। झारखंड की राजनीति पर गहरी नजर रखने वाले और झारखंड के वरिष्ठ पत्रकार विजय पाठक ने कहा कि जेडीयू झारखंड में नीतीश कुमार के नाम पर अपनी जमीन तैयार कर रहा है। झारखंड में जेडीयू की स्थिति ऐसी नहीं है कि बीजेपी को नुकसान पहुंचा सके, इस कारण बीजेपी नेता, जेडीयू के नेताओं के बयानों को भी तरजीह नहीं दे रहे। हालांकि, पाठक भी मानते हैं कि दोनों दलों की बिहार में 'दोस्ती' है, लेकिन झारखंड में नहीं है। ऐसे में आगे क्या होगा, यह आने वाला समय बताएगा।

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