आई-पैक विवादः ममता ने कोलकाता में ED के खिलाफ मार्च निकाला, कहा- केंद्र में बीजेपी सरकार 2029 तक नहीं रहेगी
ममता बनर्जी ने कहा कि बीजेपी ने निर्वाचन आयोग की मदद से महाराष्ट्र में जनादेश की चोरी कर जीत दर्ज की और बंगाल में भी वह इसे दोहराना चाहती है। ममता ने कहा कि अगर कोई मुझे राजनीतिक रूप से निशाना बनाने की कोशिश करेगा, तो इससे मुझे और सियासी ताकत मिलेगी।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पैक के कार्यालय और इसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से की गई छापेमारी के खिलाफ शुक्रवार को कोलकाता में निकाले गए मार्च का नेतृत्व किया। इस दौरान ममता ने ईडी की कार्रवाई को लेकर बीजेपी पर जमकर निशाना साधा।
मार्च के बाद रैली में ममता बनर्जी ने कहा कि अगर कोई मुझे राजनीतिक रूप से निशाना बनाने की कोशिश करेगा, तो इससे मुझे और सियासी ताकत मिलेगी। ममता ने कहा कि बीजेपी ने निर्वाचन आयोग की मदद से महाराष्ट्र में जनादेश की चोरी कर जीत दर्ज की और बंगाल में भी वह इसे दोहराना चाहती है। उन्होंने कहा कि कल आई-पैक पर छापे के दौरान, उन्होंने मेरी पार्टी की रणनीति संबंधी जानकारी चुराने की कोशिश की, हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं। दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने हमारे सांसदों पर हमला किया, लेकिन बंगाल में बीजेपी का भव्य स्वागत हुआ।
ममता बनर्जी ने ईडी के छापे के दौरान अपनी उपस्थिति को लेकर कहा कि मैंने जो कल किया उसमें कुछ भी गलत नहीं, उन्होंने मेरी पार्टी की संवेदनशील जानकारी चुराने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अगर कोई मेरी हत्या करने आए तो क्या मुझे आत्मरक्षा का अधिकार नहीं है। ममता ने कहा कि दिल्ली में बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं को कोयला घोटाले की राशि मिली, जरूरत पड़ने पर मैं जनता के सामने सबूत पेश करुंगी। हम 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करेंगे, लेकिन केंद्र में बीजेपी सरकार 2029 तक नहीं रहेगी।
इससे पहले ममता बनर्जी ने 8बी बस स्टैंड क्षेत्र से मार्च शुरू किया और हाजरा मोड़ की तरफ बढ़ीं। इस दौरान, उनकी सरकार के वरिष्ठ मंत्री और पार्टी के शीर्ष पदाधिकारी, सांसद, विधायक और कार्यकर्ता उनके साथ मौजूद थे। इस विरोध मार्च को राज्य के आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सड़कों पर टीएमसी के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और उस पर विधानसभा चुनाव से पहले “राजनीतिक प्रतिशोध के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग” करने का आरोप लगाया। मार्च के दौरान बांग्ला संस्कृति की झलक भी देखने को मिली।
तृणमूल कार्यकर्ताओं ने प्रतुल मुखोपाध्याय का लोकप्रिय गाना ‘अमी बांग्ला गान गाई’ गाया, जबकि महिलाओं ने शंख बजाए, जिससे विरोध मार्च राजनीतिक अवज्ञा से सराबोर एक सड़क उत्सव के रूप में नजर आया। मार्च के दौरान ममता तेज कदमों से आगे बढ़ रही थीं। इस दौरान, वह बीच-बीच में रुक-रुककर सड़क के दोनों किनारों पर जुटे लोगों का हाथ हिलाकर अभिवादन कर रही थीं। कई लोग मार्च के दृश्यों को स्मार्टफोन पर रिकॉर्ड करते दिखाई दे रहे थे।
मार्च में अभिनेता और लोकसभा सदस्य देव और सोहम चक्रवर्ती के साथ-साथ बांग्ला फिल्म एवं टेलीविजन उद्योग के अन्य जाने-माने चेहरे भी शामिल हुए, जो अब पार्टी प्रतिनिधि के रूप में भी काम कर रहे हैं। उनकी मौजूदगी ने लोगों को उत्साह से भर दिया और वे तालियां तथा सीटियां बजाते नजर आए।
तृणमूल नेताओं ने कहा कि यह मार्च पार्टी के राज्यव्यापी आंदोलन का हिस्सा है, जो इस बात का संकेत है कि ममता राजनीतिक लड़ाई को सम्मेलन कक्षों और अदालतों से बाहर निकालकर वापस सड़कों पर ले जाना चाहती हैं। यह विरोध मार्च गुरुवार को जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास पर ईडी की ओर से ली गई तलाशी के दौरान ममता के नाटकीय रूप से वहां पहुंचने के एक दिन बाद निकाला जा रहा है। ईडी की कार्रवाई के बाद केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव बढ़ गया है।
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