क्या कुणाल घोष भी छोड़ेंगे ममता का साथ? बागी गुट के स्वतंत्रता दिवस समारोह में हुए शामिल, अटकलें तेज

कुणाल घोष की बागी गुट के कार्यक्रम में उपस्थिति ने संकटग्रस्त टीएमसी के भीतर राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलों को और बढ़ा दिया है, क्योंकि प्रतिद्वंद्वी गुट पार्टी संगठन पर अपना दावा पेश करने में जोरशोर से लगा हुआ है।

क्या कुणाल घोष भी छोड़ेंगे ममता का साथ? बागी गुट के स्वतंत्रता दिवस समारोह में हुए शामिल, अटकलें तेज
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ममता बनर्जी के करीबी और तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष ने शनिवार को ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के स्वतंत्रता दिवस समारोह में पहुंच कर सबकों चौंका दिया। इसके बाद ममती की पार्टी में एक और बगावत की अटकलें शुरू हो गई हैं। हालांकि घोष ने साफ किया कि उनका वहां पहुंचना महज संयोग था। उन्होंने कहा कि उनके दौरे का कोई राजनीतिक मकसद नहीं था। इसके बावजूद उनके बागी गुट के कार्यक्रमों में शामिल होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

अचानक बागी गुट के समारोह में पहुंचे कुणाल घोष

तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष ने शनिवार को पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देशानुसार सबसे पहले कोलकाता के टॉपसिया स्थित पार्टी मुख्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। यहां तक तो सब ठीक था। लेकिन इसके बाद वो अचानक मेट्रोपॉलिटन बाईपास के पास ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले पार्टी के बागी गुट के कार्यालय पहुंच गए और वहां उन्होंने पहले से फहराए गए राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी और फिर स्वतंत्रता सेनानियों को पुष्पांजलि अर्पित की।


कुणाल घोष ने अटकलों को खारिज किया

हालांकि, कुणाल घोष ने प्रतिद्वंद्वी खेमे में अपनी उपस्थिति को लेकर लगाई जा रही अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी भागीदारी आकस्मिक थी। दूसरे कार्यक्रम स्थल पर अपनी उपस्थिति स्पष्ट करते हुए घोष ने कहा कि मैं महानगर भवन के पास वाली सड़क से लौट रहा था। उन्होंने कहा कि मैंने अपनी पार्टी के नाम पर झंडे फहराते देखे और कई जाने-माने लोग मौजूद थे। मैं गाड़ी से उतरा और कार्यक्रम में शामिल हो गया। यह मेरे बेलेघाटा विधानसभा क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस का कार्यालय है, इसलिए इसमें अटकलबाजी की कोई बात नहीं है।

बागी गुट के सदस्य भी आश्चर्यचकित रह गए

बिना किसी पूर्व सूचना के उनके अचानक प्रकट होने से स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में शामिल 'विद्रोही लेकिन बहुसंख्यक' गुट के सदस्य भी आश्चर्यचकित रह गए। पश्चिम बंगाल की पूर्व वित्त राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने घोष के स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने के फैसले का स्वागत किया। भट्टाचार्य ने कहा कि हम लोकतंत्र में विश्वास करते हैं। अगर कोई राहगीर भी आकर हमारे साथ शामिल होना चाहता, तो हम उसका स्वागत करते। कुणाल वहां से गुजर रहे थे। वे आए और पुष्पांजलि अर्पित की। यह कोई असामान्य बात नहीं है।


टीएमसी के भीतर नए समीकरणों को लेकर अटकलें तेज

हालांकि, घोष की दोनों कार्यक्रमों में उपस्थिति ने संकटग्रस्त टीएमसी के भीतर राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलों को और बढ़ा दिया है, क्योंकि प्रतिद्वंद्वी गुट पार्टी संगठन पर अपना दावा पेश करने में लगे हुए हैं। ऐसे में पार्टी में जारी अंदरूनी बगावत के बीच उनकी मौजूदगी ने नए राजनीतिक सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

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