'रोजगार देना BJP सरकार के बस की बात नहीं', राहुल गांधी ने आंकड़ों के जरिए पीएम मोदी पर साधा निशाना

कांग्रेस नेता राहुल गांधी अक्सर बेरोजगारी और महंगाई जैसे आम लोगों के मुद्दों को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधते रहते हैं। राहुल गांधी ने गुरुवार को एक बार फिर से सरकारी आंकड़ों का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार को घेरा।

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रवि प्रकाश

कांग्रेस नेता राहुल गांधी अक्सर बेरोजगारी और महंगाई जैसे आम लोगों के मुद्दों को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधते रहते हैं। राहुल गांधी ने गुरुवार को एक बार फिर से सरकारी आंकड़ों का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार को घेरा। राहुल ने कहा कि बीते 8 सालों में 22 करोड़ युवा नौकरी के लिए कतार मे लगे। लेकिन सिर्फ 7.22 लाख लोगों को ही नौकरी मिली। उन्होंने पीएम मोदी पर तंज सकते हुए कहा कि रोजगार के मुद्दे पर सवाल पूछने पर राजा को गुस्सा आता है। राहुल ने कहा कि रोजगार देना बीजेपी सरकार के बस की बात नहीं है।

राहुल ने ट्वीट कर कहा, “22 करोड़ युवा, 8 सालों में सरकारी नौकरियों के लिए कतार में लगे, नौकरी मिली 7.22 लाख को, यानी 1000 में से सिर्फ 3 को। बेरोजगारी पर सवाल पूछने पर राजा को गुस्सा आता है। सच तो ये है- रोजगार देना इनके बस की बात नहीं। युवा देश का ‘संपत्ति’ हैं, बीजेपी उन्हें ‘देनदारी' दिखा रही है।”

बता दें कि मोदी सरकार ने संसद में लिखित बयान में बताया है कि बीते 8 सालों में केंद्र की नौकरी के लिए 22 करोड़ से ज़्यादा आवेदन आए, जिसमें से मात्र 7 लाख 22 हज़ार लोगों की नौकरी मिली। मतलब 1000 आवेदकों में से सिर्फ 3 लोग ही नौकरी पा सके।

बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने भी बेरोजगारी के मुद्दे पर अपनी सरकार से सवाल किए हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “ससंद में सरकार द्वारा दिए गए यह आंकड़े बेरोजगारी का आलम बयां कर रहे हैं। विगत 8 वर्षों में 22 करोड़ युवाओं ने केंद्रीय विभागों में नौकरी के लिए आवेदन दिया जिसमें से मात्र 7 लाख को रोजगार मिल सका है। जब देश में लगभग एक करोड़ स्वीकृत पद खाली हैं, तब इस स्थिति का जिम्मेदार कौन है?”

साल 2014 में देश में हुए आम चुनावों में बीजेपी ने हर साल दो करोड़ युवाओं को रोजगार देना का वादा किया था। समय बीतने के साथ बीजेपी के वादे छलावा साबित हुए। 2014 के बाद बेरोजगारी से जुड़े आंकड़ों ने सत्तारूढ़ बीजेपी के दावों की कलई खोलकर रख दी। अब डेढ़ साल में 10 लाख नौकरी देने का वादा किया गया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पीएम मोदी द्वारा किया गया ये वादा पूरा हो पाएगा?

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