अमेरिका के लिए चीन की जो कंपनियां खतरनाक हैं, उन्हीं को डाटा बेचता है फेसबुक 

फेसबुक के संस्थापक मार्क जकरबर्ग डाटा विवाद में कई बार माफी मांग चुके हैं. गलती बता कर मौका देने को कह चुके हैं. लेकिन डाटा का भूत है कि पीछा ही नहीं छोड़ रहा. अब चीनी कंपनियों के साथ डाटा मामले में फेसबुक फंस गया है.

चीन की कंपनियों को फेसबुक देता डाटा
चीन की कंपनियों को फेसबुक देता डाटा
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DW

सोशल मीडिया साइट फेसबुक का डाटा विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. अब नया मामला फेसबुक और चीनी कंपनियों के डाटा एक्सिस से जुड़ा है. इस मामले में फेसबुक ने माना है कि वह चीन की कई हैंडसेट निर्माता कंपनियां मसलन हुवावेई, लेनोवो, ओप्पो और टीसीएल के साथ डाटा साझा करता रहा है. दरअसल ये वही कंपनियां हैं जिन्हें अमेरिकी खुफिया एजेंसियां राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानती हैं.

अपनी एक रिपोर्ट में न्यूयॉर्क टाइम्स ने दावा किया था कि फेसबुक ने हैंडसेट डिवाइस बनाने वाली कई कंपनियों को डाटा एक्सिस की अनुमति दी. इसके तहत यूजर्स समेत उनके दोस्तों तक के डाटा, जिसमें हिस्ट्री, लाइक्स आदि छोटी-बड़ी जानकारियां, कंपनियों तक पहुंच गईं. द टाइम्स के मुताबिक चीनी कंपनी हुवावेई पर अमेरिका की कई सरकारी एजेंसियों ने सुरक्षा कारणों के चलते प्रतिबंध लगाया हुआ है.

जकरबर्ग के लिए 'सॉरी' कहना बहुत आसान है

फेसबुक में मोबाइल पार्टनरशिप के उपाध्यक्ष फ्रांसिस्को वेरला ने सफाई पेश करते हुए कहा, "फेसबुक भी अन्य अमेरिकी तकनीकी कंपनियों की तरह ही चीन के निर्माताओं के साथ मिलकर काम करती रही, ताकि सर्विसेज को बेहदर ढंग से इंटीग्रेट किया जा सके. फेसबुक की हुवावेई, ओप्पो, लेनोवो, टीसीएल के साथ होने वाले इंटीग्रेशन पर हमेशा नजर रही. जो भी जानकारी साझा हुई है वह हुवावेई की डिवाइस में स्टोर हैं न कि हुवावेई के सर्वर में."

अब अमेरिकी नीति निर्माताओं ने इस पर सवाल खड़े किए हैं. अमेरिकी संसद की इंटेलिजेंस कमेटी से जुड़े सीनेटर मार्क वार्नर ने पूछा है कि कैसे फेसबुक ने यह सुनिश्चित किया कि चीनी सर्वरों को डाटा नहीं मिल रहा है. इस मामले में अब तक हुवावेई की ओर से कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आई है. सुरक्षा कारणों के चलते पेंटागन ने इस साल मई में उन जगहों पर हुवावेई फोन की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया था, जहां अमेरिका के मिलिट्री कैंप हैं. हालांकि मामला सिर्फ चीनी कंपनियों को डाटा दिए जाने तक ही सीमित नहीं है.

ईयू ने की डाटा सुरक्षा में सख्ती

न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि फेसबुक यह डाटा सैमसंग, एप्पल, माइक्रोसॉफ्ट समेत 60 कंपनियों को दे रहा है. इसमें कहा गया है कि फेसबुक की इन कंपनियों के साथ डाटा-शेयरिंग पार्टनरशिप है. इसी के तहत यूजर्स के डाटा का एक्सिस दिया गया. कुछ समय पहले ही एप्पल ने खुलासा किया था कि फेसबुक यूजर्स पर डाटा ट्रैकिंग फीचर का इस्तेमाल करता रहा है. एप्पल का कहना है कि नए अपडेट में यह ट्रैकिंग नहीं हो सकेगी.

2004 में बनी कंपनी फेसबुक पिछले लंबे समय से डाटा विवाद में फंसी है. इसके चलते कई बार फेसबुक संस्थापक मार्क जकरबर्ग यूजर्स से माफी भी मांग चुके हैं.

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