
पंजाब मानसा में परविंदर झोटा हत्याकांड के मुख्य आरोपी को पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
फार्मेसी में हुए विवाद के दौरान गोलीबारी में झोटा की मौत हुई, जबकि चार अन्य लोग घायल हुए।
झोटा ने मौत से कुछ दिन पहले मानसा में नशीले पदार्थों की कथित अवैध बिक्री की CBI जांच की मांग की थी।
हत्या के बाद झोटा के परिवार और समर्थकों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर धरना दिया था।
पंजाब के मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक्टिविस्ट परविंदर झोटा की हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। झोटा की मंगलवार को एक फार्मेसी में गोलीबारी के दौरान मौत हो गई थी। इस घटना में चार अन्य लोग भी घायल हुए थे। वारदात के बाद दुकान का मालिक मौके से फरार हो गया था, लेकिन पुलिस ने उसे पकड़ लिया है।
बताया गया है कि घटना से पहले झोटा फार्मेसी के मालिक अश्वनी कुमार से उस व्यक्ति के बारे में पूछ रहे थे, जिसने कथित तौर पर उसी सुबह दुकान से नशीले पदार्थ खरीदे थे। इसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस शुरू हुई और विवाद बढ़ने पर गोलीबारी हो गई। झोटा कथित नशा विक्रेताओं से सवाल करते हुए सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो बनाते थे। रिपोर्टों के मुताबिक, वह अश्वनी कुमार पर सिंथेटिक ड्रग्स बेचने का आरोप लगा रहे थे।
घटना में परविंदर झोटा के अलावा 65 वर्षीय बलतेज सिंह, 42 वर्षीय कुलविंदर सिंह, 24 वर्षीय हैप्पी सिंह और 30 वर्षीय गोबिंद सिंह घायल हुए। इनमें से दो लोगों की हालत गंभीर बताई गई है। उन्हें बेहतर इलाज के लिए बठिंडा रेफर किया गया।
इस घटना का वीडियो भी सामने आया था। इसमें आरोपी को पिस्तौल से धमकाते और फिर गोली चलाते देखा गया। झोटा की हत्या के बाद उनका परिवार और समर्थक दोषियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर मंगलवार को धरने पर बैठ गए थे। उन्होंने प्रशासन से बातचीत करने से भी इनकार कर दिया था।
परविंदर झोटा ने अपनी मौत से कुछ दिन पहले मानसा में नशीले पदार्थों की कथित अवैध बिक्री की जांच CBI से कराने की अपील की थी। वह सोशल मीडिया के जरिए कथित नशा विक्रेताओं से सवाल उठाते थे। उनकी हत्या के बाद एक बार फिर पंजाब में नशे के कारोबार का विरोध करने वालों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं।
इससे पहले भी पंजाब के अलग-अलग जिलों में नशा-विरोधी समितियों से जुड़े लोगों और नशीले पदार्थों के कारोबार का विरोध करने वालों की मौत के मामले सामने आए हैं। हालांकि, हर घटना के पीछे नशा तस्करी का विरोध ही कारण रहा हो, ऐसा मानना सही नहीं होगा।
मई 2026 में फगवाड़ा में RTI एक्टिविस्ट और वकील सिमरनजीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने शुरुआती तौर पर इस मामले को उनके चचेरे भाई के साथ लेन-देन के विवाद से जोड़ा था और अन्य पहलुओं की भी जांच की थी। उपलब्ध रिपोर्टों में उनकी हत्या और नशा-विरोधी अभियान के बीच सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ था। इसलिए इस घटना को नशा तस्करी के खिलाफ आवाज उठाने के कारण हुई हत्या के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
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