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राजस्थान ने ऐसे रोके कोरोना के कदम, 18 लाख को किया क्वारंटाइन

कोरोना की रोकथाम के लिए राजस्थान सरकार द्वारा लिए गए कई उपायों में क्वारंटाइन रणनीति सफल साबित हुई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देशों के अनुसार, राज्य सरकार ने संस्थागत और घरेलू क्वारंटाइन के लिए एक विस्तृत दिशानिर्देश भी जारी किए हैं।

फोटो: IANS
फोटो: IANS 

राजस्थान सरकार ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए क्वारंटाइन रणनीति पर जोर देते हुए कई क्वारंटाइन केंद्र स्थापित किए। केंद्रों की क्षमता बढ़ाने की प्रक्रिया पर भी जोर शोर से काम जारी है। मई महीने के अंत तक, राजस्थान ने 18 लाख से अधिक लोगों को क्वारंटाइन किया जिनमें अधिकतम 16 लाख अन्य राज्यों और विदेशों से आए प्रवासी थे। बाकी वह लोग हैं जो किसी कोरोना पॉजिटिव के संपर्क में आ गए थे या उनको भी कोरोना होने का संदेह था।

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राज्य में इन दिनों 2-6 लाख से अधिक लोग क्वारंटाइन में हैं। इनमें से 2-5 लाख लोग होम क्वारंटाइन हैं और लगभग 12 हजार लोगों को संस्थागत केंद्रों में क्वारंटाइन कर रखा गया है। राज्य में ग्रामीण क्षेत्रों में 5836 केंद्रों में 185602 बेड हैं और 524 शहरी क्वारंटाइन केंद्रों में 40394 बेड की संस्थागत क्षमता है।

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कोरोना की रोकथाम के लिए राजस्थान सरकार द्वारा लिए गए कई उपायों में क्वारंटाइन रणनीति सफल साबित हुई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देशों के अनुसार, राज्य सरकार ने संस्थागत और घरेलू क्वारंटाइन के लिए एक विस्तृत दिशानिर्देश भी जारी किए हैं। वहीं इन क्वारंटाइन केंद्रों के व्यापक बुनियादी ढांचे को सहारा देने के लिए थोड़े समय में ही एक मजबूत आईटी और सपोर्ट सिस्टम को भी स्थापित कर दिया गया है।

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लोक निर्माण विभाग की एसीएस वीनू गुप्ता ने बताया, "सरकार का मानना है कि लोग अभूतपूर्व परिस्थितियों के कारण चिंतित हो सकते हैं और क्वारंटाइन होने से डर रहे होंगे इसलिए सभी संभव प्रयास किए जा रहे हैं ताकि क्वारंटाइन किए लोगों को अधिकतम आराम मिल पाए। भोजन और आश्रय के साथ ही इन लोगों को प्रेरित करने के लिए काउंसलिंग और मनोरंजन के उपाय भी किए गए हैं।"

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ऐसे कई उदाहरण हैं जहां क्वारंटाइन हुए नागरिकों ने इन केंद्रों में पेंटिंग करके अपना आभार व्यक्त किया है और कुछ ने सरकारी राहत कोष के लिए मौद्रिक दान भी दिया है।

चूंकि लॉकडाउन के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग और खुद को क्वारंटाइन करने के बारे में जागरूकता काफी बढ़ गई है इसलिए होम क्वारंटाइन होने की तरफ एक बदलाव हुआ है और लोग खुद को क्वारंटाइन कर रहे हैं। यह प्रक्रिया हालांकि घर के वातावरण में व्यक्ति की मदद करती है। वहीं सरकार भी सामाजिक जिम्मेदारी तय करने से लेकर जीपीएस द्वारा निगरानी करने तक के अन्य उपायों के माध्यम से सतर्कता बनाए रखती है।

दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वालों को परामर्श दिया जाता है या उनको जबरन क्वारंटाइन किया जा रहा है या फिर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाती है।

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