
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार के कारोबार सत्र में भारी गिरावट देखी गई है। इस दौरान सेंसेक्स 1,045.46 अंक या 1.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 71,593.24 पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का मुख्य सूचकांक निफ्टी 371.25 अंक या 1.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,231.80 पर बंद हुआ।
कारोबारी सत्र में निफ्टी ने 22,179.90 का न्यूनतम स्तर छुआ, जो कि इसका 52 हफ्तों का निचला स्तर है। बाजार में कमजोरी के चलते BSE पर लिस्टेड कंपनियों के कुल मार्केट कैप में करीब ₹8 लाख करोड़ की कमी आ गई।
बाजार में चौतरफा गिरावट देखने को मिली है। करीब सभी सूचकांक लाल निशान में बंद हुए, जिसमें निफ्टी मेटल 3.55 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 3.16 प्रतिशत, निफ्टी एनर्जी 2.82 प्रतिशत, निफ्टी कमोडिटीज 2.81 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया 2.79 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस 2.76 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग 2.61 प्रतिशत, निफ्टी ऑयल एंड गैस 2.52 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 2.49 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई 2.40 प्रतिशत, निफ्टी हेल्थकेयर 2.33 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा 2.32 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी गिरावट देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,500.10 अंक या 2.53 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 57,882.50 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 456.85 अंक या 2.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 19,050.10 पर था।
सेंसेक्स पैक में आईटीसी, इंडिगो, पावर ग्रिड, बीईएल, एनटीपीसी, मारुति सुजुकी, टाटा स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट, एलएंडटी, भारती एयरटेल, एशियन पेंट्स, बजाज फिनसर्व, सन फार्मा, एचडीएफसी बैंक, इटरनल और एचयूएल टॉप लूजर्स थे। टेक महिंद्रा, एक्सिस बैंक और इन्फोसिस गेनर्स थे।
जानकारों ने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें (103 डॉलर प्रति बैरल), डॉलर के मुकाबले रुपए में कमजोरी 97 और एफआईआई की लगातार बिकवाली भारतीय बाजारों में गिरावट की मुख्य वजहें रहीं। सभी सेक्टरों में बिकवाली देखी गई, जिसमें मेटल और रियल्टी सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट क्रमशः 3.6 प्रतिशत और 3.2 प्रतिशत रही।
त्योहारी मौसम से पहले आभूषण विक्रेताओं और खुदरा कारोबारियों की मांग बढ़ने से राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में बृहस्पतिवार को सोने की कीमत 3,600 रुपये बढ़कर 1.52 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। इसके साथ ही सोने की कीमतों में लगातार दो सत्रों से जारी गिरावट का सिलसिला थम गया।
अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 3,600 रुपये बढ़कर 1,52,500 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। इसमें सभी कर शामिल हैं। बुधवार को सोना 1,48,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।
कारोबारियों ने कहा कि त्योहारी मौसम से पहले आभूषणों की मांग बढ़ने की उम्मीद में आभूषण विक्रेता आमतौर पर कच्चे माल के रूप में सोने की खरीद बढ़ा देते हैं।
ब्रोकरेज मंच लेमन के शोध प्रमुख गौरव गर्ग ने कहा कि दो महीने के निचले स्तर से उबरने के बाद बृहस्पतिवार को सोने को कुछ समर्थन मिला। हालांकि, मजबूत डॉलर और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने सोने की तेजी को सीमित किया। हालांकि, चांदी की कीमत में इसके उलट गिरावट का रुख रहा।
तीन सत्र तक स्थिर रहने के बाद चांदी की कीमत में फिर गिरावट शुरू हुई और यह पिछले सत्र के 2.27 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से 3,000 रुपये टूटकर 2.24 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रह गई।
चांदी की कीमत तीन महीने से अधिक समय के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। इससे पहले 29 जून को चांदी इस स्तर के आसपास कारोबार कर रही थी।
जीएसटी परिषद की गुरुवार को हुई 57 वीं बैठक में देश में व्यापार में आसानी को बढ़ाने के लिए कई फैसले लिए गए, जिसमें रिफंड प्रक्रिया को तेज करना और आईटीसी का विस्तार भी शामिल हैं।
जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में रिफंड प्रोसेस को तेज बनाने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके तहत अब रिफंड क्लेम को स्वीकार करने की अवधि को 15 दिनों से घटाकर 10 दिन कर दिया गया है। अगर इस समय-सीमा के अंदर न तो कोई रिफंड क्लेम स्वीकार होता है और न ही इसमें किसी कमी के बारे में सूचना जारी की जाती है, तो क्लेम को स्वीकार किया हुआ माना जाएगा।
इसमें किसी अधिकारी के बजाय, सिस्टम रिस्क असेसमेंट के आधार पर क्लेम का 90 प्रतिशत हिस्सा मंजूर करेगा। अभी रिफंड ऑर्डर मिलने के सात दिनों के भीतर जारी किया जाता है, लेकिन अब यह तीन कार्यदिवस दिनों के भीतर जारी कर दिया जाएगा।
इससे कैश लेजर में मौजूद अतिरिक्त बैलेंस का रिफंड पूरी तरह से ऑटोमैटिक हो जाएगा, जिसमें किसी अधिकारी के दखल की जरूरत नहीं होगी।
इन बदलावों से खास तौर पर निर्यातकों और 'इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर' के तहत काम करने वाले व्यवसायों को मदद मिल सकती है। रिफंड के लगभग 65 प्रतिशत दावे निर्यातकों या इनवर्टेड रेट्स से जुड़े होते हैं, जबकि 19 प्रतिशत दावे कैश लेजर में पहले से मौजूद बैलेंस से संबंधित होते हैं। इसके अलावा, जीएसटी परिषद ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का भी विस्तार किया है।
वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के बीच रुपया बृहस्पतिवार को अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 13 पैसे की गिरावट के साथ 96.88 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों समेत लगातार बने व्यापक आर्थिक दबाव के कारण रुपये में गिरावट आई। डॉलर सूचकांक कई महीनों के उच्चस्तर के करीब कारोबार कर रहा था, जबकि ब्रेंट कच्चा तेल करीब 104 डॉलर प्रति बैरल पर था।
हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के संभावित हस्तक्षेप से निचले स्तर पर रुपये को समर्थन मिला।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 96.71 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान यह 96.65 के उच्चस्तर तक गया और 96.79 के निचले स्तर तक आया। अंत में यह 13 पैसे की गिरावट के साथ 96.88 प्रति डॉलर (अस्थायी) पर बंद हुआ। बुधवार को रुपया 96.75 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, ‘‘भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के बीच वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति के कारण रुपये के नकारात्मक रुख के साथ कारोबार करने की उम्मीद है। मजबूत डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी रुपये पर दबाव डाल सकती है।’’
उन्होंने कहा कि अक्टूबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावना घटने और आरबीआई के किसी भी हस्तक्षेप से निचले स्तर पर रुपये को समर्थन मिल सकता है। कारोबारियों की नजर अमेरिका से जारी होने वाले साप्ताहिक बेरोजगारी दावे के आंकड़ों पर भी रहेगी।
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