
मज़बूत वैश्विक रुख के कारण बुधवार को वायदा कारोबार में सोने और चांदी की कीमतों में तेज उछाल आया। चांदी की कीमत लगभग चार प्रतिशत या 9,665 रुपये बढ़कर 2.62 लाख रुपये प्रति किग्रा हो गई और सोने की कीमत बढ़कर 1.58 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई।
बाजार विश्लेषकों ने कहा कि कमजोर डॉलर और अमेरिका और ईरान के बीच नए भू-राजनीतिक तनाव ने सुरक्षित निवेश मानी जानी वाली परिसंपत्तियों की मांग बढ़ा दी है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) में, मार्च डिलिवरी वाली चांदी अनुबंध की कीमत 9,665 रुपये या 3.83 प्रतिशत बढ़कर 2,62,213 रुपये प्रति किग्रा हो गई। मंगलवार को चांदी की कीमत 10,072 रुपये या लगभग चार प्रतिशत घटकर 2,52,548 रुपये प्रति किग्रा पर बंद हुई थी।
सोना वायदा में भी लिवाली देखी गई, जिसमें अप्रैल माह में डिलिवरी वाले अनुबंध की कीमत 1,397 रुपये या 0.89 प्रतिशत बढ़कर 1,58,200 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गयी। पिछले सत्र में, सोने की कीमत 1,56,803 रुपये प्रति 10 ग्राम पर नीचे बंद हुई थी।
लेमन मार्केट्स डेस्क के शोध विश्लेषक, गौरव गर्ग ने कहा, ‘‘एमसीएक्स में सोना लगभग एक प्रतिशत बढ़ा, और 1.58 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर के स्तर पर वापस आ गया, जबकि चांदी ने लगभग तीन प्रतिशत की बढ़त के साथ सोने से बेहतर प्रदर्शन किया, और 2.60 लाख रुपये प्रति किग्रा को पार कर गई।’’
उन्होंने कहा कि अमेरिका के कमजोर आर्थिक आंकड़े से ब्याज दर कटौती की उम्मीद बढ़ने और धीमी वृद्धि दर रहने के संकेत मिलने के बाद कारोबारी धारणा मजबूत हुई। एक विशेषज्ञ ने कहा, ‘‘अमेरिका-ईरान के बीच नए तनाव ने भी सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली परिसंपत्तियों की मांग बढ़ा दी है।’’
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उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में स्थानीय शेयर बाजार बुधवार को लगभग स्थिर बंद हुए। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वाहन शेयरों में हुआ फायदा आईटी शेयरों में मिले नुकसान से जाता रहा।
बाजार में कारोबार सीमित दायरे में रहा। बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स 40.28 अंक यानी 0.05 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 84,233.64 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 84,487.24 अंक के ऊपरी और 84,081.25 अंक के निचले स्तर तक गया।
वहीं, एनएसई का 50 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक निफ्टी 18.70 अंक यानी 0.07 प्रतिशत बढ़कर 25,953.85 अंक पर बंद हुआ।
सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इन्फोसिस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, इटर्नल, आईटीसी, टेक महिंद्रा, एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाइटन, अदाणी पोर्ट्स, बजाज फिनसर्व और टाटा स्टील में प्रमुख रूप से गिरावट रही।
दूसरी तरफ, लाभ में रहने वाले शेयरों में भारतीय स्टेट बैंक, मारुति सुजुकी इंडिया, इंडिगो, ट्रेंट, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एनटीपीसी, बजाज फाइनेंस, आईसीआईसीआई बैंक, सन फार्मास्युटिकल्स, हिंदुस्तान यूनिलीवर और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लि. शामिल हैं।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘भारत- अमेरिका व्यापार समझौते के कारण इस सप्ताह अबतक रही तेजी के बाद घरेलू शेयर बाजार में कुछ समय के लिए स्थिरता आ सकती है। बाजार का ध्यान अब तीसरी तिमाही के मिले-जुले नतीजों, आगामी मुद्रास्फीति आंकड़ों और व्यापार समझौते के विवरणों पर है। विवरण को अंतिम रूप दिए जाने की खबरें आ रही हैं।’’
नायर ने कहा कि वाहन और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों में मजबूती उम्मीद से बेहतर नतीजों को बताती है, जबकि कृत्रिम मेधा (एआई) से संबंधित अस्थिरता के चलते वैश्विक स्तर पर आई बिकवाली के कारण आईटी क्षेत्र का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। मझोली कंपनियों से जुड़े बीएसई मिडकैप और छोटी कंपनियों के बीएसई स्मॉलकैप सूचकांक में मामूली गिरावट आई।
नायर ने कहा, ‘‘वैश्विक स्तर पर, अमेरिका में खुदरा बिक्री के कमजोर आंकड़े और एआई से संबंधित लगातार व्यवधानों के कारण बाजार में सतर्कता का माहौल बना रहा। इससे अमेरिका में रोजगार आंकड़ों से पहले निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इस बीच, घरेलू बाजारों को विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) के पूंजी प्रवाह में सुधार से लाभ मिलना शुरू हो गया है। जीडीपी वृद्धि अनुमान को बढ़ाये जाने के साथ इसके सकारात्मक बने रहने की उम्मीद है।’’
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जम्मू-कश्मीर में कुछ फल उत्पादक और डीलर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले बुरे असर को लेकर परेशान हैं, लेकिन इस समूह में कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि इस समझौते से कीमतें स्थिर होंगी और स्थानीय पैदावार की गुणवत्ता बेहतर होगी।
हालांकि, फल उत्पादकों की आम बिरादरी को लगता है कि यह व्यापार समझौता कश्मीर की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका होगी, जो राज्य काफी हद तक बागवानी पर निर्भर है।
दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले के अखरोट उगाने वाले किसान और डीलर जावेद अहमद लोन ने कहा कि अमेरिका से आयातित सामान स्थानीय किसानों को अपना स्टॉक बेहतर करने पर मजबूर करेगा, यदि वे व्यवसाय में बने रहना चाहते हैं।
लोन ने कहा, ‘‘संरक्षणवाद हर समय किसानों के लिए अच्छा नहीं होता। वे लापरवाह हो जाते हैं क्योंकि उनके पास एक स्थापित बाजार होता है। उदाहरण के लिए, कश्मीर में स्थानीय बादाम और अखरोट की कीमत शेयर बाजार की तरह ऊपर-नीचे होती रहती है। किसी को नहीं पता कि क्या हो रहा है।’’
उन्होंने कहा कि अमेरिका से अखरोट और बादाम के लगातार आने से स्थानीय पैदावार के दाम भी स्थिर हो जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘‘आयातित अखरोट और बादाम की गुणवत्ता बेहतर है और शुल्क के कारण वे पहले से ही बहुत प्रतिस्पर्धी थे। स्थानीय किसानों को भी अपनी गुणवत्ता सुधारनी होगी। प्रतिस्पर्धा का यही फायदा है।’’
फल उगाने वालों और डीलर यूनियन के अध्यक्ष, बशीर अहमद बशीर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि आयातित सेबों पर कम शुल्क से कश्मीर और हिमाचल के सेबों को बहुत नुकसान होगा।
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आयातकों की तरफ से अमेरिकी डॉलर की मांग आने और मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के बीच रुपया बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 14 पैसे टूटकर 90.70 रुपये प्रति डॉलर (अस्थायी) पर बंद हुआ।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव के कारण रुपये में हल्का नकारात्मक रुख है। आयातकों की ओर से डॉलर की मांग भी स्थानीय मुद्रा पर दबाव डाल रही है। हालांकि, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के निवेश प्रवाह से रुपये को समर्थन मिल सकता है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 90.56 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान यह 90.46 के ऊपरी और 90.75 के निचले स्तर तक गया। कारोबार के अंत में यह अपने पिछले बंद भाव 90.56 के मुकाबले 14 पैसे की गिरावट के साथ 90.70 (अस्थायी) पर बंद हुआ।
मंगलवार को रुपया शुरुआती गिरावट से उबरकर 10 पैसे की बढ़त के साथ 90.56 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, “आयातकों की डॉलर मांग आने और भू-राजनीतिक तनाव के कारण रुपया कमजोर हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भी दबाव बनाया। हालांकि, कमजोर अमेरिकी डॉलर और विदेशी निवेश प्रवाह ने गिरावट को सीमित रखा। अमेरिका के गैर-कृषि रोजगार और खुदरा बिक्री आंकड़ों के निराशाजनक रहने से डॉलर में कमजोरी आई।”
इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.26 प्रतिशत गिरकर 96.54 पर आ गया।
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 1.44 प्रतिशत बढ़कर 69.78 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
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