
कच्चे तेल के दाम में नरमी के बीच बैंक और दैनिक उपभोग का सामान बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में भारी लिवाली से घरेलू शेयर बाजार में बृहस्पतिवार को जोरदार तेजी आई। बीएसई सेंसेक्स 905 अंक उछल गया, जबकि एनएसई निफ्टी 22,900 अंक के पार पहुंच गया।
बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स 905.01 अंक यानी 1.24 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,151.04 अंक पर बंद हुआ। यह एक सप्ताह से अधिक समय का उच्च स्तर है।
एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी भी 237.90 अंक यानी 1.05 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,936.75 अंक पर बंद हुआ।
सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से 26 बढ़त के साथ बंद हुईं। अदाणी पोर्ट्स में सबसे ज्यादा पांच प्रतिशत की तेजी आई। एकीकृत शुद्ध लाभ सितंबर तिमाही में 18 प्रतिशत बढ़कर 3,682.44 करोड़ रुपये पर पहुंचने से कंपनी का शेयर लाभ में रहा।
इसके अलावा कोटक महिंद्रा बैंक, पावर ग्रिड, इटर्नल, बजाज फाइनेंस, भारतीय स्टेट बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, टाइटन, एनटीपीसी, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लि. और इन्फोसिस के शेयर भी बढ़त में रहे।
दूसरी तरफ, नुकसान में रहने वाले शेयरों में ट्रेंट, मारुति सुजुकी इंडिया, टेक महिंद्रा और एचडीएफसी बैंक शामिल हैं।
इस बीच, एक दिन पहले सूचीबद्ध हुई जियो प्लेटफॉर्म्स का शेयर 0.4 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 1,423.05 रुपये पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह शेयर 5.12 प्रतिशत तक चढ़ गया था।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लि. के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत ब्याज दरों में बदलाव नहीं करने, कच्चे तेल की कीमतों में मामूली नरमी और संस्थागत निवेशकों की लिवाली से घरेलू शेयर बाजार में तेजी आई।’’
उन्होंने कहा, ‘‘दैनिक उपयोग के उपभोक्ता सामान (एफएमसीजी), वित्तीय, सूचना प्रौद्योगिकी, रियल एस्टेट और बिजली क्षेत्रों की अगुवाई में यह तेजी आई। मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी तेजी आई, जो बाजार में व्यापक स्तर पर मजबूती का संकेत है।’’
राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोने की कीमत बृहस्पतिवार को 1.46 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर स्थिर रही। ऊंची कीमतों के बीच आभूषण विक्रेताओं और खुदरा कारोबारियों ने ताजा खरीदारी के प्रति सतर्कता बरती।
अखिल भारतीय सर्राफा संघ ने कहा कि चांदी की कीमत 500 रुपये बढ़कर 1,98,500 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। इसमें सभी कर शामिल हैं। बुधवार को चांदी की कीमत 1.98 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही थी।
कारोबारियों ने कहा कि ऊंची कीमतों के बीच आभूषण विक्रेताओं और खुदरा कारोबारियों के नई खरीदारी को लेकर सतर्क रहने से सोने की कीमतें स्थिर रहीं।
बेहतर साख वाली कंपनियां बैंकों की तुलना में अपेक्षाकृत कम लागत पर धन जुटाने के लिए तेजी से बॉण्ड बाजार का रुख कर रही हैं।
पीटीआई-भाषा द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, एएए रेटिंग वाली कंपनियों ने अक्टूबर में अबतक 8.13 प्रतिशत से 8.85 प्रतिशत तक की ब्याज दर पर पैसा जुटाया है।
ये बॉण्ड इस महीने की शुरुआत में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समीक्षा के तुरंत बाद आए। इस समीक्षा में केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की थी और मौद्रिक नीति के रुख को भी ‘तटस्थ’ से बदलकर ‘सूझ-बूझ के साथ सख्ती’ वाला कर दिया था।
विशेषज्ञों ने कहा कि बॉण्ड के जरिये कर्ज लेना बाहरी मानकों से जुड़ी ब्याज दरों वाले बैंक ऋण की तुलना में सस्ता हो सकता है। इसकी वजह यह है कि बैंक ऋण में मानक उधारी दर के ऊपर अतिरिक्त प्रीमियम भी लिए जाते हैं।
रॉकफोर्ट फिनकैप एलएलपी के संस्थापक एवं प्रबंध साझेदार वेंकटकृष्णन श्रीनिवासन ने कहा कि देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) से कर्ज लेने पर प्रभावी ब्याज दर 8.65 प्रतिशत होगी। इसमें बाहरी मानक से जुड़ी उधारी दर (ईबीएलआर) 8.15 प्रतिशत के साथ ऋण जोखिम प्रीमियम (सीआरपी) और कारोबारी रणनीति प्रीमियम (बीएसपी) शामिल हैं।
इसके मुकाबले, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी आरईसी ने मंगलवार को पांच साल की अवधि वाले बॉण्ड जारी कर 8.30 प्रतिशत की ब्याज दर पर 4,000 करोड़ रुपये जुटाए।
श्रीनिवासन ने कहा, ‘‘इससे बॉण्ड के जरिये धन जुटाना लागत के लिहाज से काफी फायदेमंद हो जाता है। यह लाभ एएए रेटिंग वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी को भी मिलता है। इसमें बॉण्ड जारी करने के खर्च और कर्ज की शर्तों में अन्य अंतर को अभी शामिल नहीं किया गया है।’’
रुपया बृहस्पतिवार को अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले तीन पैसे मजबूत होकर 95.25 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा। घरेलू शेयर बाजार में मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से रुपये को समर्थन मिला।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अपेक्षा से कुछ सख्त रुख के कारण रुपये पर दबाव बना रहा। कारोबार के दौरान रुपया दो सप्ताह के निचले स्तर तक भी आ गया था। हालांकि, घरेलू बाजारों में सकारात्मक रुख और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने इसे समर्थन दिया।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.20 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान यह टूटकर 95.38 प्रति डॉलर के निचले स्तर तक आ गया। रुपया अंत में 95.25 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले तीन पैसे की बढ़त है। रुपया बुधवार को 21 पैसे टूटकर 95.28 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, ‘‘अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और डॉलर में मजबूती के कारण हमें आशंका है कि रुपये पर थोड़ा दबाव रह सकता है। दिसंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावना से डॉलर को और मजबूती मिल सकती है।’’
हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिका तथा ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत को लेकर उम्मीद से रुपये को निचले स्तर पर समर्थन मिल सकता है।
चौधरी के अनुसार, हाजिर बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपये के 94.5 से 95.50 के दायरे में रहने के आसार हैं।
इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.07 प्रतिशत बढ़कर 102.26 पर कारोबार कर रहा था।
अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट कच्चे तेल का भाव वायदा कारोबार में 1.03 प्रतिशत गिरकर 114.13 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने बाजार की व्यापक उम्मीदों के अनुरूप ब्याज दरों को 3.75-4.00 प्रतिशत के दायरे में अपरिवर्तित रखा। हालांकि, विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक, आगे ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता के कारण बाजार की नजर अब आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी।
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