
अमेरिका-ईरान के बीच के बीच तनाव कम होने से भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार के कारोबारी सत्र में जोरदार तेजी देखने को मिली। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,695.40 अंक या 2.30 प्रतिशत की तेजी के साथ 75,527.95 और निफ्टी 461.30 अंक या 1.99 प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,622.90 पर बंद हुआ।
बाजार में चौतरफा तेजी देखी गई, जिससे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का मार्केट कैप करीब 10 लाख करोड़ रुपए बढ़कर 462 लाख करोड़ रुपए हो गया है।
लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी तेजी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,442.70 अंक या 2.43 प्रतिशत बढ़कर 60,768.10 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 494.35 अंक या 2.80 प्रतिशत बढ़कर 18,197.45 पर बंद हुआ।
सेंसेक्स पैक में बजाज फाइनेंस, एलएंडटी, इंटरग्लोब एविएशन, टाइटन, इटरनल, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, बजाज फिनसर्व, कोटक महिंद्रा बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, भारती एयरटेल, मारुति सुजुकी, एशियन पेंट्स, टाटा स्टील, आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई, ट्रेंट और अदाणी पोर्ट्स गेनर्स थे। केवल टेक महिंद्रा और पावर ग्रिड ही लाल निशान में बंद हुए।
बाजार में निफ्टी रियल्टी, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी ऑटो और निफ्टी एनर्जी सबसे ज्यादा बढ़ने वाले सूचकांक थे।
केवल निफ्टी आईटी ही 0.09 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ।
भारतीय शेयर बाजार में तेजी की वजह अमेरिका और ईरान में शांति समझौते की संभावनाओं को माना जा रहा है।
ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी मेहर की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान और वाशिंगटन के बीच प्रस्तावित समझौते में प्रतिबंधों और हॉर्मुज स्ट्रेट से अमेरिकी नौसेना की ब्लॉकेज हटाने और ईरान के चारों तरफ अमेरिकी सेना के घेराव को समाप्त करना शामिल है।
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि जंग को समाप्त करने के लिए ईरान के साथ होने वाली डील करीब पूरी होने वाली है। इसे यूरोप में सप्ताहांत में साइन किया जा सकता है।
इससे कच्चे तेल की कीमतों में भारी बिकवाली देखने को मिली है। खबर लिखे जाने तक शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज पर डब्ल्यूटीआई क्रूड का दाम 3.74 प्रतिशत गिरकर 84.33 डॉलर प्रति बैरल पर था।
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खुदरा महंगाई दर मई में सालाना आधार पर 3.93 प्रतिशत रही है। इस दौरान आलू, मटर, जीरे और गाड़ियों की कीमतों में कमी देखने को मिली है। यह अप्रैल 2026 में 3.48 प्रतिशत थी। यह जानकारी सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को जारी किए गए आंकड़ों में दी गई।
सरकारी आंकड़ों में बताया गया कि मई में ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई दर 4.25 प्रतिशत रही है, जबकि शहरी इलाकों में यह 3.53 प्रतिशत थी। वहीं, मई में खुदरा खाद्य महंगाई दर 4.78 प्रतिशत रही है, जो कि अप्रैल में 4.20 प्रतिशत थी।
ग्रामीण इलाकों में खुदरा खाद्य महंगाई दर 4.85 प्रतिशत रही है, जो कि शहरी इलाकों में बीते महीने 4.66 प्रतिशत थी।
मई में सालाना आधार पर जिन शीर्ष पांच उत्पादों के दाम कम हुए हैं, उनमें आलू (-23.71 प्रतिशत), मटर (-11.47 प्रतिशत), मोटर कार एंड जीप (-7.19 प्रतिशत), जीरा (-4.59 प्रतिशत) और मोटर साइकिल और स्कूटर (-3.56 प्रतिशत) शामिल हैं।
इस दौरान सालाना आधार पर जिन शीर्ष पांच उत्पादों में खुदरा महंगाई बढ़ी है, उनमें चांदी की ज्वेलरी (155.23 प्रतिशत), टमाटर (48.43 प्रतिशत), सोना,हीरा और प्लेटिनम ज्वेलरी (40.93 प्रतिशत), अदरक (32.49 प्रतिशत) और किशमिश (21.97 प्रतिशत) शामिल हैं।
सरकारी आंकड़ों में बताया कि 50 लाख से अधिक की आबादी वाले शीर्ष पांच राज्यों में मई में सबसे अधिक खुदरा महंगाई तेलंगाना (6.15 प्रतिशत), तमिलनाडु (5.11 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (4.90 प्रतिशत), कर्नाटक (4.59 प्रतिशत) और ओडिशा (4.54 प्रतिशत) में थी।
महंगाई में लगातार बढ़ोतरी से पता चलता है कि साल की शुरुआत में हालात सामान्य रहने के बाद अब कीमतों पर दबाव बढ़ने लगा है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, आयातित महंगाई को लेकर चिंता बढ़ाने वाले मुख्य कारण हैं।
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