
शेयर बाजार में बुधवार को लगातार तीसरे दिन गिरावट रही और दोनों मानक सूचकांक नुकसान में रहे। कच्चे तेल के दाम में तेजी और बैंक शेयरों में बिकवाली से बीएसई सेंसेक्स 715 अंक लुढ़क गया जबकि एनएसई निफ्टी में 191 अंक की गिरावट आई।
तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 715.06 अंक यानी 0.92 प्रतिशत टूटकर 76,755.05 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 828.92 अंक लुढ़क कर 76,641.19 अंक पर आ गया था। इसी तरह, पचास शेयरों पर आधारित एनएसई निफ्टी 191.45 अंक यानी 0.79 प्रतिशत टूटकर 23,996.25 अंक पर बंद हुआ।
मझोली कंपनियों से जुड़ा बीएसई मिडकैप सेलेक्ट सूचकांक 1.33 प्रतिशत लुढ़का जबकि छोटी कंपनियों का स्मॉलकैप 1.16 प्रतिशत नीचे आया।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव और हूती समूह के दुनिया के महत्वपूर्ण पोत परिवहन मार्ग को बाधित करने से तेल की आपूर्ति प्रभावित होने को लेकर चिंता बढ़ गई है। इससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं और रुपया कमजोर हुआ है, जिसके चलते घरेलू शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए।’’
सेंसेक्स की कंपनियों में इंटरग्लोब एविएशन, इन्फोसिस, भारतीय स्टेट बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक में प्रमुख रूप से गिरावट आई।
वहीं लाभ में रहने वाले शेयरों में हिंदुस्तान यूनिलीवर, एनटीपीसी, पावर ग्रिड और टाइटन बढ़त बनाने वाली कंपनियों में शामिल रहे।
बीएसई में सूचीबद्ध 2,780 शेयरों में गिरावट आई जबकि 1,458 शेयर बढ़त में रहे। 180 के भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ। वैश्विक तेल मानक, ब्रेंट क्रूड की कीमत 4.68 प्रतिशत चढ़कर 95.27 डॉलर प्रति बैरल हो गई।
ऑनलाइन ट्रेडिंग कंपनी एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पोनमुडी आर ने कहा, ‘‘कच्चे तेल के दाम में तेजी और पश्चिम एशिया में लगातार तनाव बने रहने के कारण निवेशकों के जोखिम लेने से बचने की धारणा से घरेलू शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। मानक सूचकांक पर पूरे सत्र के दौरान बिकवाली का दबाव बना रहा। ज्यादातर क्षेत्रों में व्यापक गिरावट ने पहली तिमाही के नतीजों की उत्साहजनक शुरुआत को हल्का कर दिया।’’
उन्होंने कहा कि निवेशकों का ध्यान वृहद आर्थिक हालात पर बना रहा, क्योंकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और दवा आयात पर संभावित अमेरिकी शुल्क को लेकर नई चिंताओं ने धारणा को प्रभावित किया।
एशिया के अन्य बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कॉस्पी और चीन का शंघाई कम्पोजिट बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि जापान का निक्की और हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट में रहे।
राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में बुधवार को सोने की कीमतों में 1,900 रुपये की बढ़ोतरी हुई और यह दो सप्ताह के उच्च स्तर 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इसकी वजह मजबूत हाजिर मांग और वैश्विक बाजारों में मजबूती का रुख रही।
अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 1,900 रुपये बढ़कर 1,49,600 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी टैक्स सहित) हो गई। मंगलवार को यह 1,47,700 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। सात जुलाई को स्थानीय बाजार में सोने की कीमत 1,49,250 रुपये प्रति 10 ग्राम थीं।
लगातार छह सत्रों की गिरावट के बाद चांदी में सुधार हुआ और इसकी कीमत 8,500 रुपये बढ़कर 2,30,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) हो गई। पिछले सत्र में यह 2,21,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।
वायदा कारोबार में कच्चातेल की वायदा कीमत 4 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 8,513 रुपये प्रति बैरल पर पहुंच गई। इसकी वजह वैश्विक मानक में आई तेज़ी थी, जो पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण आपूर्ति में रुकावट की आशंकाओं से प्रेरित थी।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में कच्चा तेल का अगस्त माह में डिलिवरी होने वाला अनुबंध 363 रुपये या 4.45 प्रतिशत की तेजी के साथ 8,513 रुपये प्रति बैरल हो गया। जिससे लगातार चौथे सत्र में कच्चातेल कीमतों में तेजी रही।
इसी प्रकार, कच्चा तेल का सितंबर माह में डिलिवरी होने वाला अनुबंध 169 रुपये या 2.12 प्रतिशत की तेजी के साथ 8,152 रुपये प्रति बैरल हो गया।
बाजार विश्लेषकों ने कहा कि भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण कारोबारियों ने सौदों का आकार बढ़ाया। उन्हें डर था कि पश्चिम एशिया में चल रहे टकराव से उस इलाके से होने वाली उर्जा आपूर्ति में रुकावट आ सकती है।
एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयरों में लिस्टिंग के दूसरे दिन बुधवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली और यह 600 रुपए के नीचे फिसल गए।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयर 4.11 प्रतिशत की गिरावट के साथ 584.70 रुपए पर बंद हुए।
दिन की शुरुआत में शेयर 609 रुपए पर खुला था और पूरे कारोबारी सत्र में इसमें गिरावट बनी रही। इस दौरान एसबीआई फंड्स के शेयर ने 583 रुपए का इंट्राडे लो बनाया, जो कि उसके क्लोजिंग स्तर के करीब है, जो दिखाता है कि सत्र के अंत तक शेयर दबाव में था।
एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयर एनएसई पर मंगलवार को अपने इश्यू प्राइस 574 रुपए के मुकाबले 6.27 प्रतिशत के प्रीमियम पर 613.30 रुपए पर लिस्ट हुए थे।
लिस्टिंग के बाद एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट की प्रमोटर कंपनी भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने कहा कि एसबीआई की इस कंपनी में हिस्सेदारी घटाने की कोई योजना नहीं है। आईपीओ का उद्देश्य रिटेल निवेशकों को कंपनी की ग्रोथ का भागीदार बनाना था।
शेट्टी ने देश की आर्थिक राजधानी में लिस्टिंग समारोह के बाद पत्रकारों से कहा, "लिस्टिंग के बाद एसबीआई फंड्स में हिस्सेदारी घटाने की हमारी कोई योजना नहीं है।"
फार्मा शेयरों में बुधवार के कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। इसकी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ प्लान को माना जा रहा है, जिसके तहत अगस्त 2028 से सभी जेनेरिक दवाओं पर 100 प्रतिशत और अगस्त 2029 से 200 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा।
इससे नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का फार्मा कंपनियों का मुख्य सूचकांक निफ्टी फार्मा 2 प्रतिशत से अधिक लुढ़क गया।
सुबह 10:30 बजे तक, ग्लैंड फार्मा (4.62 प्रतिशत), पीरामल फार्मा (3.92 प्रतिशत), ल्यूपिन (3.81 प्रतिशत), जेबी केमिकल्स (3.87 प्रतिशत), अजंता फार्मा (3.03 प्रतिशत), सिप्ला (1.87 प्रतिशत), मैनकाइंड फार्मा (1.69 प्रतिशत), डॉ.रेड्डी लैब्स (1.49 प्रतिशत), सन फार्मा (1.00 प्रतिशत) और बायोकॉन (1.01 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ कारोबार कर रहे थे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ऐलान किया कि 1 अगस्त 2026 से अमेरिका में आयात होने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर अगले दो वर्षों तक कोई टैरिफ नहीं लगाया जाएगा। इसके बाद एक वर्ष के लिए टैरिफ 100 प्रतिशत कर दिया जाएगा और उसके बाद इसे 200 प्रतिशत तक बढ़ा दिया जाएगा।
ट्रंप ने कहा कि इस नीति का उद्देश्य जेनेरिक दवाओं के उत्पादन को अमेरिका में वापस लाना है। उन्होंने कहा कि कंपनियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अमेरिका में अपने उत्पादन संयंत्र और उपकरण स्थापित करने का अवसर दिया जाएगा। जो कंपनियां ऐसा नहीं करेंगी, उन्हें बढ़े हुए टैरिफ के रूप में दंड का सामना करना पड़ेगा।