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अर्थतंत्र की खबरें: थोक महंगाई और कच्चे तेल के उछाल से लुढ़का शेयर बाजार और सोना ₹1,800 और चांदी ₹5,000 टूटी

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर महीने में थोक मुद्रास्फीति दर बढ़कर 11.39 प्रतिशत हो गई, जो अगस्त में 9.92 प्रतिशत थी। खाद्य पदार्थों, विनिर्मित वस्तुओं तथा ईंधन एवं बिजली की कीमतें बढ़ने से थोक मुद्रास्फीति में तेजी आई।

फाइल फोटोः सोशल मीडिया
फाइल फोटोः सोशल मीडिया 

थोक महंगाई दर में वृद्धि और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच बुधवार को घरेलू शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। पिछले कारोबारी सत्र में उछाल के बाद निवेशकों की मुनाफावसूली से बाजार पर दबाव रहा।

बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 251.89 अंक यानी 0.34 प्रतिशत गिरकर 72,781.89 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 73,195.26 अंक के उच्च स्तर तक गया और 72,578.75 अंक के निचले स्तर तक आया।

एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी भी 99.25 अंक यानी 0.44 प्रतिशत टूटकर 22,622.70 अंक पर बंद हुआ।

सेंसेक्स की कंपनियों में से बजाज फाइनेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, इटर्नल, आईसीआईसीआई बैंक और इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) में सबसे ज्यादा गिरावट रही।

दूसरी तरफ, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एनटीपीसी और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में तेजी रही।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर महीने में थोक मुद्रास्फीति दर बढ़कर 11.39 प्रतिशत हो गई, जो अगस्त में 9.92 प्रतिशत थी। खाद्य पदार्थों, विनिर्मित वस्तुओं तथा ईंधन एवं बिजली की कीमतें बढ़ने से थोक मुद्रास्फीति में तेजी आई।

जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘हाल की तेजी के बाद मुनाफावसूली और अमेरिका के महंगाई आंकड़ों से पहले सतर्कता के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव रहा। थोक महंगाई के अपेक्षा से अधिक रहने से मौद्रिक नीति सख्त होने की आशंकाएं बढ़ गईं, जिससे वाहन, निजी बैंक और धातु कंपनियों के शेयरों पर दबाव पड़ा।’’

व्यापक बाजार में भी गिरावट देखी गई। छोटी कंपनियों का बीएसई स्मॉलकैप सेलेक्ट सूचकांक 0.72 प्रतिशत टूट गया जबकि मझोली कंपनियों का मिडकैप सेलेक्ट 0.14 प्रतिशत के नुकसान में रहा।

रुपया 19 पैसे की बढ़त के साथ 95.17 प्रति डॉलर पर, एक माह का उच्चस्तर

रुपये में बुधवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी जारी रही और यह अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 19 पैसे मजबूत होकर 95.17 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हस्तक्षेप से डॉलर की मांग कम होने और विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी पर अंकुश लगने से घरेलू मुद्रा को समर्थन मिला।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि रुपये में तेजी के साथ यह एक महीने के उच्चस्तर पर पहुंच गया। आरबीआई के सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के उपायों के अलावा डॉलर में कमजोरी और अमेरिकी सरकारी बॉण्ड पर प्रतिफल घटने से भी रुपये को समर्थन मिला। हालांकि, घरेलू शेयर बाजारों में कमजोरी ने रुपये की बढ़त को सीमित किया।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.05 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान यह 94.76 के उच्च स्तर तक गया और 95.19 के निचले स्तर तक आया। कारोबार के अंत में रुपया 95.17 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा, जो पिछले बंद भाव से 19 पैसे बढ़त है।

रुपया मंगलवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में मजबूत हुआ था और 42 पैसे की बढ़त के साथ 95.36 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

पिछले चार कारोबारी सत्रों में रुपये में अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले कुल 171 पैसे की तेजी आई है।

मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि रुपये में सकारात्मक रुख बना रहेगा। अत्यधिक सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए आरबीआई के हस्तक्षेप से रुपये को समर्थन मिल सकता है। डॉलर में कमजोरी और अमेरिकी बॉण्ड पर प्रतिफल में गिरावट भी रुपये के लिए सहायक हो सकती है।’’

इस बीच, बुधवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, खाद्य पदार्थों, विनिर्मित वस्तुओं तथा ईंधन एवं बिजली की कीमतें बढ़ने से सितंबर में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर 11.39 प्रतिशत हो गई, जो अगस्त में 9.92 प्रतिशत थी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा था कि पिछले डेढ़ साल में रुपये में काफी गिरावट आई है और आरबीआई घरेलू मुद्रा में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के प्रयास जारी रखेगा।

विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता और सट्टेबाजी पर अंकुश के लिए उठाए गए कदम: आरबीआई गवर्नर

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि पेट्रोलियम विपणन कंपनियों के लिए विशेष डॉलर सुविधा शुरू करने जैसे हाल के कदमों का उद्देश्य विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्थित कारोबार सुनिश्चित करना और अनुचित सट्टेबाजी पर अंकुश लगाना है।

मल्होत्रा ने 'मनीकंट्रोल' को दिए साक्षात्कार में कहा कि केंद्रीय बैंक रुपये के लिए किसी विशेष विनिमय दर या दायरे को लक्ष्य नहीं बनाता है। उसका ध्यान रुपये में व्यवस्थित उतार-चढ़ाव सुनिश्चित करने और अत्यधिक सट्टेबाजी को रोकने पर है।

पिछले सप्ताह आरबीआई ने विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कारोबार के नियम सख्त किए थे। इसके तहत निरस्त विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों को दोबारा बुक करने पर रोक लगाई गई और बैंकों को डॉलर की खरीद पर 20 प्रतिशत आरक्षित राशि रखने को कहा गया।

कच्चे तेल के आयात पर बड़ी रकम खर्च करने वाली तीन सरकारी पेट्रोलियम विपणन कंपनियों के लिए विशेष डॉलर सुविधा मौजूदा बाजार स्थितियों के आकलन के आधार पर शुरू की गई है।

मल्होत्रा ने कहा, ‘‘विदेशी मुद्रा बाजार का मुख्य उद्देश्य वास्तविक जरूरतों को पूरा करना और विनिमय दर के जोखिम से बचाव करना है। शेयर बाजार के विपरीत, जहां निवेशक कीमतों में बदलाव को लेकर अपनी राय के आधार पर कारोबार कर सकते हैं, विदेशी मुद्रा बाजार मुख्य रूप से वास्तविक जरूरतों और जोखिम से बचाव के लिए है।’’

उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि आरबीआई ने बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव और एकतरफा सट्टेबाजी देखी थी, जिससे बाजार की ताकतों के लिए रुपये का वास्तविक मूल्य तय करना मुश्किल हो रहा था।

मजबूत रुपये के कारण सोना 1,800 रुपये टूटा, चांदी 5,000 रुपये कमजोर

राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में लगातार तीसरे दिन गिरावट आई और यह बुधवार को 1,800 रुपये टूटकर 1,50,800 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। रुपये में मजबूती आने से कीमती धातु की कीमतों पर दबाव अधिक बढ़ गया।

अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने का भाव मंगलवार के बंद भाव 1,52,600 रुपये प्रति 10 ग्राम से 1,800 रुपये टूटकर 1,50,800 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी कर सहित) रह गया।

चांदी की कीमतों में भी गिरावट जारी रही। इसका भाव पिछले बंद स्तर 2.26 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से 5,000 रुपये टूटकर 2.21 लाख रुपये प्रति किलोग्राम (सभी कर सहित) रह गया।

नौ अक्टूबर के बाद से सोने की कीमतों में 3,600 रुपये और चांदी में 7,500 रुपये की गिरावट आई है। इससे घरेलू सर्राफा बाजार में कीमतों में आई गिरावट का अंदाजा लगाया जा सकता है।

रुपया बुधवार को डॉलर के मुकाबले 19 पैसे मजबूत होकर 95.17 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। यह लगातार चौथा कारोबारी सत्र था, जब रुपये में तेजी दर्ज की गई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हस्तक्षेप से रुपये को समर्थन मिला। केंद्रीय बैंक ने डॉलर की निकट अवधि की मांग को कम करने और विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी के जोखिम को सीमित करने के लिए हस्तक्षेप किया।

कारोबारियों ने कहा कि रुपये में मजबूती से डॉलर मूल्य वाली सोने-चांदी जैसी धातुओं का आयात सस्ता हो जाता है, जिससे घरेलू बाजार में उनकी कीमतों पर दबाव पड़ता है। यह स्थिति तब भी बनी रहती है, जब निवेशक अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव पर नजर रख रहे हों।

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