
स्थानीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला बृहस्पतिवार को चौथे दिन भी जारी रहा। पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण कच्चे तेल के दाम में उछाल से मानक सूचकांक बीएसई सेंसेक्स 364 अंक टूटा जबकि एनएसई निफ्टी में 127 अंक की गिरावट आई।
बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित सेंसेक्स 363.66 अंक यानी 0.47 प्रतिशत टूटकर 76,391.39 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 603.07 अंक लुढ़ककर 76,151.98 अंक तक आ गया था।
वहीं, पचास शेयरों पर आधारित एनएसई निफ्टी 126.65 अंक यानी 0.53 प्रतिशत टूटकर 23,869.60 अंक पर बंद हुआ। कुल मिलाकर चार दिन में बीएसई सेंसेक्स 1,760.06 अंक और एनएसई निफ्टी 464.7 अंक के नुकसान में रहे हैं।
सेंसेक्स की कंपनियों में अदाणी पोर्ट्स में सबसे अधिक 2.6 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा बजाज फाइनेंस, इंटरग्लोब एविएशन, एक्सिस बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और टाटा स्टील के शेयर प्रमुख रूप से नुकसान में रहे।
दूसरी ओर महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), इटर्नल और बजाज फिनसर्व के शेयर लाभ में रहे। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 4.52 प्रतिशत बढ़कर 98.32 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई।
ऑनलाइन ट्रेडिंग कंपनी एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पोनमुडी आर ने कहा, ‘‘भारतीय शेयर बाजार में गिरावट जारी रही। इसका कारण यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि और वैश्विक स्तर पर एआई निवेश को लेकर फिर से बढ़ी चिंताओं ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है।’’
शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बुधवार को 819.20 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लि. के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में संभावित बाधाओं की आशंका के बीच कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। इससे महंगाई और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता बढ़ी है।’’
छोटी कंपनियों से जुड़ा बीएसई स्मॉलकैप सेलेक्ट सूचकांक 1.10 प्रतिशत टूटा जबकि मझोली कंपनियों का मिडकैप 1.07 प्रतिशत के नुकसान में रहा।
बीएएसई में सूचीबद्ध कंपनियों में से 2,684 शेयरों में गिरावट रही जबकि 1,556 शेयर लाभ में रहे। वहीं 151 के भाव अपरिवर्तित रहे। एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की, चीन का शंघाई एसएसई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग बढ़त में रहे।
रुपया बृहस्पतिवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले चार पैसे टूटकर 96.57 (अस्थायी) के स्तर पर रहा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारतीय मुद्रा पर दबाव पड़ा।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के संभावित हस्तक्षेप से रुपये को कुछ बल मिला।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 96.53 के स्तर पर खुला और कारोबार के दौरान 96.45 से 96.59 प्रति डॉलर के दायरे में रहा। अंत में यह अपने पिछले बंद भाव के मुकाबले चार पैसे की गिरावट के साथ 96.57 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। रुपया बुधवार को अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 28 पैसे टूटकर 96.53 के स्तर पर बंद हुआ था।
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, "कमजोर घरेलू बाजार और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण रुपये पर दबाव रहा। पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है।"
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच राजनयिक वार्ता से रुपये में तेज गिरावट को रोका जा सकता है। उनके अनुसार, डॉलर के मुकाबले रुपया का हाजिर भाव 96.30 से 96.85 रुपये के दायरे में रहने की उम्मीद है।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने, विशेषकर हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी तेल टैंकरों पर हमले के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेज उछाल रुपये को प्रभावित करने वाला प्रमुख नकारात्मक कारक है।
उन्होंने कहा कि आरबीआई का बाजार में हस्तक्षेप रुपये में तेज गिरावट को रोकने में मदद करेगा। इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 101.12 पर लगभग स्थिर रहा।
निजी क्षेत्र के बैंक इंडसइंड बैंक के शेयर गुरुवार को पहली तिमाही (क्यू1) के नतीजे आने के बाद शुरुआती कारोबार में 6 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए। बैंक के शेयर बीएसई पर कारोबार के दौरान 6.30 प्रतिशत गिरकर 999.25 रुपए के इंट्राडे लो पर पहुंच गए। खबर लिखे जाने तक स्टॉक 6.13 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,004.30 रुपए पर कारोबार करता नजर आया।
बैंक के शेयरों में यह दबाव ऐसे समय आया, जब इंडसइंड बैंक ने बुधवार को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए। बैंक का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट बढ़कर 1,037.05 करोड़ रुपए रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 604.07 करोड़ रुपए था। इस दौरान प्रोविजन और कंटिन्जेंसी में 21 प्रतिशत की कमी आई और यह घटकर 1,384 करोड़ रुपए रह गया, जिससे मुनाफे को सहारा मिला।
बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (एनआईआई) सालाना आधार पर 1 प्रतिशत बढ़कर 4,685 करोड़ रुपए पहुंच गई। वहीं, ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (जीएनपीए) अनुपात सुधरकर 3.25 प्रतिशत हो गया। इसके अलावा, ग्रॉस स्लिपेज भी एक साल पहले के 2,567 करोड़ रुपए से घटकर 1,660 करोड़ रुपए रह गया।
इससे पहले जून में भी इंडसइंड बैंक के शेयरों पर दबाव देखने को मिला था। उस समय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि बैंक में कथित इनसाइडर ट्रेडिंग, कॉरपोरेट गवर्नेंस में अनियमितताओं और ऑडिट संबंधी कमियों की जांच की मांग को लेकर एक शिकायत कई सरकारी एजेंसियों के पास भेजी गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक व्हिसलब्लोअर ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ), नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (एनएफआरए) समेत कई एजेंसियों से शिकायत की थी। शिकायत में इनसाइडर ट्रेडिंग, वित्तीय रिकॉर्ड में कथित हेरफेर, माइक्रोफाइनेंस लोन की एवरग्रीनिंग, ऑडिट निष्कर्षों को दबाने और वरिष्ठ प्रबंधन व बोर्ड के सदस्यों द्वारा कथित अनियमितताओं को छिपाने जैसे आरोप लगाए गए थे।
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