अर्थतंत्र

थोक महंगाई में सितंबर में बड़ा उछाल, WPI दर 11.39% पर पहुंची, ईंधन की महंगाई 25.85%

सितंबर 2026 में थोक महंगाई दर बढ़कर 11.39 प्रतिशत हो गई। ईंधन, खाद्य वस्तुओं और विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में तेजी के साथ आउटपुट PPI में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई।

फोटोः सोशल मीडिया
फोटोः सोशल मीडिया 

  • सितंबर 2026 में थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई बढ़कर 11.39 प्रतिशत हो गई, जबकि अगस्त में यह 9.92 प्रतिशत थी।

  • ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में महंगाई की दर 25.85 प्रतिशत तक पहुंच गई, वहीं विनिर्मित उत्पादों में यह 9.76 प्रतिशत रही।-

  • थोक खाद्य महंगाई भी अगस्त के 7.05 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 8.66 प्रतिशत हो गई।

  • आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) बढ़कर 112.5 पर पहुंचा, जबकि विनिर्माण क्षेत्र का इनपुट प्राइस इंडेक्स 106.1 दर्ज किया गया।

देश में थोक महंगाई का दबाव सितंबर 2026 में और तेज हो गया। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर 11.39 प्रतिशत पर पहुंच गई। अगस्त में यह दर 9.92 प्रतिशत थी। लगातार दूसरे महीने थोक कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे कच्चे माल और उत्पादन लागत में बढ़ते दबाव का संकेत मिलता है।

सितंबर में सभी वस्तुओं का संयुक्त थोक मूल्य सूचकांक बढ़कर 112.5 हो गया, जबकि अगस्त में यह 110.8 था। कीमतों में बढ़ोतरी का असर प्राथमिक वस्तुओं, ईंधन और ऊर्जा तथा विनिर्माण- तीनों क्षेत्रों में दिखाई दिया। इससे साफ है कि महंगाई का दबाव किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा।

ईंधन और विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में भी तेजी

आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई दर 8.67 प्रतिशत रही, जो अगस्त में 7.76 प्रतिशत थी। ईंधन एवं ऊर्जा क्षेत्र में यह दर 22.93 प्रतिशत से बढ़कर 25.85 प्रतिशत हो गई। वहीं, विनिर्मित उत्पादों की महंगाई अगस्त के 8.37 प्रतिशत से बढ़कर 9.76 प्रतिशत दर्ज की गई।

सूचकांक के स्तर पर भी तीनों क्षेत्रों में बढ़ोतरी हुई। सितंबर में प्राथमिक वस्तुओं का सूचकांक 120.3, ईंधन एवं ऊर्जा का 110.5 और विनिर्मित उत्पादों का 110.2 रहा। खनिज तेल, कच्चा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, कोयला एवं लिग्नाइट, बेसिक मेटल्स, रसायन, वस्त्र, रबर और प्लास्टिक उत्पाद तथा विद्युत उपकरणों की कीमतों में वृद्धि थोक महंगाई बढ़ने के प्रमुख कारणों में शामिल रही।

खाद्य महंगाई भी बढ़ी, आगे खुदरा कीमतों पर पड़ सकता है असर

थोक महंगाई के आंकड़ों में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी भी चिंता का विषय रही। प्राथमिक खाद्य वस्तुओं और विनिर्मित खाद्य उत्पादों को शामिल करने वाला WPI फूड इंडेक्स सितंबर में सालाना आधार पर 8.66 प्रतिशत बढ़ा। अगस्त में इसकी वृद्धि दर 7.05 प्रतिशत थी। खाद्य आपूर्ति शृंखला में लागत का दबाव बढ़ने से आगे चलकर खुदरा महंगाई पर भी असर पड़ने की आशंका है।

आउटपुट PPI बढ़ा, कच्चे माल की लागत का दबाव बरकरार

सितंबर में आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) भी अगस्त के 110.8 से बढ़कर 112.5 पर पहुंच गया। कृषि, वानिकी एवं मत्स्य पालन, खनन और विनिर्माण क्षेत्रों में उत्पादक कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि बिजली क्षेत्र का सूचकांक अपेक्षाकृत कम रहा।

वहीं, विनिर्माण क्षेत्र के लिए जारी प्रायोगिक इनपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (IPPI) सितंबर में 106.1 रहा। यह उद्योगों में कच्चे माल और अन्य इनपुट की लागत से जुड़े दबाव को दर्शाता है।

सरकार ने जुलाई 2026 के अंतिम संशोधित आंकड़े भी जारी किए हैं। इनके मुताबिक, जुलाई का WPI सूचकांक 110.0 पर अपरिवर्तित रहा और उस महीने की अंतिम महंगाई दर 9.78 प्रतिशत रही। जुलाई का आउटपुट PPI भी संशोधन के बाद 109.9 पर स्थिर रहा।

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