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तीस हजारी कांड में स्पेशल कमिश्नर सहित 2 की कुर्सी गई, न्यायिक जांच के लिए गठित की गई कमेटी

तीस हजारी कोर्ट के वकील और दिल्ली पुलिस के बीच हुए बबाल के बाद रविवार को ही दिल्ली हाईकोर्ट ने पूरे मामले में स्वत: संज्ञान ले लिया था। साथ ही हाईकोर्ट ने जांच के लिए रिटायर्ड जज एस.पी. गर्ग के नेतृत्व में एक कमेटी भी बनाई।

फोटो: सोशल मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया 

शनिवार को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में हुए बबाल में दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था उत्तरी परिक्षेत्र) वरिष्ठ आईपीएस संजय सिंह और उत्तरी जिले के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त हरेंद्र कुमार सिंह को उनके पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है।

दोनों अधिकारियों को हटाए जाने का आदेश दिल्ली हाईकोर्ट ने रविवार को दिया। 24 घंटे के अंदर हुई इस बड़ी कार्रवाई ने 31 साल पहले पूर्व आईपीएस किरण बेदी और वकीलों के बीच हुए संघर्ष की यादें ताजा कर दीं। अगर यह कहा जाए कि 17 फरवरी, 1988 के बाद पुलिस और वकीलों के बीच हुई किसी बड़ी लड़ाई में वकील एक बार फिर दिल्ली पुलिस पर भारी पड़ गए तो यह गलत नहीं होगा।

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बात दो आला-अफसरों से उनकी कुर्सी छिनने तक ही सीमित रहती तो गनीमत थी। हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक को दो टूक आदेश दिया कि पूरे घटनाक्रम में घायल वकीलों के बयान पुलिस कमिश्नर खुद दर्ज करेंगे।

गौरतलब है कि एक दिन पहले ही दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने मामले की जांच के लिए जब क्राइम ब्रांच की एसआईटी गठित की, तो उन्हें इसका गुमान तक न रहा होगा कि घायल वकीलों के बयान उनके द्वारा गठित की गई एसआईटी को नहीं, वरन स्वयं उन्हें (पुलिस कमिश्नर) ही दर्ज करने का हुक्म हाईकोर्ट द्वारा सुना दिया जाएगा।

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दिल्ली पुलिस के करीब 40 साल के इतिहास में यह पहला मौका माना जा रहा है, जब किसी पुलिस कमिश्नर (अमूल्य पटनायक) को घायलों के बयान दर्ज करने-कराने पड़ रहे हों।

तीस हजारी कोर्ट के वकील और दिल्ली पुलिस के बीच हुए बबाल के बाद रविवार को ही दिल्ली हाईकोर्ट ने पूरे मामले में स्वत:-संज्ञान ले लिया था। साथ ही हाईकोर्ट ने जांच के लिए रिटायर्ड जज एस.पी. गर्ग के नेतृत्व में एक कमेटी भी बनाई। हाईकोर्ट ने जांच कमेटी की मदद के लिए सीबीआई, विजिलेंस और आईबी के डायरेक्टर्स को कहा है।

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स्वत:संज्ञान लेने वाली हाईकोर्ट की इसी कमेटी ने विशेष पुलिस आयुक्त संजय सिंह और अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त हरेंद्र कुमार सिंह को हटाने सहित कई आदेश एक साथ जारी कर दिए। हाईकोर्ट को दिल्ली पुलिस की ओर से बताया गया कि इन्हीं दोनों अधिकारियों के कहने पर तीस हजारी अदालत में बबाल के दौरान वकीलों पर गोली चलाई गई थी।

इस मामले में गोली चलाने के आरोपी सहायक उप निरीक्षक पवन कुमार का तबादला कर दिया गया है, जबकि दूसरे सहायक पुलिस उप निरीक्षक कामता प्रसाद, जिस पर गोली चलाने जैसा गंभीर आरोप है ही नहीं, उसे हड़बड़ाई दिल्ली पुलिस ने जल्दबाजी में सस्पेंड कर डाला है।

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उधर, दिल्ली पुलिस के दिल्ली हाईकोर्ट में स्टैंडिंग काउंसिल ने मीडिया को बताया कि पुलिस ने आंतरिक जांच के लिए दो टीम बनाई हैं। एक क्राइम ब्रांच डीसीपी टिर्की के नेतृत्व में एसआईटी और दूसरी जांच कमेटी में दिल्ली पुलिस खुफिया अनुभाग के विशेष आयुक्त, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त सतर्कता शाखा और स्पेशल ब्रांच के डीसीपी को रखा गया है।

मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी.एन. पटेल और न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर की खंडपीठ ने स्वत:संज्ञान लेने के बाद गठित न्यायिक जांच कमेटी को आदेश दिया कि वह अपनी रिपोर्ट 6 हफ्ते के भीतर पेश करे।

(आईएएनएस इनपुट के साथ)

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