
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) को करारा झटका देते हुए 26 साल से अधिक समय के बाद सत्ता में वापसी की, वहीं बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) जैसी पार्टियां एक प्रतिशत वोट हासिल करने में भी विफल रहीं।
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक (एआईएफबी) को एक भी वोट नहीं मिला, जबकि कुल पड़े मतों में एआईएमआईएम को 0.78 फीसदी, बसपा को 0.58 फीसदी, सीपीआई को 0.2 फीसदी और जनता दल(यूनाइटेड) को 0.86 फीसदी वोट मिले।
कुल 0.56 प्रतिशत मतदाताओं ने ‘नोटा’ (उपरोक्त में से कोई नहीं) का विकल्प चुना।
असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली एआईएमआईएम ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में केवल दो सीट (ओखला और मुस्तफाबाद) पर चुनाव लड़ा था, लेकिन वह अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में कामयाब रही और उसके दोनों उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहे।
वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों के आरोपी और वर्तमान में जेल में बंद शिफा उर रहमान खान तथा ताहिर हुसैन, दोनों ने ‘आप’ के वोट प्रतिशत को कम किया।
इस बीच, बीएसपी एक बार फिर दिल्ली में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में विफल रही। पार्टी ने सभी 70 विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ा, लेकिन वह कुल पड़े वोट का एक फीसदी भी हासिल नहीं कर सकी।
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, बीजेपी ने 70 में से 47 सीट पर जीत दर्ज की है, जबकि एक सीट पर बढ़त बनाये हुए है।
पीटीआई के इनपुट के साथ
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