
देश में इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। मौसम विभाग के अनुसार जून से सितंबर के बीच देश में औसतन 80 सेंटीमीटर बारिश होने का अनुमान है, जो दीर्घकालिक औसत 87 सेंटीमीटर से कम है। कुल मिलाकर मानसून 92 प्रतिशत तक रहने की संभावना जताई गई है।
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आईएमडी के महानिदेशक एम. महापात्र ने बताया कि इस साल मानसून सामान्य से कम रहने का एक प्रमुख कारण एल नीनो की स्थिति का बनना हो सकता है। जलवायु मॉडल संकेत दे रहे हैं कि जून के आसपास अल नीनो विकसित हो सकता है, जो आमतौर पर भारत में कम बारिश से जुड़ा होता है।
वर्तमान में प्रशांत महासागर में कमजोर ला नीना की स्थिति खत्म होकर सामान्य (तटस्थ) अवस्था में बदल रही है। इसके अलावा उत्तरी गोलार्द्ध में जनवरी से मार्च के बीच हिमपात सामान्य से थोड़ा कम रहा है, जो मानसून पर असर डाल सकता है।
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मौसम विभाग के अनुसार मानसून के दूसरे चरण में हिंद महासागर द्विध्रुव की स्थिति बनने की संभावना है। इस स्थिति में हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से में तापमान बढ़ता है और पूर्वी हिस्से में ठंडक रहती है, जिससे हवाओं का रुख बदलता है।
आईएमडी का मानना है कि पॉजिटिव आईओडी के कारण बारिश में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को कुछ हद तक संतुलित किया जा सकता है।
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आईएमडी हर साल अप्रैल के मध्य में मॉनसून का पहला पूर्वानुमान जारी करता है और मई के अंत में इसे अपडेट किया जाता है। इस बार भी अप्रैल में जारी अनुमान के अनुसार देश में बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना जताई गई है।
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इसी बीच मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर में आने वाले दिनों में गर्मी बढ़ने की चेतावनी दी है। अगले सप्ताह तक अधिकतम तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जिससे गर्मी का असर तेज हो जाएगा।
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