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'मोदी सरकार ने जनता को महंगाई का 'रिटर्न गिफ्ट' दिया', शिवसेना (UBT) का ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर तंज

संपादकीय में कहा गया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से जुड़ा 'दबा हुआ सच' आखिरकार सामने आ ही गया क्योंकि कीमतें 3 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दी गई हैं।

शिवसेना (UBT) ने ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र पर साधा निशाना
शिवसेना (UBT) ने ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र पर साधा निशाना  

शिवसेना (यूबीटी) ने शनिवार को ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र की आलोचना की। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' के एक संपादकीय के अनुसार पार्टी ने आरोप लगाया कि जनता को महंगाई की मार से और भी ज्यादा मुश्किल में डाल दिया गया है।

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संपादकीय में कहा गया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से जुड़ा 'दबा हुआ सच' आखिरकार सामने आ ही गया क्योंकि कीमतें 3 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दी गई हैं। यह मूल्य वृद्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के मुख्यमंत्रियों द्वारा अचानक ईंधन बचाने के गुणगान करने के ठीक दो दिन बाद लागू हुई। जनता ने बीजेपी को लगातार तीन बार सत्ता सौंपी और बदले में केंद्र ने जनता को महंगाई का 'रिटर्न गिफ्ट' दिया है।

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ठाकरे गुट ने दावा किया कि सरकार ने पांच राज्यों में चुनाव खत्म होने तक ईंधन की कीमतों पर पूरी तरह चुप्पी साध रखी थी। संपादकीय में कहा गया कि उस समय, बीजेपी के सदस्य बड़े-बड़े दावे कर रहे थे कि कैसे पीएम मोदी ने भारत को ईरान युद्ध के प्रभाव से बचाए रखा और नागरिकों को ईंधन की कमी व कीमतों में बढ़ोतरी से सुरक्षित रखा। वहीं, जैसे ही चुनाव खत्म हुए और बीजेपी की जीत का जश्न मनाया गया। सैकड़ों वाहनों के साथ विशाल रोड शो हुए और लाखों लीटर ईंधन की खपत हुई। इसके बाद, अचानक प्रधानमंत्री को 'किफायत और विदेशी मुद्रा बचाने' की गहरी चिंता सताने लगी।

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अचानक सरकार को देश पर मंडराते ईंधन संकट, सोने के आयात के कारण विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे बोझ और भारतीय रुपये के भारी अवमूल्यन का एहसास हुआ। इस एहसास के बाद, पीएम ने जनता से ईंधन बचाने की अपील की। ​​जब विपक्ष ने इस कदम की आलोचना की, तो परेशान बीजेपी नेताओं ने विपक्ष को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। अब सरकार द्वारा ईंधन की कीमतों में की गई ताजा बढ़ोतरी के बारे में उनके पास कहने के लिए क्या है। ईंधन की कीमतें बढ़ाकर और सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर सरकार ने असल में विपक्ष के आरोपों को सही साबित कर दिया है।

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संपादकीय के अनुसार, खाड़ी में युद्ध लगभग तीन महीनों से चल रहा है, जिसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। फिर भी, सत्ताधारी पार्टी ने खूब ढोल पीटा, यह दावा करते हुए कि भारत पर इसका कोई असर नहीं पड़ा और वह भी सिर्फ पीएम मोदी की वजह से। आज, सरकार को खुद ही इस भ्रम को तोड़ना पड़ा है।

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पीएम मोदी की अपील के महज तीन दिनों के भीतर ही, सरकार ने जनता को महंगाई की आग में झोंक दिया। सोने और चांदी की कीमतें तो पहले से ही आम आदमी की पहुंच से बाहर हैं। दूध भी दो रुपए महंगा हो गया है। अब, पेट्रोल और डीजल के महंगे होने से, सब्जियों और फलों से लेकर सभी जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ जाएंगी। इसके अलावा, कौन कह सकता है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में यह बढ़ोतरी यहीं रुक जाएगी। अगर खाड़ी में युद्ध की स्थिति शांत नहीं होती है, तो ये कीमतें निश्चित रूप से और बढ़ेंगी।

आईएएनएस के इनपुट के साथ

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