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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मेला प्रशासन ने दूसरा नोटिस भेजा, इस बारे के नोटिस में क्या है नया?

नोटिस में कहा गया है, “आपके (स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद) इस कृत्य के कारण क्यों ना आपकी संस्था को दी जा रही भूमि एवं सुविधाओं को निरस्त कर आपको सदैव के लिए मेले में प्रवेश से प्रतिबंधित कर दिया जाए।”

फोटो: सोशल मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया 

माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मौनी अमावस्या स्नान करने से मेला पुलिस और प्रशासन द्वारा कथित तौर पर रोके जाने को लेकर जारी विवाद के बीच मेला प्रशासन ने उन्हें दूसरा नोटिस भेजकर पूछा है कि क्यों ना आपकी संस्था को दी जा रही भूमि एवं सुविधाओं को निरस्त कर आपको सदैव के लिए मेले में प्रवेश से प्रतिबंधित कर दिया जाए।

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प्रयागराज मेला प्राधिकरण द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मौनी अमावस्या पर आरक्षित पुल संख्या 2 पर लगे बैरियर को तोड़ते हुए बग्घी पर सवार होकर भीड़ के साथ जा रहे थे। उस समय स्नानार्थियों की अत्यधिक भीड़ थी और केवल पैदल आवागमन की अनुमति थी।

नोटिस के मुताबिक, “इस कृत्य के कारण मेला पुलिस और मेला प्रशासन को भीड़ प्रबंधन में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। स्वामी जी के इस प्रकार प्रवेश से भगदड़ होने और उससे प्रबल जनहानि होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था।”

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नोटिस में कहा गया है, “आपके (स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद) इस कृत्य के कारण क्यों ना आपकी संस्था को दी जा रही भूमि एवं सुविधाओं को निरस्त कर आपको सदैव के लिए मेले में प्रवेश से प्रतिबंधित कर दिया जाए।”

इस नोटिस को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने कहा, “अब सरकार बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है। शंकराचार्य शिविर पंडाल के पीछे प्रशासन ने यह नोटिस चस्पां किया और वह भी पिछली तिथि (18 जनवरी) में और प्रशासन के कर्मचारी द्वारा बताने पर ही हम लोग इस नोटिस के बारे में जान सके।”

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इससे पूर्व मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को नोटिस जारी कहा था कि उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन सिविल अपील में आदेश दिया था कि जब तक अपील निस्तारित नहीं हो जाती, तब तक कोई भी धर्माचार्य ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं हो सकता।

नोटिस में कहा गया था कि इससे स्पष्ट है कि कोई भी धर्माचार्य ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं किया गया है, बावजूद इसके प्रयागराज माघ मेला 2025-26 में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा अपने शिविर में लगाए गए बोर्ड पर स्वयं को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य घोषित व प्रदर्शित किया गया है।

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