
ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने गुरुवार को अपनी “अमेरिका प्रथम” आर्थिक नीति को और अधिक सख्त करते हुए इस्पात, एल्यूमीनियम, तांबा और विदेशों से आने वाली दवाओं पर नए आयात शुल्क नियमों की घोषणा की है। इन बदलावों का उद्देश्य आयात व्यवस्था को अधिक स्पष्ट बनाना और विदेशी दवा कंपनियों तथा धातु निर्यातकों पर दबाव बढ़ाना है, ताकि वे अपनी निर्माण इकाइयाँ अमेरिका में स्थापित करें।
ट्रंप प्रशासन ने व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 232 के तहत इस्पात, एल्यूमीनियम और तांबे के आयात पर 50% शुल्क को पहले की तरह जारी रखा है, लेकिन इसकी गणना करने की पद्धति में बड़ा परिवर्तन किया गया है। अब यह शुल्क केवल धातु की मात्रा के आधार पर नहीं, बल्कि उस कुल मूल्य पर लगाया जाएगा जो अमेरिकी खरीदार वास्तव में भुगतान करते हैं।
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दवा निर्माण क्षेत्र में भी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। कुछ विशेष आयातित दवाओं पर अब 100% तक शुल्क लगाया जा सकता है। यह नियम उन अधिकार-सुरक्षित दवाओं पर लागू होगा जो ऐसे देशों में तैयार होती हैं, जिनका अमेरिका के साथ शुल्क संबंधी समझौता नहीं है। बड़े दवा निर्माताओं के लिए ये नियम 120 दिनों में लागू होंगे, जबकि छोटे निर्माताओं को 180 दिनों की अवधि दी गई है। यह कदम विशेष रूप से उन कंपनियों को प्रभावित करेगा, जिन्होंने अमेरिका के साथ विशेष मूल्य निर्धारण संबंधी समझौता नहीं किया है।
इन बदलावों के पीछे प्रशासन का मुख्य उद्देश्य आयात मूल्य कम दिखाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, कई आयातक कम शुल्क देने के लिए वस्तुओं का मूल्य वास्तविक से कम दर्शाते थे। नए नियम इस समस्या को समाप्त करने की दिशा में उठाया गया कदम माने जा रहे हैं।
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इसके अलावा जिन उत्पादों में धातु की मात्रा 15% से कम है, उन पर पहले लागू 50% शुल्क को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। वहीं 15% से अधिक धातु सामग्री वाले भारी उपकरणों, जैसे धुलाई मशीन और गैस चूल्हे जैसे उत्पादों पर अब धातु की मात्रा के बजाय पूरे उत्पाद के मूल्य पर 25% समान दर से शुल्क लगाया जाएगा। विदेशों में तैयार लेकिन पूरी तरह अमेरिकी इस्पात या तांबे से बने उत्पादों पर रियायती दर से केवल 10% शुल्क लगाया जाएगा।
साथ ही बिजली आपूर्ति तंत्र और औद्योगिक उपकरणों पर लगाए जाने वाले शुल्क को 50% से घटाकर 15% कर दिया गया है, ताकि देश में आधारभूत ढांचे के निर्माण कार्यों को तेज गति मिल सके।
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