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ईरान के निशाने पर टेस्ला, एप्पल समेत अमेरिका की 18 कंपनियां, IRGC ने कर्मचारियों को इलाका छोड़ने की दी चेतावनी

आईआरजीसी ने कहा कि अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए आतंकवादी हमलों के जवाब में इन कंपनियों को लीगल टारगेट माना जाएगा। आईआरजीसी ने कहा कि अमेरिकी आईटी और एआई कंपनियां हत्याओं की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने में मुख्य भूमिका निभाती हैं।

ईरान के निशाने पर टेस्ला, एप्पल समेत अमेरिका की 18 कंपनियां, IRGC ने कर्मचारियों को इलाका छोड़ने की दी चेतावनी
ईरान के निशाने पर टेस्ला, एप्पल समेत अमेरिका की 18 कंपनियां, IRGC ने कर्मचारियों को इलाका छोड़ने की दी चेतावनी फोटोः सोशल मीडिया

पश्चिम एशिया में एक महीने से जारी जंग आसमान और जमीन से होते हुए अब सीधा टेक्नोलॉजी तक पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तहत-तरह के दावों के बीच ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने 18 अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों के खिलाफ हमले को लेकर चेतावनी जारी की है, जिनमें टेस्ला, माइक्रोसॉफ्ट और एप्पल जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। ईरान ने मिडिल ईस्ट में इन अमेरिकी कंपनियों के कर्मचारियों को चेतावनी देते हुए कहा है कि अपनी जान बचाने के लिए इस इलाके को छोड़ दें।

आईआरजीसी ने माइक्रोसॉफ्ट और एप्पल के साथ ही गूगल, इंटेल, बोइंग, एस्पायर, आईबीएम, मेटा, एचपी, एनवीडिया जैसी बड़ी टेक कंपनियों के लिए चेतावनी जारी की है। आईआरजीसी ने कहा कि अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए आतंकवादी हमलों के जवाब में इन कंपनियों को लीगल टारगेट माना जाएगा। आईआरजीसी ने अपने बयान में कहा कि अमेरिकी आईटी और एआई कंपनियां हत्याओं की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने में मुख्य भूमिका निभाती हैं।

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आईआरजीसी ने अपनी चेतावनी में यह भी कहा कि ईरान में आतंकवाद के बदले में इन कंपनियों की संबंधित सुविधाओं पर हमला किया जाएगा। चेतावनी के मुताबिक कर्मचारियों और आस-पास रहने वाले लोगों को एक किलोमीटर के दायरे से बाहर निकलने की सलाह दी गई है। बताया जा रहा है कि ईरान का यह हमला 1 अप्रैल 2026 को तेहरान के समय अनुसार रात 8 बजे शुरू होने वाला है।

आईआरजीसी ने अपने बयान में जिन अमेरिकी कंपनियों को चेतावनी दी है उनमें सिस्को, एचपी, इंटेल, ओरेकल, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल, गूगल, मेटा, आईबीएम, डेल, पलान्टिर, एनवीडिया, जे पी मॉर्गन, टेस्ला, जीई, स्पायर सॉल्यूशंस, जी42 और बोइंग जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। इससे कुछ दिन पहले ही ईरान की एक हैकिंग वेबसाइट ने अमेरिका के एफबीआई डायरेक्टर काश पटेल का पर्सनल जीमेल अकाउंट हैक कर लिया था और उनकी सारी जानकारी सोशल मीडिया पर जारी कर दिया था।

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ईरान के इस्फहान परमाणु केंद्र पर अमेरिका का हमला

अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच मंगलवार तड़के अमेरिकी हमले में ईरान के इस्फहान शहर में स्थित एक परमाणु ठिकाने को निशाना बनाया गया, जबकि तेहरान ने जवाबी कार्रवाई में दुबई तट के पास एक कुवैती तेल टैंकर पर हमला किया। इन घटनाओं ने क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता को और बढ़ा दिया है।

खबर के अनुसार, इस्फहान में हुए हमले के बाद आसमान में काफी ऊंचाई तक आग फैलती हुई दिखी। यह वही क्षेत्र है जहां पिछले साल जून में भी अमेरिकी सेना ने कार्रवाई की थी। अमेरिकी कार्रवाई के बाद भी इस्फहान में ईरान का संवर्धित यूरेनियम संग्रहित होने की आशंका जताई जाती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमले का वीडियो साझा करते हुए कहा कि संघर्ष विराम के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।

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इस बीच, ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में हमले तेज करते हुए दुबई के जलक्षेत्र में एक कुवैती तेल टैंकर को ड्रोन से निशाना बनाया, जिससे उसमें आग लग गई। हालांकि बाद में आग पर काबू पा लिया गया। इस घटना में दुबई में चार लोग घायल भी हुए। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि ईरान केवल अमेरिकी बलों को निशाना बना रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि अमेरिकी बलों को क्षेत्र से बाहर किया जाना चाहिए।

उधर, क्षेत्रीय तनाव के बीच बहरीन में सायरन की आवाज सुनाई दीं, जबकि सऊदी अरब ने राजधानी रियाद की ओर दागी गईं तीन बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया। ड्रोन के मलबे से छह घरों को मामूली नुकसान पहुंचा। यरुशलम में भी सायरन सुनाई दिए और इजरायल ने ईरान की ओर से मिसाइल हमले की चेतावनी जारी की।

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इसके अलावा, लेबनान में जारी सैन्य अभियान के दौरान इजरायल के चार सैनिकों और दो संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों की मौत की भी खबर है, जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आपात बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष और बढ़ता है तथा प्रमुख समुद्री मार्गों पर असर जारी रहता है, तो इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

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